गन्ने का रस आमतौर पर गन्ने के सीजन में ही मिलता था. सड़कों पर ठेला गाडि़यों पर इस को बेचने का काम होता है. गन्ने का रस निकालने वाली मशीनें कई तरह की होती हैं. इन में कुछ को बिजली की मोटर से चलाया जाता है, तो कुछ को हाथ से भी चलाया जाता है. गन्ने को ठीक तरह से धोने के बाद मशीन में डाला जाता है, जिस से उस का रस निकलता है. गन्ने के रस को और स्वादिष्ठ बनाने के लिए उस में नीबू, पुदीना और काला नमक मिलाया जाता है. अब सड़कों की जगह पर जूस की बड़ीबड़ी दुकानों पर भी गन्ने का रस मिलने लगा है. जूस की बड़ी दुकानों में गन्ने को छील कर उस का जूस निकाला जाता है. अब यह साल भर मिलने लगा है. सड़कों पर जो गन्ने का रस 5 से 10 रुपए प्रति गिलास मिलता है, बड़ी जूस की दुकानों पर वह 40 रुपए प्रति गिलास बिकता है.

कई गन्ना किसान अब अपने खेत में लंबे समय तक गन्ना रखते हैं ताकि बेमौसम गन्ना बेच कर मुनाफा कमा सकें. रसदार प्रजाति के गन्ने की मांग जूस के लिए सब से ज्यादा होती है. गन्ने का जूस बेचने के लिए केवल जूस निकालने की मशीन, गन्ना और एक छोटी अच्छी जगह की जरूरत होती है. लखनऊ में ‘गन्नेवाला’ नाम से जूस की एक दुकान है, जिस में साल भर गन्ने और दूसरी किस्म के जूस मिलते हैं. दरअसल, समय के साथसाथ लोगों को गन्ने के जूस के फायदे पता चलने लगे हैं, जिस की वजह से साल भर गन्ने के जूस की मांग रहती है. केवल एक जगह पर ही नहीं, शहर के दूसरे हिस्सों में भी बेमौसम गन्ने के जूस की खपत होती है. ऐसे में गन्ने के जूस का कारोबार बढ़ने लगा है, जिस से गन्ना किसानों को ज्यादा फायदा होने की संभावना बढ़ गई है. अब गन्ने की खेती केवल चीनी, खांडसारी और गुड़ पर ही निर्भर नहीं रह गई है. गन्ने का जूस नई संभावना के रूप में देखा जा रहा है. जानकार लोगों का कहना है कि गन्ने का जूस जिस तरह से फायदेमंद होता है, उस से इस का प्रचलन दिनोंदिन बढ़ता जाएगा. यह एक अच्छे कारोबार के रूप में उभरेगा. गन्ने के रस को बेचने में दोगुना मुनाफा होता है. ऐसे में इस को बेचने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.

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