शर्मिला मौन रही

"क्या ऊँचा सुनने लगी हो?"

शर्मिला को अपनी माँ से पता चल चुका था,इस घर में सात पीढ़ियों से किसी औरत पर हाथ नहीं उठाया है,इसलिए उसने शेरनी की तरह व्यवहार किया,

"इतवार को मेरा मूड ख़राब मत करो. मेरे कान बिल्क़ुल ठीक हैं,अगर ग़ुस्सा आ गया तो मिट्टी का तेल डालकर आग लगा लूँगी"

Tags:
COMMENT