8/11 की नोटबंदी से आम आदमी परेशान है. उद्योगधंधे चौपट हैं, कारोबार ठप हैं, किसान परेशान है और अब इस का असर खेलों पर भी पड़ने लगा है. पेशेवर कुश्ती लीग यानी पीडब्लूएल का दूसरा सत्र 15 दिसंबर से शुरू होने वाला था लेकिन अब यह लीग 2 जनवरी से 19 जनवरी तक चलेगी. कुश्ती से कमाई करने वाले कारोबारियों को यह एहसास हो गया है कि लोग 100-100 रुपए के लिए परेशान हैं, ऐसे में भला इस माहौल में कुश्ती से कमाई कैसे होगी.

मनोरंजन, फिल्म इंडस्ट्री और पर्यटन उद्योग पर पड़ी नोटबंदी की मार का रोना कुछ लोगों ने रोया पर खेलों पर पड़ी मार पर खामोशी न केवल दुखद है बल्कि हैरान कर देने वाली है क्योंकि प्रो कुश्ती लीग अपने पहले ही दौर में खासी सराही व पसंद की गई थी. यह साल कुश्ती के लिए उपलब्धियों भरा रहा था. इसी वर्ष रियो ओलिंपिक में महिला पहलवान साक्षी मलिक ने पदक जीत कर भारत की लाज बचाई थी.

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह सहित कुश्ती लीग से जुड़ी तमाम एजेंसियां और प्रायोजक 15दिसंबर को ले कर खासे उत्साहित थे क्योंकि इस में भाग लेने वाली टीमों में इजाफा हुआ था और आयोजनों की संख्या भी 5 से बढ़ा कर 8 कर दी गई थी लेकिन अब पिछले साल की तरह 6 टीमें ही हिस्सा लेंगी. इतना ही नहीं लीग में इस दफा कई अंतर्राष्ट्रीय पहलवानों की पहलवानी देखने के लिए कुश्ती प्रेमियों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा पर कई ऐसे कुश्तीप्रेमी भी होंगे जो टिकट खरीद कर पहलवानी को सामने से देखना चाह रहे होंगे पर अब इस नोटबंदी से उन्होंने अपना इरादा भी बदल दिया होगा.

वैसे भी लोगों में कुश्ती करने और उस से ज्यादा उत्साह कुश्ती देखने का शौक रहा है लेकिन अब तो इस की लोकप्रियता से बड़ी प्रोफैशनल मार्केट तैयार हो गई है, इसलिए  पिछले वर्ष लीग से कोई 3 करोड़ दर्शक जुड़े थे जिन की संख्या इस लीग से दोगुनी हो जाने की उम्मीद थी पर नोटबंदी के फैसले ने सारे उत्साह और तैयारियों पर वक्तीतौर पर पानी तो फेर ही दिया.

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