फिल्म उड़ता पंजाब को लेकर बीते महीने से सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सेंसर बोर्ड) ने काफी हल्ला मचा रखा थाकरीब 90 कट्स के साथ फिल्म को क्लियर करने की जिद पर अड़े सेंसर बोर्ड के खिलाफ फिल्म के निर्माताओं ने भी मोर्चा खोला और अदालत का दरवाजा भी खटखटाया. अदालत के दखल के बाद मामला कुछ इस तरह सुलझा कि अब पंजाब तो उड़ता नजर आ रहा है साथ ही सेंसर बोर्ड के पर भी क़तर दिए हैं जिससे वह लुढ़कता नजर आ रहा है.

यह पहली बार नहीं हुआ है जब कोर्ट से सेंसर को फटकार मिली हो. बंबई हाई कोर्ट का जिस फिल्म पर सेंसर इतनी कैंची चलने को बेताब था, उस फिल्म को सिर्फ एक कट के साथ रिलीज करने का फैसला बताता है कि सेंसर की जिद कितनी बेमानी थी. इस से पहले भी सेंसर बोर्ड की जेम्स बांड समेत कई फिल्मों में जबरन कांटछांट को लेकर फजीहत हो चुकी है.

गौरतलब है कि सेंसर बोर्ड से मतभेद के बाद विवादों में घिरी अनुराग कश्यप की फिल्म 'उड़ता पंजाब' को बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिलीज की मंजूरी दे दी है. अभिषेक चौबे के निर्देशन में बनी फिल्म और शाहिद कपूर, आलिया भट्ट, करीना कपूर और दिलजीत दोसांज स्टारर 17 जून को रिलीज होगी. सेंसर बोर्ड ने पहले फिल्म में कुल 89 कट लगाए थे और फिल्म के 73 फीसदी हिस्से को मंजूरी दी थी. लेकिन अब मामला पूरी तरह से उलट गया है. सबसे बड़ी जीत तो निर्माताओं फिल्म के टाइटल पर मिली है. कोर्ट ने फिल्म से पंजाब शब्द को हटाने की सेंसर बोर्ड की दलील खारिज कर दी है और अब फिल्म उड़ता पंजाब के नाम से ही रिलीज होगी.

कोर्ट ने कहा कि फिल्म की स्क्रिप्ट और नाम में ऐसा कुछ भी नहीं है कि देश की एकता या संप्रभुता को चोट पहुंचे. कोर्ट ने ने हर उस पॉइंट पर सेंसर को लताड़ लगाईं जिस के आधार पर वह फिल्म की रिलीज पर टांग अड़ा रही थी, मसलन न तो फिल्म ड्रग्स का गुणगान कर रही है और न ही किसी राज्य या देश के खिलाफ कोई टिप्पड़ी करती है.

बता दें की फिल्म के कई सीन्स पर सेंसर को ऐतराज था जैसे एमपी और एमएलए और चुनाव वाली सीन. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये सामान्य राजनीतिक चीजों को दिखलाते हैं. और नशा लेने वाले क्लोज अप सीन हटाने पर कोर्ट का कहना था कि ड्रग लेने के एक मात्र सीन से किसी आदेश का उल्लंघन नहीं होता है. जिस फिल्म में ड्रग्स जैसे विषय को फोकस कर युवाओं को चेताया जा रहा है उस विषय को प्रोतसाहन मिलना चाहिए. कोर्ट भी कहता है कि राज्य में जितनी आसानी से ड्रग उपलब्ध है और इसे रोकने के लिए तैनात किए गए लोग अपना काम सही से नहीं कर पा रहे वह चिंता का विषय है. फिल्म के सभी किरदार इस समस्या को बखूबी पेश करते हैं.

हालांकि फिल्म ने उस सीन को हटाने पर मुहर लगा दी है जिस सीन में टॉमी सिंह यानी शाहिद कपूर का किरदार स्टेज से भीड़ के सामने पेशाब करता नजर आता है. सिर्फ यही एक कट है जो कोर्ट ने मंजूर किया है. इसके साथ ही 3 डिस्क्लेमर लगाने का भी आदेश दिया है. इसके अलावा जमीन बंजर तो औलाद कंजर संवाद पर भी कोर्ट ने कोई कैंची चलने से इनकार करते हुए कहा कि पंजाब की जमीन कितनी उपजाऊ है, बताने की जरूरत नहीं है और इस तरह के डायलोग से राज्य की छवि बदल नहीं जायेगी.

हालांकि कोर्ट ने फिल्म में जबरन गाली डालने पर ऐतराज जताया है. कोर्ट के मुताबिक़ बोर्ड को किसी फिल्म को सेंसर करने का कोई अधिकार नहीं है. फिल्मकार को कैसी फिल्म बनानी चाहिए, यह उसे कोई नहीं बता सकता है.

जिस तरह से फिल्म के समर्थन में बौलीवुड उतरा है उसी सार्थक संकेत यह जाता है कि सेंसर बोर्ड की मनमानी हर समय नहीं चलेगी. खुद कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि दर्शकों को पता होता है कि उसे कौन सी फिल्म देखनी है. और कौन सी नहीं. उनके विवेक पर भरोसा रखें और सेंसर शब्द मीडिया का बनाया हुआ है, आपका काम फिल्मों को सर्टिफिकेट देना है. इरफ़ान भी यही बात दोहराते हुए कहते हैं की लोगों को यही नहीं पता कि यह सेंसर बोर्ड है या प्रमाणन संस्था. जब कभी कोई मुद्दा उठाया जाता है तो पूरा देश ही सेंसर बोर्ड बन जाता है. फिल्म इंडस्ट्री सरकार को 4000 करोड़ से ज्यादा की कर अदा करती है. फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी को लगता है कि फिल्म इंडस्ट्री को एक साथ मिलकर सेंसर बोर्ड के खिलाफ खड़ा होना चाहिए.

बहरहाल कोर्ट की फटकार के बाद लगता है कि सैंसर बोर्ड की मनमानी पर अंकुश लगेगा.

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