सरिता विशेष

नैनीताल

हनीमून मनाने इन दिनों कपल्स अगर सब से ज्यादा कहीं जा रहे हैं तो वह जगह उत्तराखंड में नैनीताल है. देश का इकलौता शहर जो पूरी तरह झीलों से घिरा है. इसे लेक डिस्ट्रिक्ट भी कहा जाता है. उत्तराखंड राज्य का नैनीताल किसी भी पर्यटक की पहली पसंद होता है. 12 महीने सदाबहार मौसम वाले नैनीताल पहुंचना अपेक्षाकृत आसान भी है.

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हिमालय की कुमाऊं पहाडि़यों की तलहटी की शीतलता पर्यटकों को तनावमुक्त करती है, तो झीलें और देवदार के घने वृक्ष एहसास कराते हैं कि आप किसी खास जगह पर हैं. यों तो पूरा नैनीताल ही दर्शनीय है लेकिन नाशपती के आकार की नैनी झील देख हर कोई होश खो बैठता है. इस झील के पानी में झांकने पर पहाड़ों का प्रतिबिंब देख लगता है कि पहाड़ पानी में उतर आए हैं.

नैनी झील में बोटिंग का भी लुत्फ उठाया जा सकता है. न्यू कपल्स तो यह सुनहरा मौका छोड़ते ही नहीं. इस झील का उत्तरी हिस्सा मल्लीताल और दक्षिणी भाग तल्लीताल कहलाता है. यहां बने पुल पर पोस्टऔफिस भी है.

सैलानियों की चहलपहल मुंहअंधेरे से देररात तक नैनी झील पर रहती है. झील के दोनों किनारों पर दुकानें हैं. मल्लीताल में शाम होते ही पर्यटकों की भीड़ जमा होनी शुरू हो जाती है. इस वक्त जगमगाती रोशनी में यह इलाका बेहद सुहाना और आकर्षक लगता है. नैनीताल के मुख्य बाजार मालरोड पर भी देर रात तक आवाजाही बनी रहती है.

हनीमून का लुत्फ उठाने के लिए बेहतर यह होता है कि नैनीताल से महज 11 किलोमीटर पर स्थित भवाली कसबे में भी जाया जाए. ऐतिहासिक महत्त्व वाला भवाली भी शांत और आकर्षक जगह है. चीड़ और बांस के वृक्षों से घिरे भवाली की फल मंडी भी पर्यटकों का ध्यान अपनी तरफ खींचती है. यहां सेब, आलू बुखारा और खुमानी बहुतायत से बिकते हैं.

भीड़भाड़ से बचने के लिए लोग, खासतौर से न्यू कपल्स, अब भवाली में ही ठहरना पसंद करते हैं जहां होटलों की कमी नहीं. गरमी में नैनीताल में जगह मिलनी मुश्किल हो जाती है, इसलिए इस मौसम में आने से पहले होटल में आरक्षण करा लेना बेहतर रहता है.

उत्तराखंड के इस इलाके में न्यू कपल्स शृंखलाबद्ध तरीके से हनीमून मना सकते हैं क्योंकि यहां ऐसी जगहों की भरमार है जो हिमाच्छादित पहाडि़यों, ठंडक, घने जंगलों और झीलों से भरी पड़ी हैं.

मुक्तेश्वर

नैनीताल से 46 किलोमीटर दूर कुमाऊं शृंखला की पहाडि़यों का एक और छोटा सा हिल स्टेशन है मुक्तेश्वर जो समुद्रतल से 2,286 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. 1897 में स्थापित इंडियन वेटेनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट, मुक्तेश्वर की एक अलग पहचान है जहां जानवरों पर शोध होता है. इस संस्थान की लाइब्रेरी में दुर्लभ पुस्तकें और सामग्री देखने को मिल जाती हैं.

जब पर्यटक मुक्तेश्वर में होते हैं तो वे खुद को प्रकृति के सब से ज्यादा नजदीक पाते हैं. हिमालय की पर्वत शृंखला के पीछे से उगते सूर्य को देखने का दुर्लभ अवसर भी मुक्तेश्वर देता है. यहां बड़ीबड़ी चोटियां हैं जो जब बर्फ से ढक जाती हैं तो देखते ही बनती हैं.

