स्मार्टफोन के बढ़ते वर्चस्व ने मोबाइल गेम्स के क्रेज को काफी बढ़ा दिया है. इन्हीं गेम्स में एक है पोकीमौन गो, जिस की दीवानगी किशोरों में आजकल इस कदर बढ़ रही है कि उन्हें अपनी जान की भी परवा नहीं है. ऐसे में जहां ये गेम्स ऐंटरटेनमैंट देते हैं वहीं खतरा भी बने हुए हैं. इसलिए लिमिट में रह कर खेलें ताकि इन के दुष्परिणामों से बचा जा सके.

दुनिया में जब से वीडियो गेम्स आए हैं, उन्हें ले कर काफी सनसनी रही है. पहले ऐसे गेम्स केवल टीवी स्क्रीन्स पर खेले जाते थे, फिर इन के लिए ऐक्सबौक्स जैसे प्रबंध होने लगे. लेकिन हाल के वर्षों में स्मार्टफोन पर खेले जाने वाले मोबाइल गेम्स ने लोगों को काफी क्रेजी किया है. जैसे कि सब वे सर्फर और कैंडी क्रश आदि. इस क्रम में नई सनसनी फैली है 8 जुलाई, 2016 को अमेरिका में लौंच किए गए मोबाइल गेम ‘पोकीमौन गो’ से.

हालांकि शुरुआत में इसे अमेरिका, न्यूजीलैंड समेत कुछ ही देशों में लौंच किया गया, लेकिन लोगों ने अपनी मोबाइल सैटिंग में बदलाव करते हुए इसे भारत में भी खेलने का प्रबंध कर लिया. दुनियाभर में इसे खेलने वालों की संख्या अब करोड़ों में पहुंच गई है और दावा किया गया है कि जल्द ही यह सोशल मीडिया साइट ट्विटर को पीछे छोड़ देगा.

क्या है पोकीमौन गो

यह एक तरह का वीडियो गेम है जिसे इंटरनैट से लैस स्मार्टफोन पर खेला जाता है. इस की असली शुरुआत जापान में एक कौमिक्स शृंखला ‘पोकीमौन’ से हुई थी, जो ‘पोकीमौन मौन्स्टर’ का संक्षिप्त नाम था. इस का असली अर्थ है जेब में पड़ा हुआ राक्षस. पोकीमौन की रचना करने वाले जापान के मशहूर डिजाइनर सतोशी ताजिरी ने 1990 में इस गेम की एक रूपरेखा तैयार की थी.

सतोशी ताजिरी वही शख्स हैं जो इमोजी बना कर काफी पहले ही ख्याति बटोर चुके हैं. इस के पात्रों के रूप में सतोशी ने बागबगीचों और जंगलों में मिलने वाले कीटपतंगों जैसे कार्टूनों की रचना की, बाद में 1996 में एक अन्य डिजाइनर केन सुगिमोरी ने निन्टेंडो लैब्स लिमिटेड नामक कंपनी के साथ काम करते हुए पोकीमौन गेम के लिए 151 नए कैरेक्टर बनाए और इन्हें कौमिक्स से निकाल कर वीडियो गेम के रूप में पेश किया.

इस तरह खेला जाता है यह गेम

इस गेम में खिलाड़ी अपने स्मार्टफोन के जरिए असली दुनिया में अलगअलग जगहों पर मौजूद वर्चुअल (आभासी) दैत्यों की तलाश करते हैं और उन्हें वर्चुअल ढंग से पकड़ते व मारते हैं. असल में यह गेम एक तरह की वर्चुअल रिएलिटी पर आधारित  है. पोकीमौन गो लोगों के मोबाइल फोन (स्मार्टफोन) के ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और घड़ी का इस्तेमाल करता है. जब कोई व्यक्ति इसे खेलना शुरू करता है, तो उसे फोन पर कार्टून जैसे जंगली जीव यानी पोकीमौन नजर आने लगते हैं. जैसेजैसे गेम में आगे बढ़ा जाता है, लोगों को फोन की स्क्रीन पर कुछ और नए किस्म के पोकीमौन दिखाई देने लगते हैं. यह एक ऐसा गेम है जिस में खेलने वाले को घर के बाहर निकलना पड़ता है. अलगअलग स्थानों पर अलगअलग पोकीमौन मिलते जाते हैं, जिन्हें पकड़ना और मारना एक चुनौती है. इस चुनौती से जूझने में ही लोगों को मजा आता है. गेम के आगे बढ़ने के साथ ही आसपास दूसरे पोकीमौन भी तेजी से दिखने शुरू हो जाते हैं. इन के करीब आने पर इन्हें पकड़ा और इन के साथ खेला जा सकता है.

