आज के दौर में भारत में क्रिकेट के बाद कबड्डी और कुश्ती को ज्यादा सुर्खियां मिलने लगी हैं. कुश्ती की बात करें तो संग्राम सिंह का चेहरा सामने आता है. हाल ही में उन्होंने चंडीगढ़ के पीजीआई के कैंसर पीडि़त बच्चों के लिए ‘कुश्ती फोर कौज’ नाम से कुश्ती का आयोजन किया जिस में उन्होंने अमेरिकी पहलवान रौबी ई को 5 राउंड तक चले मुकाबले में 16-7 के स्कोर से हरा दिया.

मोहाली इंटरनैशनल हौकी स्टेडियम दर्शकों से खचाखच भरा था. संग्राम सिंह भारत में कुश्ती को प्रमोट करने के लिए जुटे हुए हैं. इस मैच को जीतने के बाद उन्होंने कहा कि मैं मोहाली के लोगों का उत्साह देख कर रोमांचित हूं. मेरे लिए अपने लोगों के सामने खेलना सम्मान की बात है. मैं देश के हर कोने से बेहतर खिलाड़ी निकालने की कोशिश करूंगा.

संग्राम सिंह ने एक महत्त्वपूर्ण बात यह कही कि प्रो कुश्ती के जरिए वे देश के कोनेकोने से उभरते पहलवानों की पहचान करेंगे और उन्हें बेहतरीन ट्रेनिंग सुविधाओं में बेस्ट ट्रेनर प्रदान करेंगे.

कैंसर पीडि़तों के लिए इस तरह के आयोजन सराहनीय हैं. कुश्ती को लोकप्रिय बनाने के लिए चैंपियंस प्रो कुश्ती ने इस मैच को देखने के लिए लोगों को खुला आमंत्रण दिया था.

भले ही यह मैच कैंसर पीडि़तों के लिए खेला गया था पर जानेमाने उद्यमी जनार्दन पांडे के साथ मिल कर संग्राम सिंह ने वर्ल्ड रेसलिंग प्रोफैशनल यानी डब्लूडब्लूपी, साउथ अफ्रीका की सहभागिता में चैंपियंस प्रो कुश्ती की शुरुआत की है. इस के माध्यम से गांवों और कसबों में भारतीय रेसलिंग को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि कुश्ती की शानदार प्रतिभाएं मिलें.

यह बात सही भी है कि गांव और कसबों में बहुत से ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ी मौजूद हैं पर उन्हें सही प्लेटफौर्म नहीं मिल पाता है और आर्थिक तंगी की वजह से वे आगे नहीं बढ़ पाते हैं. संग्राम सिंह की इस पहल से न सिर्फ गांवों के प्रतिभावानों को मौका मिलेगा बल्कि देश को कई अच्छे पहलवान भी मिलेंगे.

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