न्यू कपल्स के लिए मुक्तेश्वर तेजी से उभरता पसंदीदा हिल स्टेशन है जहां अपार शांति व प्राकृतिक दृश्यावली है. पूरे कुमाऊं की तरह मुक्तेश्वर भी अंगरेज शासकों की पसंद रहा क्योंकि यहां की शीतलता उन्हें काफी राहत देती थी.

कभी मुक्तेश्वर जंगली जानवरों का गढ़ हुआ करता था. जानवर यहां आज भी दिखते हैं लेकिन खतरनाक तरीके से नहीं दिखते. प्रकृतिप्रेमी और ब्रिटिश शिकारी जिम कार्बेट द्वारा रचित उपन्यास ‘मैनईटर्स औफकुमाऊं’ में मुक्तेश्वर की मुक्तकंठ से चर्चा की गई है जिस के चलते इस हिल स्टेशन को काफी लोकप्रियता मिली.

न्यू कपल्स यहां प्रकृति के अद्भुत नजारे देखने के अलावा ऐडवैंचर खेलों – रौक क्लाइबिंग और रेसलिंग का भी लुत्फ उठाते नजर आते हैं.

शीतला यहां का कोई 39 एकड़ में फैला दर्शनीय स्थल है. ओक और देवदार के सदाबहार वृक्षों से ढके शीतला से हिमालय का मनोरम दृश्य दिखता है.

मुक्तेश्वर निरीक्षण बंगला एक अन्य दर्शनीय स्थल है जहां जिम कार्बेट रहते थे. उन की केतली आज भी यहां सलामत रखी हुई है. बर्फीली पहाडि़यां, हरियाली, झूमते वृक्ष और सिर पर उड़ते बादल मुक्तेश्वर को और खुशनुमा बना देते हैं. न्यू कपल्स यहां आ कर काफी रिलैक्स महसूस करते हैं. यहां की शांति उन्हें भाती और लुभाती है. मुक्तेश्वर के नजदीक भीमताल में बोटिंग करने का भी लुत्फ उठाया जा सकता है. आमतौर पर यहां भीड़भाड़ कम रहती है.

मुक्तेश्वर की सूखी आलू की चटपटी सब्जी और प्याज के जायकेदार पकौड़े काफी मशहूर हैं. सभी पर्यटक इन्हें चाव से खाते हैं. यहां हर तरह का भोजन उपलब्ध रहता है और ठहरने के लिए ठीकठाक होटल मिल जाते हैं.

बारिश का मौसम छोड़ कर मुक्तेश्वर कभी भी जाया जा सकता है. नैनीताल हो कर आना सुविधाजनक

रहता है क्योंकि रास्तेभर के नजारे दर्शनीय होते हैं. जनवरीफरवरी में यहां भारी बर्फबारी होती है, इसलिए इन दिनों में आने पर पर्याप्त गरम कपड़े साथ लाने चाहिए. वैसे भी, इस पूरे इलाके में गरम कपड़े इफरात से बिकते हैं.

अल्मोड़ा

अल्मोड़ा नैनीताल से 67 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐसी जगह है जिसे भारत के स्विट्जरलैंड के खिताब से नवाजा गया है. जहां तक नजर जाए वहां तक इतराते बर्फ के पहाड़ और उन पर बिखरी रुई जैसी बर्फ, पहाडि़यों पर बिछी नर्ममुलायम घास, चारों तरफ झरनों का दिलकश नजारा और सोने पे सुहागा वाली बात कई पेड़ों से आती खुशबू जो पर्यटकों को खूबसूरती का एहसास कराती है. यह सब एकसाथ कहीं और नहीं मिलता.

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अल्मोड़ा की ताजी हवा में सांस लेते ही ताजगी का एहसास होता है. पहाडि़यों के ढलान पर बने लकड़ी के मकान देख लगता है कि किसी और दुनिया में तो नहीं आ गए. ब्राइट और कौर्नर से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा देखने के लिए दोनों वक्त भीड़ लगती रहती है. ऐसा लगता है सूर्य मानो सामने से ही कहीं उग और डूब रहा है.

