ना, वह रोएगी नहीं. कमजोर नहीं पड़ेगी. वहां से भागना चाहती है. टूटी हुई चप्पल...हाय रे, समय का फेर.

पति कार स्टार्ट कर जा चुके थे.  मुन्ने का हिलता हाथ नजरों से ओझल हो गया. वह टूटी चप्पल वहीं फेंक नंगेपांव घर लौट आई.

मां किताब पढ़ रही थीं. भाभियां अपनेआप में मस्त. किसी का ध्यान उस की ओर नहीं. वह बिस्तर पर कटे पेड़ के समान गिर पड़ी. हृदय की पीड़ा आंखों में आंसू बन बह चली. बचपन से ले कर आज तक की घटनाएं क्रमवार याद आने लगीं...

Tags:
COMMENT