चांदनी रात में दूरदूर तक पहाडि़यों और ऐतिहासिक महत्त्व की इमारतों को देखने का आनंद अगर कहीं देखने में आता है तो वह जगह मांडू है. प्रकृतिप्रेमियों को मांडू हमेशा से ही आमंत्रित करता रहा है. अद्भुत शांति के लिए मशहूर मांडू में आ कर लगता है कि शहरों की व्यस्त भागादौड़ी और आपाधापीभरी जिंदगी के मुकाबले एक ऐतिहासिक प्रेमकहानी को गुंजाते इस स्थल की बात ही निराली है.

एक रोचक किस्सा

रूपमती अपने नाम के मुताबिक असाधारण रूप से सुंदर थी. वह एक किसान की बेटी थी. मुगल शासक बाज बहादुर उस के सौंदर्य पर ही नहीं मरमिटा था, बल्कि रूपमती गाती भी बहुत अच्छा थी. धर्म की परवा न करते उस ने रूपमती से शादी की थी. रूपमती के सौंदर्य और गायन के चर्चे जब अकबर तक पहुंचे तो उस ने बाज बहादुर को संदेश पहुंचाया कि रूपमती को उस के पास दिल्ली भिजवा दिया जाए. इस पर पतिधर्म निभाते बाज बहादुर ने जवाब यह दिया कि वे अपनी रानी को मांडू भिजवा दें. इस बात पर तिलमिलाए अकबर ने मांडू पर हमला कर दिया और बाज बहादुर को बंदी बना लिया. वह रूपमती तक पहुंच पाता, इस के पहले ही रूपमती ने हीरा खा कर अपनी जान दे दी थी. इस प्यार और त्याग को अकबर ने समझा तो वह बहुत पछताया और बाज बहादुर को आजाद कर दिया. पर बाज बहादुर रूपमती को इतना चाहता था कि उस ने रूपमती की कब्र पर सिर फोड़फोड़ कर जान दे दी थी. कहा यह भी जाता है कि अकबर का सेनापति आदम खां भी रूपमती पर जान देता था.

मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित मांडू तक पहुंचना थोड़ा तकलीफदेह काम है. हालांकि यह तकलीफ मांडू में दाखिल होने के साथ ही खत्म हो जाती है जब यहां की हरियाली और रमणीयता से पर्यटक रूबरू होते हैं. मांडू की हर इमारत की एक दास्तान है, उस का शिल्प है, इतिहास है और अंजान चुंबकीय खिंचाव है जो बरबस ही पर्यटकों को एहसास कराता है कि वे अगर यहां न आते तो एक यादगार अनुभव से वंचित रह जाते. आदिवासी बाहुल्य जिले धार के इस कसबे की आबोहवा भी पर्यटकों को ताजगी व स्फूर्ति से भर देती है.

जब पर्यटक यहां घूमना शुरू करते हैं तो औसतन हर आधा किलोमीटर पर इमारत में चस्पां एक कहानी उन का इंतजार कर रही होती है. नर्मदा किनारे बसे इस पर्यटन स्थल का सब से बड़ा आकर्षण बाज बहादुर शाह का महल है जिस का निर्माण 15वीं ईसवी में एक मुगल शासक नासिर शाह ने करवाया था. लाल पत्थरों से निर्मित इस महल का भीतरी उत्तरी भाग संगमरमर से बना है. ऐसे ही एक संगमरमरी झरोखे से बाज बहादुर जंगलों को देखता था. मांडू के वैभव का एक दूसरा उदाहरण रूपमती महल है. नासिर शाह द्वारा ही बनवाए इस महल की छत से हरियाली और धुंध का दृश्य पर्यटकों का मन मोह लेता है. ऐसा कहा जाता है कि रानी रूपमती प्रतिदिन इस महल की छत से नर्मदा नदी का दर्शन कर के ही अन्नजल ग्रहण करती थी. बाज बहादुर और रूपमती के प्रेम का साक्षी यह महल 3 मंजिला है और संकरा है जिस की छत तक पहुंचने के लिए झुक कर चढ़ना पड़ता है. बारिश के दिनों में जब नर्मदा नदी उफान पर होती है तब यहां का दृश्य काफी मनोरम हो जाता है. चारों तरफ से धुआं सा उठता दिखता है.

मांडू के महल और इमारत देखने के लिए एक दिन काफी नहीं, हालांकि अधिकांश पर्यटक दिनभर में मांडू घूम लेते हैं क्योंकि वे इंदौर में ठहरते हैं. पर रात में मांडू देखने का लुत्फ कुछ और है, खास कर चांदनी रात में. हिंडोला महल, होशंगशाह का मकबरा, अशरफी महल, जहाज महल, रेवा कुंड, तवेली महल और दाई का महल जैसी दर्जनों इमारतें मांडू की शान बढ़ाती हैं. मांडू छोटा सा कसबा है जिस में रात 8 बजे के बाद चहलपहल खत्म सी हो जाती है. इसलिए घूमने के लिए सुबह जल्द उठ कर जाना बेहतर होता है. किराए की साइकिल से मांडू घूमना किफायत का काम है. यहां स्थानीय वाहन कम ही मिलते हैं और दूरदराज की इमारतों तक जाने से चालक कतराते हैं.

एक मुसलिम शासक बाज बहादुर और हिंदू रानी रूपमती की प्रणय गाथा को उकेरता मांडू वाकई रोमांटिक स्थल भी है जिस पर फिल्म भी बन चुकी है. भ्रमण के दौरान आदिवासी जीवन की सरलता और सहजता भी समझ आती है. आदिवासियों द्वारा निर्मित कई छोटी वस्तुएं यहां मिलती हैं. महेश्वर की मशहूर साडि़यां भी यहीं मिलती हैं.

रुकें ओंकारेश्वर में

इंदौर से मांडू आते वक्त रास्ते में ओंकारेश्वर रुक कर जरूर घूमना चाहिए जहां नर्मदा नदी पूरे वेग से बहती है. ओंकारेश्वर की प्राकृतिक छटा भी दर्शनीय है. कईर् फिल्मों की शूटिंग यहां हो चुकी है और अभी भी अकसर होती रहती है. मांडू से जब पर्यटक वापस लौटते हैं तो उन के साथ अटूट स्मृतियां होती हैं, जेहन में यहां की हरियाली, अद्भुत शांति, झूमते पेड़ और शानदार भव्य इमारतें होती हैं. इंदौर से मांडू सड़क के रास्ते आना उपयुक्त रहता है. अब पर्यटक वर्षा ऋतु में भी यहां आने लगे हैं क्योंकि उस वक्त यहां की खूबसूरती और लहलहाते जंगल की खूबसूरती शबाब पर होती है. बारिश में ओंकारेश्वर का नजारा निराला होता है.