मैं अपने महल्ले का स्थापित लेखक हूं. मेरे महल्ले में दूसरे महल्ले का लेखक पर भी नहीं मार सकता. महल्ले के शादी के निमंत्रण कार्डों से ले कर श्राद्ध के कार्डों तक का मैटर जब तक मेरे द्वारा पास नहीं कर दिया जाता तब तक वह एक कदम भी आगे नहीं बढ़ता. शादी हो जाए तो हो जाए, श्राद्ध हो जाए तो हो जाए. कल वे अपने मुंडन के कार्ड का मैटर फाइनल करवाने आए थे, आज उन का बेटा आ धमका. आते ही हांफते हुए बोला, ‘‘अंकल, अंकल, पापा पूछ रहे हैं कि आप के पास समय है? वे आप से कुछ जरूरी टौपिक पर बात करना चाहते हैं.’’ तो उस के मुंह से यह सुन मैं चौंका.

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