शेरवानी के बारे में 3 बातें मशहूर हैं: गरीब पहन ले रईस लगे, अनपढ़ पहन ले पढ़ालिखा लगे और बदमाश पहन ले तो शरीफ लगे. यही बातें सूट पर भी लागू होती हैं. आजादी के फौरन बाद, शायद अंगरेजों का हैंगओवर था, सूट भारतीय फैशन का अटूट हिस्सा बन गया था. लेकिन हिप्पीइज्म के दौर में जींस, टीशर्ट औैर जैकेट का ऐसा रंग छाया कि सूट आउटडेटेड हो गया और यदाकदा शादियों में, वह भी जाड़ों की शादी में, बराती ही सूट में नजर आने लगे. लेकिन अब इसे बहुराष्ट्रीय संस्कृति का आगमन कहिए या प्रभावी सीईओ का अंदाज, सूट हमेशा से ही आकर्षक लुक वाला परिधान रहा है. अब पार्टियों या दफ्तर में जो व्यक्ति सूट में नजर नहीं आता उसे एग्जीक्यूटिव या हाईर्क्लास का सदस्य नहीं समझा जाता है.

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