आजकल जिंदगी भी न जाने कैसी हो गई है. भागतीदौड़ती हुई, जिस में किसी को दूसरे के लिए सोचने का वक्त ही नहीं है. हर व्यक्ति केवल अपने तक सीमित रह गया है. वह भाग रहा है तो अपने लिए, रुक रहा है तो अपने लिए. एक मैं हूं कि इस भागती हुई जिंदगी में से भी कुछ लमहे सोचने के लिए निकाल लेती हूं.

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