बौलीवुड के जानेमाने फिल्म निर्माता सुनील दर्शन, जिन्होंने 90 के दशक में आमिर खान को ले कर ‘राजा हिंदुस्तानी’ फिल्म बनाई थी, ने अपने बेटे शिव दर्शन को लौंच करने के लिए ‘कर ले प्यार कर ले’ फिल्म बनाई है. लेकिन उन्होंने बजाय अच्छी पटकथा और सब्जैक्ट चुनने के, घिसेपिटे मसालों वाले सब्जेक्ट को चुना. ऊपर से तुर्रा यह कि निर्देशक राजेश पांडे ने बेटे को मनमानी करने की छूट दी और बेटा फिल्म को डुबो गया. फिल्म में ऐसा कुछ नहीं है जो थोड़ाबहुत भी आकर्षित करे.

कहानी घिसीपिटी है. कबीर (शिव दर्शन) और प्रीत (हसलीन कौर) बचपन में साथसाथ पलेबढ़े हैं. बड़ा होने पर हालात उन्हें जुदा कर देते हैं. उन की फिर से मुलाकात कालेज में होती है. दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगते हैं. कालेज का एक अन्य युवक जैस (अहम शर्मा) भी प्रीत को चाहता है. वह कबीर और प्रीत के बीच आ जाता है.

कबीर और जैस के बीच मारामारी होती है जिस में जैस की मौत हो जाती है. जैस का पिता धनराज गिरजी उर्फ डीजी (रूमी) एक डौन है. वह कबीर और प्रीत के पीछे पड़ जाता है. लेकिन कबीर डीजी और उस के आदमियों को मार कर प्रीत का हाथ थाम लेता है.

निर्माता सुनील दर्शन ने फिल्म में पैसा पानी की तरह बहाया है. उस ने बेटे को स्टंट सींस की टे्रनिंग के लिए बैंकौक भी भेजा. मगर बेटा फिसड्डी ही साबित हुआ है. उस ने एक बिगड़ैल युवक की भूमिका निभाई है. हर वक्त वह मोटरसाइकिल पर स्टंट करता नजर आता है. लेकिन न तो वह एक्शन में जमा है और न ही रोमैंटिक दृश्यों में छाप छोड़ सका है.

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