लेखक- राम महेंद्र राय

एग्जाम के बाद रिजल्ट आया तो उस के साथसाथ वह भी प्रथम आया था. मौका मिला तो उस ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि तुम मुझ से प्यार करती हो. किसी कारण अब तक मुंह से कुछ नहीं कह पाई हो. मगर अब तो स्वीकार कर लो.’ अब वह अपने दिल की बात उस से छिपा न सकी. मोहब्बत का इजहार कर दिया. साथ में यह भी कह दिया, ‘जब तुम्हें नौकरी मिल जाए तो शादी का रिश्ता ले कर मेरे घर आ जाना. तब तक मैं भी कोई न कोई जौब ढूंढ़ लूंगी.’’

अमरेश उस की बात से सहमत हो गया. एक वर्ष तक उन की मुलाकात न हो सकी. कई बार फोन पर बात हुई. हर बार उस ने यही कहा, ‘मिताली, अभी नौकरी नहीं मिली है. जल्दी मिल जाएगी. तब तक तुम्हें मेरा इंतजार करना ही होगा.’

एक दिन अचानक फोन पर उस ने बताया कि उसे कोलकाता में बहुत बड़ी कंपनी में जौब मिल गई है. उसे जौब मिल गई थी. मिताली को नहीं मिली थी. उस ने कहा, ‘जब तक मुझे जौब नहीं मिलेगी, शादी नहीं करूंगी.’ अमरेश ने उस की एक नहीं सुनी, कहा, ‘तुम्हें नौकरी की जरूरत क्या है? मुझ पर भरोसा रखो. तुम मेरे घर और दिल में रानी की तरह राज करोगी.’

वह अमरेश को अथाह प्यार करती थी. उस पर भरोसा करना ही पड़ा. जौब करने का इरादा छोड़ कर उस से शादी कर ली. अमरेश के परिवार में मातापिता के अलावा एक बहन और 2 भाई थे. विवाह के बाद अमरेश उसे कोलकाता ले आया. पार्कस्ट्रीट में उस ने किराए पर छोटा सा फ्लैट ले रखा था.

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