आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और बसपा प्रमुख मायावती दोनों एक दूसरे को उकसा रहे हैं , हालांकि मायावती के मुंह लगना, भागवत की शान और उसूल दोनों के खिलाफ है, लेकिन उनकी मजबूरी यह है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा कतई अच्छी स्थिति में नहीं है, ऐसे में यह जरूरी हो चला है कि बात मुद्दों और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियों की न होकर हिन्दुत्व के इर्द गिर्द इस तरह रहे कि दलितों के दामन पर किसी तरह के छींटे न पड़ें.

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