सरिता विशेष

हममें से अधिकांश लोग महंगे इयरफोन खरीदने से बचते हैं और ज्यादातर लोग तो सड़क के किनारों पर लगी दुकानों से ही सस्ते हेडफोन या इयरफोन खरीद लेते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि आखिर क्यों ब्रांडेड इयरफोन पर 400-500 या इससे ज्यादा रुपए खर्च किया जाए जबकि सड़क किनारे यह सिर्फ 50 या 100 रुपए में ही आसानी से मिल रहा है. सस्ते इयरफोन की साउंड क्वालिटी भी इतनी खराब नहीं है. लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आप भी इस तरह के इयरफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो यह सौदा आपको काफी महंगा पड़ सकता है. जी हां, अगर आप बहरेपन का शिकार नहीं होना चाहते तो अपनी यह आदत जल्द हा बदलें. चलिये आज हम आपको बताते हैं कि सस्ते इयरफोन से आखिर क्या परेशानी हो सकती है और आप कैसे अपने सुनने की क्षमता को इसके इस्तेमाल से खो सकते हैं.

स्ट्रीट साइड इयरफोन में आमतौर पर बहुत अधिक डिस्टार्शन होता है. यानी सीधी भाषा में कहें, तो आप जो आवाज सुनना चाहते हैं, वह साफ नहीं सुनाई देती है. इसके लिए आप गाने का वौल्यूम तेज कर देते हैं, ताकि आपको आवाज साफ सुनाई दे और इसका नतीजा आपके सुनने की क्षमता पर पड़ता है. तेज आवाज से आपके कान के पर्दे स्थायी रूप से खराब हो सकते हैं. आवाज सुनने की अधिकतम सीमा 85 डेसिबल है. लिहाजा, जब आप इससे तेज आवाज में लंबे समय तक गाना सुनते हैं, तो आपके कानों पर इसका असर पड़ता है और आपके सुनने की क्षमता में धीरे धीरे कमी आ जाती है.

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एमपी3 प्लेयर के साथ सड़क के किनारे मिलने वाले औसत दर्जे के इयरफोन की आवाज 115 डेसिबल तक जा सकती है. रोजाना 15 मिनट तक इतनी तेज आवाज में गाने सुनने से कान में स्थाई रूप से क्षति हो सकती है.

सस्ते इयरफोन बनाने वाले इसके उत्पादन में अधिक समय और मेहनत नहीं करते हैं. इनकी फिटिंग भी खराब होती है. लिहाजा आवाज को साफ सुनने के लिए आपको आवाज तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो लंबे समय में आपके सुनने की क्षमता को बुरी तरह से प्रभावित करती है. ऐसे में आपको सस्ते इयरफोन को छोड़कर अच्छे क्वालिटी के इयरफोन को अपनाना चाहिये ताकि आप अपने कानों को इस समस्या से बचा सकें.

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