पहली फिफ्टी, पहला शतक, पहला दोहरा शतक और फिर पहला तिहरा शतक वह भी एक ही पारी में. ऐसा कमाल कर दिखाया है कर्नाटक के 25 वर्षीय भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज करुण कलाधरन नायर ने. इसी के साथ चेन्नई के चेपक स्टेडियम में 5वें और अंतिम टैस्ट मैच में भारत ने इंगलैंड को पारी और 75 रन से करारी शिकस्त दे कर 5 टैस्ट मैचों की शृंखला 4-0 से जीत ली. करुण तिहरा शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बन गए.

भारतीय क्रिकेट में समयसमय पर कई युवा खिलाडि़यों ने कमाल किया है. करुण की इस लंबी व शानदार पारी का क्रिकेटप्रेमी कई सालों से इंतजार कर रहे थे. इस से पहले वीरेंद्र सहवाग ने यह कमाल किया था. करुण ने वैस्टइंडीज के महान बल्लेबाज सर गैरी सोबर्स और बौब सिंपसन के रिकौर्ड की भी बराबरी की जिन्होंने अपनी पहली शतकीय पारियों में तिहरे शतक बनाए थे.

काफी समय से टीम इंडिया में एक सहवाग को तलाशा जा रहा था. करुण की इस पारी से लगता है कि भारतीय टीम को नया सुलतान मिल गया है. तिहरे शतक की पारी से नायर ने कई रिकौर्ड्स ध्वस्त किए. इंगलैंड के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने जैसे ही 215 रन बनाए तो वे 5वें नंबर पर आ कर इतने रन बनाने वाले पहले भारतीय बन गए. इस से पहले भारतीय बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण का नाम था. इसी कड़ी में जब नायर ने 282 रन बनाए तो मार्च 2001 में लक्ष्मण के बनाए 281 रन का रिकौर्ड टूट गया. नायर पहली  टैस्ट सैंचुरी को डबल सैंचुरी में बदलने वाले तीसरे खिलाड़ी बने.

करुण ने जिस तरह मेहनत, लगन, समर्पण और जज्बे का परिचय दिया है उस से न सिर्फ उम्मीदें बंधती हैं बल्कि नई पीढ़ी के युवा खिलाडि़यों का उत्साह भी बढ़ता है.

भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. गांवकसबे में ऐसे कई करुण मिल जाएंगे लेकिन जरूरत है उन्हें अवसर देने व खोज करने की. ऐसी प्रतिभाओं को खोज कर यदि उन्हें सही प्रशिक्षण देने के साथसाथ उन्हें अवसर दिया जाए तो भारतीय टीम को अच्छे खिलाड़ी मिल सकते हैं. पर समस्या यही है कि खिलाडि़यों को रणजी तक पहुंचने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं, यह सिर्फ खिलाड़ी ही बता सकते हैं. कई ऐसे भी खिलाड़ी हैं जो रणजी तक भी नहीं पहुंच पाते और थकहार कर खेल को अलविदा कह देते हैं क्योंकि दौलत व शोहरत दिलाने वाले इस खेल में सब को मौका मिलना आसान नहीं है.

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