इसे खेलने के लिए लोगों को अपने गूगल अकाउंट के जरिए लौग इन करना पड़ता है. लौग इन या साइन इन करने के बाद पोकीमौन की ड्रैस चुनने को कहा जाता है. इस गेम में पोकीबौल, इंसैंस, एग इंक्यूबेटर जैसी चीजों का इस्तेमाल होता है जो शुरुआत में ही इस गेम के बैग में मिल जाती हैं. इस्तेमाल होने पर जब ये चीजें खत्म हो जाती हैं, तो इन्हें मोबाइल ऐप के जरिए खरीदा जा सकता है. हर पोकीमौन की अपनी लड़ने की क्षमता होती है जो कुछ देर में खत्म हो जाती है.

इसलिए गेम में आगे बढ़ने के लिए नएनए पोकीमौन खोजते रहना जरूरी है जो किसी शहर में अलगअलग स्थानों पर फैले हो सकते हैं. इसलिए इसे खेलने वाला व्यक्ति शहर की अलगअलग जगहों पर जाएगा और जितना ज्यादा चल कर नए पोकीमौन खोजेगा, गेम में उस का लैवल उतना ही बढ़ता जाएगा. यह गेम कुछ जरूरी चीजों के बिना नहीं खेला जा सकता है, इसलिए खेलने वाले को उन की जानकारी होना भी जरूरी है, जैसे :

एग इंक्यूबेटर

दरअसल, यह गेम ‘एग’ के जरिए ही आगे बढ़ता है. एग हासिल करने के बाद उन्हें इंक्यूबेटर में रखा जाता है, जिस से कुछ निश्चित किलोमीटर तक चला जा सकता है या कहें कि ये एग ही कुछ किलोमीटर तक चलने की पावर देते हैं. चूंकि यह गेम रिएलिटी पर आधारित है इसलिए इसे खेलने वाले को असल में पैदल या किसी वाहन से निश्चित किए गए किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती है, उस के बाद ही नए पोकीमौन नजर आते हैं.

इसैंस

यह एक वर्चुअल खुशबू है, जिस की सहायता से पोकीमौन को आधे घंटे तक उलझाए रखा जा सकता है.

पोकीबौल

यह एक किस्म का कांटा है जिस की सहायता से पोकीमौन को पकड़ा जा सकता है. पोकीबौल स्क्रीन पर नजर आते ही उसे तब तक दबा कर रखा जाता है, जब तक कि पोकीमौन के आसपास हरी रिंग न नजर आए. यह रिंग धीरेधीरे छोटी होने लगती है. इस रिंग में से ही पोकीबौल ले कर पोकीमौन को मारना होता है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि पोकीबौल्स खरीदने के लिए ‘पोकस्टौप्स’ पर जाना होता है, जो शहर में अलगअलग फैले हो सकते हैं.

स्टारडस्ट

पोकीमौन को पकड़ने पर ‘स्टारडस्ट’ जैसी पावर मिलती है जो गेम में आगे काफी काम आती है.

प्रोफैसर

अगर किसी ने गेम खेलने के दौरान ज्यादा पोकीमौन इकट्ठे कर लिए हैं और वह उन्हें अपने पास नहीं रखना चाहता तो वह इन्हें ‘प्रोफैसर’ नामक विकल्प के जरिए बेच कर उन के बदले कैंडी ले सकता है. ये कैंडी गेम में आगे काम आती हैं.

कई मुसीबतें भी ला रहा पोकीमौन गो

वैसे तो किशोरों को यह गेम इतना पसंद आ रहा है कि वे इस में नए से नए रिकौर्ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जैसे निक जौनसन नामक 28 वर्षीय अमेरिकी नागरिक ने 2 हफ्ते के अंदर अमेरिका में मौजूद सभी 4,629 पोकीमौन पकड़ने का रिकौर्ड बना डाला. इस के लिए उन्होंने रोजाना 8 से 10 किलोमीटर की यात्रा की और 2 हफ्ते में 153 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए इस गेम के 31 लैवल पार कर लिए. जौनसन का कारनामा इस गेम के प्रति लोगों की दीवानगी ही दिखा रहा है.

