स्मार्टफोन्स के फीचर्स को लेकर कई भ्रम है जो आज भी यूजर्स के दिमाग में बैठे हुए है. अफवाहों और कंपनियों की मार्केंटिंग नीति के चलते कई गलत जानकारियां यूजर्स के पास पहुंचती है, जिन्हें यूजर्स अक्सर सही मान लेते हैं. ऐसे में हम आपको तीन ऐसी बातों के बारे में बताएंगे जिनके बारे में आपको अबतक गलत जानकारी मिलती आई है.

ज्यादा मेगापिक्सल मतलब बेहतर इमेज क्वालिटी

स्मार्टफोन को लेकर सबसे बड़ा भ्रम ये है कि ज्यादा मेगापिक्सल मतलब बेहतर इमेज क्वालिटी होता है, जबकि सच्चाई कुछ और ही है. दरअसल मेगापिक्सल ओवरऔल रेजोल्यूशन्स और कैमरे की जूम की क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इससे आपके फोन की इमेज क्वालिटी सबसे बेहतर हो जाएगी. इमेज क्वालिटी न सिर्फ मेगापिक्सल पर बल्कि सेंसर की साइज, अपर्चर, लेंस की औप्टिक्स क्वालिटी और सबसे बड़ा स्मार्टफोन कैमरे के एल्गोरिथ्म पर निर्भर करती है.

उदाहरण के लिए सैमसंग गैलेक्सी S9 का रियर कैमरा 12 मेगापिक्सल का है, वहीं सैमसंग गैलेक्सी A8 Plus का कैमरा 16 मेगापिक्सल का है, लेकिन गैलेक्सी S9 की इमेज क्वालिटी A8 Plus के मुकाबले कहीं ज्यादा अच्छी है.

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इमेज को bokeh इफेक्ट देता है ड्यूल कैमरा

ऐप्पल ने अपने आईफोन 7 Plus में Portrait mode फीचर को शामिल करते हुए बताया था कि फोन का सेकेंडरी लेंस डीएसएलआर जैसा ब्लर (blur) इफेक्ट देगा. इसके बाद से दूसरी स्मार्टफोन कंपनियों ने ड्यूल कैमरा फीचर को अपने फोन में शामिल करना शुरू कर दिया और इस तरह से कंपनियों की मार्केटिंग के चलते bokeh इफेक्ट का भ्रम यूजर्स के बीच फैल गया. इसका सबसे बड़ा उदाहरण गूगल पिक्सल 2 स्मार्टफोन है.

एआई तकनीक से बेहतर इमेज क्वालिटी आती है

स्मार्टफोन्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर कोई नया नहीं है. ऐसे में सवाल है कि क्या एआई इंजन के इस्तेमाल से बेहतर इमेज क्वालिटी आती है, तो इसका जवाब है नहीं. ऐसा जरूरी नहीं है कि इस फीचर की मदद से हमेशा बेहतर इमेज क्वालिटी मिले. यह इस बात पर निर्भर करता है कि फोन को बनाने वाली कंपनी ने फोन में किस तरह से मशीन लर्निंग और एआई तकनीक को डिजाइन किया है.