खिड़की से आती हुई धूप बिन बुलाए मेहमान की तरह कमरे में उतरने लगी तो उम्मी को भोर होने का एहसास हुआ. उस ने एक नजर पास ही पलंग पर सोते हुए नागेश पर डाली. कैसी मीठी नींद सो रहा था. थकावट से भरी सिलवटें उस के चेहरे पर स्पष्ट थीं. इस महानगर में कितनी व्यस्त दिनचर्या है उस की. वह सोचने लगी कि पूरे दिन की भागदौड़ और आपाधापी में सुबह कब होती है और शाम कब ढलती है, पता ही नहीं चलता. नागेश के प्रति उस के मन में प्रेम का दरिया हिलोरे लेने लगा था.

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