दलितों को नेतृत्व देने में असफल हो रही बसपा नेता मायावती ने राज्यसभा से अपना त्यागपत्र देकर अपने जनाधार को दोबारा हासिल करने का प्रयास किया है. मायावती को यह पता है कि भाजपा के द्वारा रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाये जाने से उसका कोई प्रभाव दलितों के बीच नहीं पड़ेगा. ऐसे में वह सहारनपुर कांड के ‘दलित-ठाकुर विवाद’ को अपना मुद्दा बनाकर राज्यसभा से अपना त्यागपत्र दे दिया है. मायावती का आरोप है कि उनको राज्यसभा में अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया. मायावती के त्यागपत्र के पीछे राज्यसभा में उनके दोबारा पहुंचने की चुनौती भी है. मायावती के राज्यसभा कार्यकाल का केवल 9 माह का समय ही बचा है. उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा में बसपा के मेम्बर इतने नहीं है कि मायावती राज्यसभा की मेम्बर बन सके. ऐसे में उनको किसी दूसरे दल का सहारा लेना ही पड़ेगा.

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