भारत में भी इस का काफी असर है. यहां लोगों ने मोबाइल सैटिंग में कुछ बदलाव कर के इस गेम को खेलना शुरू किया है, क्योंकि शुरुआत में यह इस गेम की कंपनी की तरफ से यहां उपलब्ध नहीं कराया गया, लेकिन इस की लोकप्रियता का आलम यह है कि दिल्ली के कनाट प्लेस में जुलाई के एक रविवार को पोकीमौन गो के दीवाने लोग एकसाथ जमा हुए और पोकीमौन पकड़ते दिखाई दिए. पर मनोरंजन से अलग इस गेम के कारण कई दुर्घटनाएं भी हो रही हैं.

असली और नकली दुनिया का फर्क मिटाने के कारण यह खेल दुनिया के लिए घातक साबित हो रहा है. जैसे अमेरिका के औरलेंडो में एक व्यक्ति ने ‘पोकीमौन गो’ गेम खेल रहे 2 किशोरों को चोर समझ लिया और उन पर गोली चला दी. दोनों किशोर रात को यह गेम खेल रहे थे और इसे खेलते हुए कार चलाते-चलाते औरलेंडो के उत्तरपूर्वी इलाके के पाम कास्ट एरिया जा पहुंचे, जहां एक व्यक्ति ने उन्हें अपने घर के बाहर देखा तो उन्हें चोर समझ लिया और उन पर गोली चला दी. पोकीमौन खेलते समय कार चलाने के कारण कई अन्य दुर्घटनाएं भी हो रही हैं. कुछ जगहों पर पोकीमौन को पकड़ने के लिए लोग पेड़ पर चढ़ रहे हैं, लेकिन वहां से उतरते वक्त फिसल कर घायल हो रहे हैं

सउदी अरब में तो इस गेम को एक गैरइसलामी गतिविधि करार देते हुए इस के खिलाफ फतवा जारी किया गया है. इसी तरह बोस्निया की सरकार ने जनता को चेताया है कि वे पोकीमौन को पकड़ने की कोशिश में खाली पड़ी उन खदानों पर न चढ़ जाएं जिन्हें खतरनाक घोषित करते हुए 90 के दशक में बंद कर दिया गया था.

मिस्र की सरकार ने इस गेम को प्रतिबंधित करने की आशंका जताते हुए कहा कि इस के जरिए लोग फोटो और वीडियो शेयर करते हैं, इसलिए इस से सुरक्षा को खतरा हो सकता है. रूसी सरकार ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी की है.

रूस की एक वैबसाइट पर प्रकाशित चेतावनी में कहा गया है कि यह गेम असल में अमेरिकी जासूसी एजेंसी सीआईए की योजना का हिस्सा है.

कुवैत में पोकीमौन गो ऐप के जरिए सरकारी इमारतों के फोटो लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है और सरकारी अधिकारियों को चेताया गया है कि वे यह गेम न खेलें, क्योंकि इस से उन का पर्सनल डाटा चोरी हो सकता है और वह अपराधियों के हाथ में पड़ सकता है.

इंडोनेशिया में भी इस गेम को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है और कहा गया है कि इस के जरिए देश के शत्रु सेना की इमारतोंप्रतिष्ठानों में सेंध लगा सकते हैं. इंडोनेशिया में तो एक फ्रांसीसी नागरिक को एक सैन्य बेस के नजदीक जासूसी के संदेह में गिरफ्तार भी किया गया, जबकि उस ने दावा किया है कि वह तो वहां मौजूद पोकीमौन पकड़ने के लिए गया था.

इजराईल में सैनिकों से कहा गया है कि वे हरगिज पोकीमौन गेम न खेलें, क्योंकि इस से उन की लोकेशन का खुलासा होता है. उधर दक्षिण कोरिया में सुरक्षा कारणों से गूगल मैप को डाउनलोड करने पर प्रतिबंध काफी पहले से लगा हुआ है, इसलिए वहां पोकीमौन गो गेम भी डाउनलोड नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यह उसी से जुड़ा हुआ है.

