मैं और मेरी कार, हम दोनों के बीच एक अजीब सा बेतार का बंधन है. पढ़ कर चौंकिए मत, मैं अपने पूरे होशोहवास के साथ यह बात कह रही हूं. यों तो मैं ने कार चलाना सीखा था 16 वर्ष की उम्र में पर न वह कार मेरी थी और न ही उस से मेरा कोई रिश्ता जुड़ा. यह रिश्ता तो जुड़ा मेरी अपनी कार से, जो मेरी थी, बिलकुल मेरी अपनी, प्यारी सी, छोटी सी, मेरा सब कहना मानने वाली. जहां कहो चल देगी, न कोई सवाल, न कोई तर्क और न ही कोई बहाना.

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