सरिता विशेष

दुनिया बहुत तेजी के साथ टेक्नोलोजी की आदी होती जा रही है और इसी वजह से दुनिया भर में तमाम क्षेत्रों में बड़ी बड़ी कंपनिया तथा व्यवसाय को बढ़ावा मिल रहा है. जहां एक तरफ लोग तकनीक का इस्तेमाल कर अपने जीवन को आसान करते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर यही तकनीकी इस दुनिया के लिये घातक भी साबित होती जा रही है.

एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के 2100 शहर तयशुदा प्रदूषण स्तर से पार हैं, हाल ही में हुए एक सर्वें में सामने आया की भारत का कानपुर शहर दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर है. प्रदूषण को कम करने के लिए इस दिशा में हर स्तर पर काम चल रहा है. टेक्नोलोजी की मदद से प्रदूषण को दूर करने नए-नए उपकरण मार्केट में आ रहे हैं. ऐसी ही एक टेक्नोलोजी स्मार्ट प्यूरीफायर के रूप में सामने आई है जो घर और औफिस की हवा को स्वच्छ करती है.

स्मार्ट प्यूरिफायर कैसे करता है काम

– नेचुरल एयर प्यूरीफायर घरों के अंदर की हवा को पौधों की मदद से साफ रखते हैं. स्मार्ट प्यूरिफायर्स पर 2016 से काम शुरू हुआ था. अब ये इको-फ्रेंडली तरीके से भी हवा को साफ रखते हैं.

– इनके सेंसर्स बिल्डिंग की हवा साफ रखने के लिए पौधे की जड़ों का उपयोग करते हैं. इनका वाई-फाई मौड्यूल इनके मालिक को तापमान, नमी सहित तमाम अपडेट्स भेजता रहता है.

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– स्मार्ट प्यूरीफायर ‘NATEDE’ में कभी फिल्टर बदलना नहीं पड़ता है. यह हवा में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और फाइन पार्टिकल्स का 99 फीसद तक सफाया कर देता है. इसे दूसरी स्मार्ट डिवाइसेस से जोड़ा भी जा सकता है और एक ऐप के जरिए ये मालिक तक सारी जानकारी पहुंचा सकता है.

स्मार्ट बिल्डिंग्स में लगाए सेंसर्स

– स्मार्ट बिल्डिंग्स में ब्रेकडाउन कम होते हैं, अगर होते भी हैं तो दिक्कत आसानी से और जल्दी पकड़ में आती है.

– ये सेंसर्स से पता लगा लेती हैं कि हीटिंग और कूलिंग कहां कम और कहां ज्यादा है. इनमें जगह का सदुपयोग होता है और पूरी स्पेस काम में आती है.

– इन बिल्डिंग्स से वेस्ट कम निकलता है और बेवजह चालू रहने वाली हीटिंग और एयरकंडिशनिंग बंद हो जाती है.

रीसाइकल से रीयूजेबल तक

– इलेक्ट्रौनिक रीसाइक्लर्स इंटरनेशनल ने ‘स्टेपलर्स’ और ‘बेस्ट बाय’ जैसे रिटेलर्स से हाथ मिलाया और ये पुरानी इलेक्ट्रौनिक चीजों की रीसाइक्लिंग कर रहे हैं.

– ये ई-कचरे को छांटते-तोड़ते हैं, सुनिश्चित करते हैं कि जहरीले केमिकल प्रकृति से ना मिल पाएं.

– राउटर्स से डीवीडी में लगाई जाने वाली बैटरियां भी रीसाइकल करते हैं. इससे कंपनियां प्रोत्साहित हो रही हैं और रीयूजेबल सामान का उपयोग बढ़ा रही हैं.