पिछले कुछ वर्षों में कुश्ती को देखने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है, यह सत्य है. इस को भांपते हुए धनकुबेरों ने कुश्ती के दंगल की प्रो कुश्ती लीग के नाम से दुकान खोल ली. देशी विदेशी पहलवानों का मेला शुरू हो गया. कुश्ती को धूलमिट्टी से निकाल कर मखमली कारपेट तक पहुंचा दिया. बड़ेबड़े पहलवानों की खरीद फरोख्त शुरू हो गई. पहलवानों पर पैसों की बारिश होने लगी.

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