शेयर बाजार में विदेशी बाजारों के सकारात्मक रुख के कारण बढ़त का माहौल रहा. बौंबे स्टौक एक्सचेंज यानी बीएसई का सूचकांक भले ही इस माहौल में 26 हजार अंक का मनोवैज्ञानिक आंकड़ा छूने में सफल नहीं रहा लेकिन वह दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में लगातार 3 दिन तक तेजी पर बंद हुआ और सूचकांक 760 अंक तक बढ़ निकला.

इस की वजह सरकार के विकास दर के पूर्वानुमान को घटाना बताया जा रहा है. सरकार ने मानसून के ठीक नहीं रहने की वजह से विकास दर के 7.75 फीसदी ही रहने का अनुमान जताया है जो पिछले अनुमान से भी कम है. बाजार पूर्व आर्थिक समीक्षा में इस अवधि के लिए विकास दर 8.1 से साढ़े 8 फीसदी तक रहने का अनुमान व्यक्त किया गया था. विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर रहने और निर्यात के आंकड़े का लगातार 1 साल से गिरावट में रहने का भी अर्थव्यवस्था पर दबाव है जिस के कारण विकास दर का अनुमान घटा है. नए अनुमान की घोषणा होते ही बाजार में मायूसी छा गई और सूचकांक 18 दिसंबर को लगातार 3 दिन की तेजी के बाद करीब 300 अंक टूट गया.

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