पाकिस्तानी सीमा में अवैध प्रवेश से शुरू हुआ सरबजीत का सफर यातना भरी सजा, माफी की गुहार और भारत व पाकिस्तान के अस्पष्ट रवैए के उलझे गलियारों से गुजरता हुआ दर्दनाक मौत पर खत्म हुआ. पर क्या यह मौत सच में शहादत थी?

‘‘वह अपने देश जिंदा वापस नहीं लौट सका.’’ भारतीय रक्षा क्षेत्र में बसे एक गांव वाह तारा सिंह में रहने वाले 70 वर्षीय हट्टेकट्टे सरदार गुरदीप सिंह ने 23 साल पहले घटी इस घटना को कुछ इसी तरह बयां किया. गुरदीप सरबजीत के उन खास दोस्तों में हैं जिन के साथ सरबजीत का अधिकांश समय गुजरता था.

COMMENT