देश बिजली, पानी, सड़क और भ्रष्टाचार से त्रस्त है और हमारे तथाकथित जनसेवक नेता इन पर गौर फरमाने के बजाय घोटाले करने व मूर्तियों पर जनता का पैसा उड़ाने में मसरूफ हैं. वे विकास के नाम पर औद्योगिक घरानों, नौकरशाहों और दलालों के गठजोड़ बना कर जनता को ठगने में जुटे हैं. राजनेताओं के पास जनता की तरक्की का कोई फार्मूला नहीं है. उन्होंने देश को क्या दिया, क्या देंगे, क्या दे सकते हैं, पेश है इस पर विश्लेषणपरक लेख.

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