नेपाल के नए संविधान की वजह से भारत और नेपाल के सालों पुराने रिश्ते पर दोधारी तलवार लटक गई है. नए संविधान में मधेशी ही नहीं बल्कि भारत की भी अनदेखी की गई है. ऐसा कर के नेपाल ने खुद ही अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है और भारत की सुरक्षा के लिए भी संकट खड़ा कर दिया है. नेपाली माओवादी पार्टियों की चीन से नजदीकियां बढ़ाने और भारत को तवज्जुह नहीं देने की सोचीसमझी साजिश है. मधेशी आंदोलन की वजह से भारत से जरूरी चीजों का आना बंद होने के बाद नेपाल ने चीन के सामने हाथ फैलाने में जरा भी देरी नहीं लगाई. नेपाल ने चीन से मांग की है कि वह नेपाल से लगी सीमा को खोल दे, ताकि वह जरूरत की चीजों को खरीद सके. नेपाल की इस मांग पर चीन की बाछें खिल गईं लेकिन भारत के लिए राहत की बात यह है कि पिछले दिनों नेपाल में आए भयंकर भूकंप से नेपाल और चीन के बीच बनी 27 किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह बरबाद हो गई, जिस से चीन को अपना ‘खेल’ खेलने का मौका नहीं मिल सका.

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