आर्थिक अनियमितताओं का खुलासा कर भारत के पूर्व सीएजी विनोद राय ने अपने साहस के बल पर सरकारों की भ्रष्ट करतूतों को उजागर किया. क्या नवनियुक्त सीएजी ऐसा कर पाएंगे? पढि़ए जगदीश पंवार का लेख.

अपने कार्यकाल में सरकारों की नाक में दम करने वाले महालेखा परीक्षक विनोद राय की सेवानिवृत्ति के बाद आए उन के उत्तराधिकारी शशिकांत शर्मा की नियुक्ति को ले कर विरोध उठ खड़ा हुआ है. रक्षा सचिव के पद से आए शशिकांत शर्मा का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि  उन के कार्यकाल के दौरान जो रक्षा सौदे हुए थे उन में भारी घोटाले की बात उजागर हुई थी. अब उन्हीं रक्षा सौदों के औडिट का काम रक्षा सचिव से सीएजी बने शशिकांत शर्मा करेंगे. लिहाजा, आम आदमी पार्टी समेत कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस नियुक्ति को खारिज करने की दरख्वास्त की है.

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