आज इंटरनेट की पहुंच हर जगह है. आज लगभग हर काम के लिए इसकी आवश्यकता पड़ती है. विश्वविद्यालयों में रिसर्चर्स और स्कालर्स भी बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल करते हैं. लोगों के स्मार्टफोन्स में उनके घरों, कार्यालयों और कैफे जैसे सार्वजनिक स्थानों पर वाई-फाई की सुविधा मिलती है. आजकल वाई-फाई राउटर्स की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अगर आपने अपने वाई-फाई कनेक्शन में सिक्योरिटी की सेटिंग अच्छे से नहीं की है तो आपके वाई-फाई कनेक्शन में कोई और आसानी से सेंध लगा सकता है. यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि अगर कोई बिना आपसे पूछे आपके वाई-फाई कनेक्शन तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है तो आप कैसे उसका पता लगाएंगे. उसके लिए इन स्टेप्स को फौलो करें…

इंटरनेट कनेक्शन का धीमा होना

अगर आपका वाई-फाई कनेक्शन धीमा चल रहा है या आपके इंटरनेट की स्पीड पिछले कुछ दिनों से कम हो गई है तो इस बात की संभावना है कि कोई दूसरा भी आपके इंटनेट कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहा है. हालांकि इंटरनेट कनेक्शन सर्वर और नेटवर्क इशू के कारण भी धीमा हो सकता है.

कनेक्टेड डिवाइसेज की लिस्ट खोजना

जितनी भी डिवाइस आपके प्राइवेट नेटवर्क कनेक्शन से जु़ड़ी हैं, उन्हें राउटर सेटिंग की मदद से कनेक्टेड डिवाइसेज की लिस्ट में ‘(माय कंप्यूटर’ जैसे किसी रैंडम नाम) से यूनिक आईपी और MAC अड्रेस को देखा जा सकता है. इसलिए अगर आप अपने नेटवर्क पर अनजाने नाम देखते हैं तो इस बात की संभावना है कि वो आपके इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हों. अगर आप ऐसा कोई नाम नहीं पाते हैं तब भी आप सभी कनेक्टेड डिवाइसेज की संख्या देखकर अनजान कनेक्शन को ढूंढ़ सकते हैं…

यहां हम आपको वाई-फाई नेटवर्क को सुरक्षित करने के लिए कुछ तरीके बता रहे हैं-

मजबूत WPA2 पासवर्ड सेट करके

WPA2 एक प्रकार का इन्क्रिप्शन प्रोटोकौल होता है. इसका पूरा नाम ‘वाई-फाई प्रोटेक्टेड ऐक्सेस’ होता है. यह WPA2 नया होने के साथ पुराने WPA और WEP जैसे पुराने प्रोटोकौल्स से अधिक सुरक्षित भी है. अपने वाई-फाई राउटर पर WPA2 सिक्योरिटी सेट करके कोई मजबूत पासवर्ड सेट करें. इसके लिए ऐसा लम्बा और कौम्प्लेक्स पासवर्ड सेट करें, जिसे आप याद रख सकें और जिसका अनुमान दूसरे लोग न लगा सकें.

राउटर की लौगइन इन्फर्मेशन को बदलकर

ज्यादातर वाई-फाई राउटर में 192.168.1.1 या 192.168.2.1 दो आईपी अड्रेस होते हैं. इन्हें किसी भी ब्राउज़र से ऐक्सिस किया जा सकता है. अधिकतर राउटर निर्माता ‘root’ और ‘admin’ जैसे शब्दों को लौग-इन और पासवर्ड के लिए इस्तेमाल करते हैं. इन पर एक बार लौग्ड-इन करते ही आप राउटर की सेटिंग तक पहुंच जाते हैं. इसका पासवर्ड इतना आसान है कि कोई भी लौग-इन करके आसानी से राउटर सेटिंग में जा सकता है. इससे बचने के लिए अपने राउटर के लौग-इन इन्फर्मेशन से ‘admin’ को बदल दें.

राउटर की SSID को हाइड कर दें

नेटवर्क को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन तरीका यह भी है कि राउटर की SSID को हाइड कर दें. इससे यह केवल कनेक्टेबल नेटवर्क को नहीं दिखाएगा. इसमें आपको अड्रेस को मैन्युअली एंटर करना होगा.

इंटरनेट मॉनीटरिंग साफ्टवेयर का इस्तेमाल करके

AirSnare जैसे कुछ ऐसे साफ्टवेयर हैं, जिन्हें आप इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर कोई अनजान डिवाइस आपके नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश करता है तो ये आपको अलर्ट करने लगते हैं.