अल्मोड़ा के मनमोहने वाले जंगलों में कितना भी घूमफिर लें, थकान नहीं होती. अल्मोड़ा में ठहरने के लिए होटलों व रिसोर्ट्स की भरमार है जो सस्ते भी हैं. सभी तरह का खानपान यहां उपलब्ध रहता है. न्यू कपल्स एक दिन बेहद शांति से यहां गुजार सकते हैं और उन का अगला पड़ाव रानीखेत हो सकता है.

रानीखेत

नैनीताल से 56 किलोमीटर दूर स्थित रानीखेत का नाम सुनने में अटपटा सा लगता है जो एक स्थानीय लोककथा से लिया गया है. रानीखेत भी कुमाऊं इलाके का खूबसूरत हिल स्टेशन है. समुद्रतल से इस की ऊंचाई 1,800 मीटर है. इस का नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम 85 किलोमीटर दूर है.

रानीखेत के बाजार के दोनों तरफ दुकानें हैं. यहां का गोल्फ कोर्स मैदान एशिया के सब से ऊंचे गोल्फ कोर्स में से एक है. यहां का वातावरण हमेशा ठंडा रहता है. रानीखेत में चारों तरफ हरी घास की चादर बिछी रहती है. पाइन के पेड़ यहां बहुतायत से पाए जाते हैं और यहां के जंगल काफी घने हैं.

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रानीखेत में कुमाऊं रेजिमैंट की एक बड़ी सैनिक छावनी भी है. अंगरेजों ने इसे सैनिक प्रशिक्षण के लिए विकसित किया था. यह शहर काफी साफसुथरा व व्यवस्थित है. कई हिंदी फिल्मों में रानीखेत के प्राकृतिक सौंदर्य को दिखाया गया है. यहां न तो दूसरे शहरों की तरह भीड़भाड़ रहती है न ही कहीं प्रदूषण दिखता है. दिखती है तो बस हिमालय की पहाडि़यां, चांदी जैसे बादल, चारों तरफ फैला चीड़ और देवदार का जंगल.

रानीखेत की प्राकृतिक शांति का गवाह यहां आने वाला हर पर्यटक होता है. कई प्राचीन इमारतें यहां देखने को मिल जाती हैं जिन का अपना ऐतिहासिक महत्त्व है. इस हिल स्टेशन पर एक दिन गुजारना भी यादगार अनुभव होता है. यहां से 13 किलोमीटर दूर स्थित है मजखली जहां से हिमालय पर्वत काफी नजदीक से देखा जा सकता है. यहां के 2 अन्य स्थल शीतलाखेत और सुरईखेत भी दर्शनीय हैं.

बारिश के मौसम को छोड़ रानीखेत सालभर कभी भी जाया जा सकता है. ठंड में गरम कपड़ों का खयाल रखना चाहिए. दिसंबर से ले कर फरवरी तक यहां बर्फबारी का आनंद लिया जा सकता है. यहां ठहरने के लिए अच्छे, सुविधाजनक व हर बजट के होटल उपलब्ध हैं.

नैनीताल कब जाएं : नैनीताल सहित रानीखेत, मुक्तेश्वर और अल्मोड़ा जुलाईअगस्त के महीने छोड़ साल में कभी भी जाया जा सकता है.

कैसे जाएं : हवाई मार्ग से पंतनगर हवाई अड्डे हो कर जाया जा सकता है. पंतनगर से नैनीताल तक सड़क की दूरी 71 किलोमीटर है.

रेलमार्ग से काठगोदाम रेलवे स्टेशन उतरना पड़ता है जो यहां से महज 35 किलोमीटर दूर है.

सड़क के रास्ते दिल्ली, आगरा, देहरादून, लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, कानपुर और बरेली से सीधे बस या टैक्सी से नैनीताल जाया जा सकता है. नैनीताल से रानीखेत, अल्मोड़ा और मुक्तेश्वर की यात्रा सड़क द्वारा तय की जा सकती है.

क्या खरीदें : कुमाऊं के गरम कपड़े देशभर में पसंद किए जाते हैं जो यहां के सभी हिल स्टेशनों पर मिलते हैं. इस के अलावा यहां की आकर्षक मोमबत्तियां भी खरीदी जा सकती हैं. सभी पर्यटन स्थलों पर चीड़ की लकड़ी से बने आइटम्स भी मिलते हैं.

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