कार में जैट प्लेन का मजा

हम अभी सिर्फ 160 किलोमीटर रफ्तार की ट्रेन को चलाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हुए हैं जबकि दुनिया में 1,600 किलोमीटर रफ्तार की कार चलाने का मसौदा तैयार हो गया है. ब्रिटेन में एक ऐसी कार बनाने पर काम चल रहा है जिस की रफ्तार प्रति घंटा 1 हजार मील से ज्यादा होगी. ब्रिटिश ब्लडहाउंड के इस प्रोजैक्ट को विमान इंजन बनाने वाली कंपनी रौल्स रौयस प्रायोजित कर रही है. रौल्स रौयस इस के लिए वित्तीय और तकनीकी, दोनों तरह की मदद मुहैया कराएगी. इस सुपर कार में ईजे 200 जैट इंजन लगाया जाएगा जिस का इस्तेमाल अकसर लड़ाकू विमान यूरोफाइटर टाइफून में होता है. ब्लडहाउंड का कहना है कि पहले जैट इंजन का इस्तेमाल कर कार की रफ्तार को लगभग 350 मील प्रति घंटा किया जाएगा. उस के बाद उस की रौकेट मोटर को शुरू कर दिया जाएगा जिस से कार को सुपरसोनिक रफ्तार मिलेगी. इस प्रोजेक्ट का मकसद अगले साल जमीनी रफ्तार के मौजूदा रिकौर्ड 763 मील प्रति घंटा को तोड़ना है. इस के बाद 2015 में इस की स्पीड को बढ़ा कर 1 हजार मील प्रति घंटा यानी 1,610 किलोमीटर प्रति घंटा तक ले जाने की योजना है. एरोडायनेमिक शेप में डिजाइन की गई कार का डिजाइन स्वेनसिया विश्वविद्यालय की टीम ने तैयार किया है. अगर हमारे देश में यह कार आती है तो पत्नियों को मायके जाने के लिए ज्यादा सोचना नहीं पड़ेगा.

30 साल बाद देखी दुनिया

जन्म से ही अंधेपन का शिकार हुए लारी हैस्टर ने कभी नहीं सोचा था कि वे इस रंगरंगीली दुनिया को देख पाएंगे. अमेरिका के नौर्थ कैरोलिना के लारी हैस्टर 30 साल के बाद बायोनिक आंख की बदौलत आज देख पा रहे हैं. बायोनिक आंख रोशनी के सिग्नलों को दिमाग तक भेजती है.  बायोनिक आंख का इस्तेमाल करने वाले मरीजों को खास चश्मा पहनना पड़ता है. इस चश्मे में वीडियो कैमरा, बेहद छोटा सा कंप्यूटर, सैंसर आदि लगे होते हैं. बायोनिक आंख (चश्मे) पर लगा वीडियो कैमरा वस्तुओं को देखता है, फिर इसे कंप्यूटर के पास भेजता है, इस के बाद आंख में स्थापित सैंसर को संदेश भेजा जाता है. यह संदेश नस को भेजा जाता है, जो दिमाग को दिखाई देने वाली वस्तुओं के बारे में संदेश भेजती है. नतीजतन, मरीज को किसी भी वस्तु की आकृति सहजता से दिख जाती है. 

दौड़ेगा, दहाड़ेगा नहीं

भारत में चीता और शेरों की घटती संख्या से चिंता है जबकि अमेरिका में टाइगर की संख्या में अचानक तेजी आ गई है. यह टाइगर जंगलों में रहने वाला जीव नहीं, मशीनी टाइगर है, जो आम चीते की तरह दौड़ लगा सकता है, छलांग लगा सकता है पर दहाड़ नहीं सकता. इसे वाशिंगटन स्थित मैसाचुएट्स ‘इंस्टिट्यूट औफ टैक्नोलौजी’ यानी एमआईटी के शोधकर्ताओं ने बनाया है. यह मैकेनिकल बिग कैट 4 टांगों का प्राणी है जो कि गियर्स, मोटर्स और बैटरीज के सहारे चलता है. पहले इसे एक केबल के जरिए मेन पावर से जोड़ा गया था. इस रोबोट को वाइल्ड कैट का नाम दिया गया है. हाल ही में इसे 10 किलोमीटर प्रति घंटे की स्थिर रफ्तार से दौड़ता हुआ फिल्माया गया. शोधकर्ताओं का मानना है कि इस की रफ्तार 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक बढ़ाई जा सकती है.