कोर्ट रूम में जब दो दिग्गज वकील आमने सामने होते हैं तो असली लुत्फ वहां मौजूद लोगों और जज को भी आता है. हालत दंगल जैसे होते हैं जिसमे बराबरी के दो पहलवान लंगोट बांधे पहले नजरों से एक दूसरे की हैसियत और मनोवल नापते हैं फिर अपने गुरु और इष्ट का ध्यान करते दांव पेंच आजमाने लगते हैं. अखाड़े की धूल छंटने के बाद कुश्ती प्रेमियों को दिखता है कि किस पहलवान की छाती पर दूसरे का पांव रखा है और वह शान से अपनी मूंछों पर ताव देकर जता रहा है कि देख लो अच्छे से कि मैं ही वह सूरमा हूं जिसने नीचे पड़े वाले को चित कर पिद्दी बना दिया.

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