कविता जब नईनई दिल्ली आई तो शुरू के दिनों में अपनी एक सहेली नीना के साथ होस्टल में बतौर गेस्ट रही पर इसी के साथ उस ने अपने लिए एक घर ढूंढ़ना भी शुरू कर दिया. वह किसी को जानती तो थी नहीं और न ही उस की सहेली के पास अपनी नौकरी के चलते इतना समय था कि वह उस के साथ घर ढूंढ़े. इसलिए नीना ने इस सिलसिले में एक प्रौपर्टी डीलर से बात की और उसे अपना बजट बताते हुए किस तरह का घर उसे चाहिए, यह भी बता दिया.

COMMENT