और भी हैं करिश्मे

विज्ञान का करिश्मा कहलाने वाले मोबाइल गेम्स की शुरुआत असल में टीवी स्क्रीन पर खेले जाने वाले वीडियो गेम्स से ही हुई है. वीडियो गेम्स 1950 के दशक में ही सामने आ गए थे, लेकिन इन में थोड़ा रोमांच तब आया जब 1978 में टायटो नामक कंपनी ‘स्पेस इनवेडर’ नामक वीडियो गेम ले कर बाजार में आई थी. ये वीडियो गेम्स टीवी स्क्रीन्स पर खेले जाते थे, जिन में लगी हुई जौयस्टिक अपने बटनों के जरिए गेम्स पर कंट्रोल करने का मौका खिलाडि़यों को देती थी.

स्पेस इनवेडर बहुत शुरुआती किस्म का वीडियो गेम था, लेकिन इस के बाद उन में कई नए फीचर्स जोड़े जाने लगे. वे दिमागी तौर पर ज्यादा पहेलीनुमा या फिर जटिल होने लगे, उन में गति बढ़ गई और ज्यादा मनोरंजक हो गए. जैसे टायटो कंपनी के बाद दूसरी कई कंपनियों ने 90 के दशक में मारियो, कौंट्रा जैसे वीडियो गेम्स बनाए, जो काफी पसंद किए गए. ये सारे गेम्स लंबे समय तक दुनिया के किशोरों और बच्चों के दिलोदिमाग पर छाए रहे.

लेकिन 21वीं सदी में टीवी स्क्रीन की जगह स्मार्टफोन्स ने ले ली है और अब इन पर खेले जाने वाले कई मोबाइल गेम्स और स्मार्ट गेमिंग ऐप्स आ गए हैं. आधुनिक किस्म के इन गैजेट्स में पुराने दौर के वीडियो गेम्स मजेदार नहीं लगते थे इसलिए वीडियो गेम निर्माता ऐंग्री बर्ड, टैंपल रन, कैंडी क्रश, सब वे सर्फर जैसे गेम्स ले कर आए, जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा लोकप्रिय हुए.

गुस्सैल चिडि़या यानी ऐंग्री बर्ड

फिनलैंड की कंपनी रोवियो ऐंटरटेनमैंट ने वर्ष 2009 में इस गेम को बनाया था, जिस में गुस्सैल दिखने वाली चिडि़या अपने निशाने पर हमला करती है और उसे खत्म करती है. सटीक निशाना लगा कर इस खेल में पौइंट्स मिलते हैं, जिस से खेलने वाले खुश होते हैं. इसी कंपनी ने हाल में ऐंग्री बर्ड को एक फिल्म के रूप में भी पेश किया. मोबाइल पर अब तक 2 अरब लोग ऐंग्री बर्ड को डाउनलोड कर चुके हैं.

रंगीन टौफियां बांटता कैंडी क्रश

कैंडी क्रश मोबाइल गेम असल में 4 वर्ष पहले 2012 में फेसबुक के उपभोक्ताओं के लिए बनाया गया था. इस खेल में 330 लैवल होते हैं. खेल में एक जैसी दिखने वाली टौफियां (कैंडी) को एक लाइन में ला कर पौइंट बनाए जाते हैं. अब तक 50 करोड़ से ज्यादा लोग इसे अपने मोबाइल पर डाउनलोड कर चुके हैं.

टैंपल रन

वर्ष 2011 में शुरू किए गए इस गेम का उद्देश्य यह है कि रास्ते में चाहे जितनी बाधाएं आएं, इस के खिलाड़ी को दौड़ते रहना है. पिछले 5 वर्ष में इसे मोबाइल फोन पर डाउनलोड करने वालों की संख्या 50 करोड़ को पार कर चुकी है.

मंदिर से गए सब वे में यानी सब वे सर्फर

हर हाल में दौड़ते रहने का मकसद सब वे सर्फर में भी इसे खेलने वालों को पाना होता है. इस में रेल पटरियां होती हैं, जिन पर गेम के पात्रों को तेजी से दौड़ते समय कई तरह की बाधाएं आती हैं. बाधाओं को पार करते हुए पौइंट अर्जित करना ही लोगों को इस खेल का दीवाना बनाता है.

किस्सा फ्लैपीबर्ड का

इसे डौन गुएंग नामक शख्स ने अपने निजी कंप्यूटर पर बनाया था. गेम में एक चिडि़या फुदकती रहती है, जो अपनी हरकतों से लोगों का मन मोह लेती है. हालांकि 2013 में शुरू किए गए इस खेल को 2014 में ही डौन गुएंग ने बंद करने की घोषणा कर दी थी, लेकिन इसे भी दुनिया में 5 करोड़ लोग अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर चुके थे.