'घर वापसी' धर्म के नाम पर दंगल करने वालों को बेशक रास नहीं आ रहा हो, लेकिन नेताओं को इस शब्द से कोई परहेज नहीं है. तभी तो हरियाणा जनहित कांग्रेस (भजनलाल) के प्रमुख कुलदीप बिश्नोई की तकरीबन 9 साल के बाद कांग्रेस में घर वापसी हुई है.

हरियाणा जनहित कांग्रेस का गुरुवार, 28 अप्रैल को सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया गया. हजकां प्रमुख कुलदीप बिश्नोई ने दिल्ली में इस विलय की घोषणा की.

यह विलय बड़े नेताओ की मौजूदगी में हुआ, जिस में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला, कुमारी शैलजा, अशोक तंवर, किरण चौधरी और कांग्रेस के हरियाणा प्रभारी शकील अहमद मौजूद रहे.

याद रहे कि हजकां को कुलदीप बिश्नोई के पिता और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल ने साल 2007 में कांग्रेस से अलग होने के बाद बनाया था. कांग्रेस पार्टी की ओर से साल 2005 में जाट नेता भूपेंदर सिंह हुड्डा को प्राथमिकता दिए जाने से नाराज हो कर भजनलाल ने यह पार्टी बनाई थी. 3 जून, 2011 को भजनलाल की मृत्यु हो जाने के बाद कुलदीप बिश्नोई ने पार्टी की कमान संभाल ली थी.

उन्होंने इस विलय का ऐलान करते हुए कहा कि वे कभी कांग्रेस से अलग नहीं हुए थे. कांग्रेस उन के खून में है और मतभेद अब दूर हो चुके हैं.

क्या वाकई ऐसा ही है? दरअसल, साल 2014 के संसदीय चुनावों के लिए हजकां ने भाजपा के साथ गठबंधन किया था. पिछले हरियाणा विधानसभा चुनाव में यह पार्टी अलग से लड़ी थी और इसे कुल 2 सीटें ही मिली थी. कुलदीप बिश्नोई आदमपुर, हिसार से जीते थे, जबकि उन की पत्नी रेणुका बिश्नोई हांसी से जीती थीं.

कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि वे कांग्रेस को मजबूत करने के लिए काम करेंगे. वे पार्टी के एक आम कार्यकर्ता की तरह काम करेंगे और उन्होंने कोई शर्त नहीं रखी हैं, न ही वे किसी पद के लालच में वापस आए हैं. 

इस घर वापसी पर हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर के कहा कि हजकां का कांग्रेस में विलय तो हो गया है, लेकिन इस का कोई फायदा नहीं होने वाला. उन्होंने अंग्रेजी में लिखा कि एचजेसी मर्जिज विद कांग्रेस. इट इज लाइक जीरो प्लस जीरो, इज इक्वल टू जीरो.

इस बात में दम भी दिख रहा है, क्योंकि हाल ही में हरियाणा में जाट बनाम गैरजाट के नाम पर जो राजनीति हुई है, उस से कांग्रेस का कुलदीप बिश्नोई को अपने साथ लेना ज्यादा फायदे का सौदा लग नहीं रहा है. कांग्रेसी नेता भूपेंदर सिंह हुड्डा को यह विलय रास नहीं आ रहा है, क्योंकि वे कभी नहीं चाहेंगे कि कांग्रेस में उन का कद छोटा हो.

भविष्य में इस विलय का जो भी अंजाम हो लेकिन हरियाणा की राजनीति में इस 'घर वापसी' से कोई हलचल मची हो, ऐसा लग नहीं रहा है.

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