वाणिज्यिक दृष्टि से देश का अहम राज्य महाराष्ट्र देशीविदेशी घुमंतुओं को आकर्षित करने में भी खास है. इस राज्य में दर्शनीय स्थलों की कमी नहीं है. मायानगरी के नाम से मशहूर मुंबई की चमक और यहां के समुद्री किनारे इस प्रदेश की शान हैं.

महाराष्ट्र अपने विविध पहाड़ों, मनोरम समुद्र तटों और कई प्रकार के संग्रहालयों के अलावा स्मारकों और किलों के लिए भी जाना जाता है. इस की राजधानी मुंबई है जो देश की आर्थिक राजधानी के रूप में जानी जाती है.

मुंबई

आलीशान होटलों,  बहुमंजिला इमारतों, झुग्गीझोपडि़यों और बस्तियों से भरी महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की भीड़ दूसरे हर शहर की भीड़ से अलग है. इस भीड़ में हर व्यक्ति अकेला और स्वतंत्र दिखाई देता है. यहां साथसाथ चलने वाले लोग अगले ही पल बेहिचक अकेले हो जाने की आसान तैयारी में मिलते हैं. यहां साथ रहने का अर्थ है दूसरे को पूरी आजादी देना. कहा जाता है कि जो आदमी मुंबई में रह कर भी पारंपरिक जीवन जीना चाहता है उसे मुंबई पीछे ही नहीं छोड़ देती बल्कि अपने तेज मिजाज से दूर भगा देती है.

‘26/11’ के होटल ताज पर आतंकी हमलों के बाद मुंबई कुछ अधिक चुस्तदुरुस्त दिखाई देने लगी है.

दर्शनीय स्थल

कोलाबा इलाके में समुद्रतट से जुड़ा यह स्थल मुंबई के बहुत ही खूबसूरत हिस्से के रूप में मशहूर है. 1911 में ब्रिटिश राजा के शाही आगमन के स्मारक द्वार के रूप में सागरतट पर बनाया गया भव्य गेटवे औफ इंडिया कलात्मक है. यह 1924 में बन कर तैयार हुआ था. यहां के खुले माहौल में दुनियाभर के सैलानी टहलते और सुस्ताते हैं. दिनभर यहां से छोटीबड़ी और दोमंजिला नौकाएं लोगों के काफिले को ले कर ऐलीफैंटा और मांडवा टापुओं तक आतीजाती हैं. अपनी शानोशौकत के लिए प्रसिद्ध ताजमहल पैलेस होटल गेटवे के सामने ही मौजूद है.

मुंबई में घूमने के लिए  एक काला घोड़ा क्षेत्र है जहां कलासंग्रह, चित्रदीर्घाएं और प्रतिमाएं हैं. इस के अलावा यहां मरीन ड्राइव, चौपाटी और मालबार हिल्स हैं जो सागरतट से जुड़े हैं. सूर्यास्त और उस के बाद जगमगाने वाली रोशनियों को देखने के लिए ये अच्छे स्थान हैं. प्रेमी जोड़ों के लिए ये जगहें काफी सुकून भरी हैं. नरीमन रोड पर सैंट थौमस चर्च भव्य और कलात्मक है. महात्मा गांधी से संबंधित मणि भवन संग्रहालय, डा. भाऊ दाजी लाड म्यूजियम, पिं्रस औफ वेल्स संग्रहालय और जहांगीर आर्ट गैलरी औफ मौडर्न आर्ट देखने लायक हैं. इन के अलावा जीजामाता उद्यान व नरीमन पौइंट, गोरेगांव, चौपाटी और जुहू बीच पर्यटकों को खूब लुभाते हैं.

गेटवे औफ इंडिया से नौकाओं द्वारा ऐलीफैंटा और मांडवा टापुओं पर जा कर वहां से शाम को लौटा जा सकता है. वरली के नेहरू प्लैनेटोरियम में जा कर अंतरिक्ष जगत को निकट से देखना बेहद रोमांचक और अनोखा अनुभव है. गोरेगांव में फिल्मसिटी यानी बौलीवुड में जा कर फिल्मी दुनिया को परदे के पीछे से भी देखा जा सकता है.

यों तो मुंबई में हर तरह के भोजन मिलते हैं. पर महाराष्ट्रियन, गुजराती थाली के अलावा वड़ा पाव, मकई की पैटीज, आइसक्रीम खास है.

लंबी छुट्टी पर निकले हों तो मुंबई से औरंगाबाद के रास्ते एलोरा और अजंता की सुंदर व अनोखी गुफाएं भी देखने लायक हैं.

कैसे जाएं और कहां ठहरें: मुंबई देश के मुख्य स्थानों से वायुमार्ग, रेलमार्ग और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. साथ ही हर शहर में मुंबई जाने और रहने के लिए रिजर्वेशन की सुविधा मौजूद है. जनवरी का महीना मुंबई में जाने का सब से अच्छा समय माना जाता है. यहां महंगे व सस्ते हर तरह के होटल मौजूद हैं. अधिकांश बजट होटल और गैस्टहाउस कोलाबा में गेटवे औफ इंडिया के निकटवर्ती इलाकों में हैं.

