सरिता विशेष

आज पूरी दुनिया भर में आधुनिकता का बोलबाला है और टेक्नोलोजी के इस दौर में आए दिन नये नये आविष्कार होते ही रहते हैं जिनमें से कुछ लोगों के लिये फायदमंद तथा कुछ लोगों के लिये नुकसानदेय भी होता है. इसी बीच गूगल जल्द ही एक ऐसी तकनीक पेश करने की तैयारी कर रहा है जिसके जरिए यह पता चल सकेगा कि बीमार इंसान के जिंदा रहने की कितनी संभावना है. इस तकनीक को लेकर गूगल ने रिसर्च भी की है. इस तकनीक के आ जाने के बाद डौक्टर तथा मरीज के परिजनों को इस बात का पता चल सकेगा की बीमार व्यक्ति आखिर कब तक जिंदा रहने वाला है. इस तकनीक का इस्तेमाल वैज्ञानिक अपने प्रयोगों के लिये भी कर सकते हैं.

क्या है रिसर्च में

यह रिसर्च जिस महिला के उपर की गई वह महिला पहले से ही स्तन कैंसर से पीड़ित थी. इस दौरान डौक्टर्स की टीम ने महिला का रेडियोलौजी स्कैन किया जिसमें उसके मरने का जोखिम 9.3 फीसद था. जबकि गूगल ऐप से पूछने पर यह संख्या 19.9 फीसद थी. इस रिसर्च के कुछ दिन बाद ही महिला की मौत हो गई. स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर निगम शाह के मुताबिक, फिलहाल यह तकनीक अनुमानित जानकारी देती है. लेकिन जल्द ही इससे सटीक संख्या का पता लगाया जा सकेगा. इस तकनीक पर अभी काम किया जा रहा है.

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आपको बता दें कि इस तकनीक पर आर्टिफशल इंटेलिजेंस के चीफ जेफ डीन की कंपनी मेडिकल ब्रेन काम कर रही है. यह तकनीक बीमार व्यक्ति की बीमारी की जांच कर निष्कर्ष बताएगी. रिसर्च में गूगल की तरफ से महिला के बचने की संभावना को लेकर दिए गए आंकड़ों से विशेषज्ञ हैरान रह गए. विशेषज्ञों ने कहा कि जिन आंकड़ों और रिपोर्ट तक वो नहीं पहुंच पाए वहां तक गूगल पहुंचा और इससे संबंधित रिपोर्ट भी गूगल ने दी.

स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में असोसिएट प्रोफेसर निगम शाह और गूगल के रीसर्च पेपर के सह-लेखक ने कहा, “आज के अनुमानित मौडल में लगने वाला 80 फीसद टाइम डाटा को प्रेजेंटेबल बनाने में चला जाता है, लेकिन गूगल की यह नई अप्रोच इससे बचाती है।”