सहिष्णुता का पाठ पढ़ाने वाले भजभज मंडली की असहिष्णुता भरी गुंडई की खूब आलोचना हो रही है. वाकया उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का है, जहां धर्म के रथ पर सवार हो कर वोट मांगने वाले भजभजी मंडलियों ने अपने भगवान के रथ को खींचने वाले घोड़े की टांग तोड़ डाली. घोड़े का कुसूर इतना भर था कि उस ने एक भाजपाई को लात मार दी. फिर क्या था, गुस्से से आगबबूला मसूरी के भाजपा विधायक गणेश जोशी ने आव देखा न ताव, घोड़े की टांग पर ताबड़ेतोड़ डंडे मार कर उस का पैर तोड़ डाला. जोशी का गुस्सा तब तक शांत नहीं हुआ जब तक घोड़े की टांग न टूट गई और वह बीच सड़क पर गिर न गया.

हर तरफ हो रही आलोचना

दरअसल, राज्य में भाजपा ने विरोधस्वरूप विधानसभा का घेराव किया था. वहां कई पुलिस वाले भी मौजूद थे. भाजपाईयों की नारेबाजी, गुंडागर्दी में किसी ने घोड़े को छेड़े दिया. घोड़े ने खुद के बचाव में लात क्या चला दी, उस की शामत आ गई. राज्य के सीएम हरीश रावत ने भी इस की जम कर आलोचना की है.

यह कैसी दबंगई

यों भी इस देश में नेताओं की दबंगई सदन की कार्यवाही में देश दुनिया के लोग बराबर ही देखते हैं. माइक तोड़ेने से लेकर कुरसियां फेंकने व आपस में जूतम पैजात करते इन्हें मजा आता है और ये समझते हैं कि इस से ये सुर्खियों में रहेंगे. मगर एक निर्दोष व बेजबान की टांग तोड़े कर मार देने वाली यह शायद पहली ही घटना होगी.

क्या कानूनी डंडा चलेगा अब

यों विरोध जताना और अपनी मांग रखना हर किसी का मौलिक अधिकार है, पर यह अधिकार कानून ने किसी को नहीं दिया है कि कोई तालिबानी जुल्म करे. अब कानून का डंडा नेताजी पर चलेगा. जानवरों की हितों की रक्षा करने वाली संस्था भी नेताजी के पीछे पड़ेगे. पर होगा कुछ नहीं यह तय है. भला नेताओं का कभी कुछ बिगाड़ पाया है किसी ने?

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