माथेरान

मुंबई से केवल 110 किलोमीटर की दूरी पर प्राकृतिक खूबसूरती से भरा यह छोटा सा हिल स्टेशन माथेरान गरमियों में घूमने के लिए सब से उत्तम स्थान है. यह समुद्रतल से लगभग 800 मीटर की ऊंचाई पर है. यहां वाहन वर्जित हैं इसीलिए मुंबई की भीड़भाड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए माथेरान उपयुक्त स्थान है.

माथेरान का सब से नजदीकी रेलवे स्टेशन है नरेल. मुंबई से माथेरान जाने के लिए सुबह का समय अच्छा रहता है. दादर स्टेशन से करजत जाने वाली लोकल ट्रेन पकड़ कर 2 घंटे में नरेल स्टेशन पहुंचा जा सकता है. स्टेशन से बाहर निकलने पर टौय ट्रेन सब से मुख्य आकर्षण है. नरेल में छोटी लाइन है जो माथेरान तक जाती है. पहाड़ों पर चढ़तीउतरती इस टौय टे्रन में बैठ कर ढाई घंटे की यात्रा में खूबसूरत प्राकृतिक नजारों का आनंद उठाया जा सकता है. ट्रौली से भी यहां तक पहुंचा जा सकता है. अगर आप को जल्दी मंजिल तक पहुंचने की चाहत है तो आप टैक्सी स्टैंड से टैक्सी भी पकड़ सकते हैं. रास्ता काफी घुमावदार है.

छोटे से शहर में पूरे साल पर्यटकों का तांता लगा रहता है. घाटियों में फैला कोहरा, हवा में तैरते बादल, भीगाभीगा मौसम एक अलग ही समां पैदा करता है. अक्तूबर से मई का समय सब से अच्छा मौसम होता है.

यहां निजी वाहन ले जाने की अनुमति नहीं है. चाहें तो दस्तूरी नाका तक गाड़ी ला सकते हैं. आगे जाने के लिए सिर्फ 3 तरीके है : पैदल, घोड़े या फिर हाथरिकशा. माथेरान में प्रवेश के लिए प्रवेश शुल्क है फिर चाहे वह रेलवे स्टेशन से हो या दस्तूरी नाका से, इस मामूली प्रवेश शुल्क के बाद ही आप शहर में प्रवेश कर सकते हैं. माथेरान में होटलों की भरमार है. अगर आप पीक सीजन में जा रहे हैं तो होटल बुकिंग पहले करवा लेना बेहतर है.

प्रकृतिप्रेमियों के लिए माथेरान किसी तोहफे से कम नहीं. चारों तरफ हरियाली है. यहां पपीहा, मैना, किंगफिशर और मुनिया जैसे पंछी हैं. बंदर भी यहां खूब हैं.

माथेरान का एक अन्य आकर्षण है वैली क्रौसिंग, जिस में रस्सियों की मदद से 2 पहाडि़यों के बीच की खाई को  पार किया जाता है. पर्यटकों को यह खूब भाता है.

महाबलेश्वर

मुंबई से 64 किलोमीटर दक्षिणपूर्व में और सतारा नगर के पश्चिमोत्तर में स्थित महाबलेश्वर एक खूबसूरत सैरगाह है.

यहां की हरियाली इस पर्यटन स्थल की खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देती है. यहां जाने का अच्छा समय अक्तूबर से जून है. मध्य जून से सितंबर तक भारी वर्षा की वजह से यह हिल स्टेशन बंद रहता है. यह स्थान वायुमार्ग, रेलमार्ग और सड़कमार्ग से जुड़ा है. निकटतम हवाई अड्डे और रेलवे स्टेशन से यह 24 किलोमीटर की दूरी पर है. अधिकतर पर्यटक यहां बस द्वारा ही जाना पसंद करते हैं. मुंबई से सड़क द्वारा करीब 6 घंटे में महाबलेश्वर पहुंचा जा सकता है.

महाराष्ट्र पर्यटन विभाग द्वारा महाबलेश्वर एवं पंचगनी में आवास की अच्छी व्यवस्था है. जाने से पहले ठहरने की बुकिंग पहले कर लेना बेहतर है.

यहां करीब 30 से अधिक पौइंट हैं. सनसेट पौइंट, सनराइज पौइंट, विल्सन पौइंट और लौडविक पौइंट इन में प्रमुख हैं. इस के अलावा माउंट मैकम, कैथलिक चर्च, प्रतापगढ़ किला आदि भी देखने योग्य चीजें हैं. यहां अधिकतर नवविवाहित जोड़े हनीमून के लिए आते हैं. यह स्थान स्ट्राबेरी और मलबेरी के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है.

वेन्ना झील महाबलेश्वर का प्रमुख आकर्षण है. ?ाल के चारों तरफ घने पेड़ हैं. पर्यटकों को यहां झील में नाव की सवारी अच्छी लगती है.

महाबलेश्वर के सभी दर्शनीय स्थलों को घूमने के लिए आप प्राइवेट बसों या निजी वाहनों का सहारा ले सकते हैं.

यहां एक और खूबसूरत सैरगाह पंचगनी है. यहां के स्कूल पूरे देश में प्रसिद्ध हैं. महाबलेश्वर का तापमान ठंडा है इसलिए वहां जाते वक्त ऊनी कपड़े ले जाना कभी न भूलें. इसे स्वास्थ्यवर्धक पर्यटन स्थल के नाम से भी जाना जाता है.

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