सरिता विशेष

मंगल ग्रह की धरती पर जीवन के क्रमिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका को ले कर विज्ञान जगत में हमेशा से शोध होते रहे हैं. इसी क्रम में भारत ने भी कदम बढ़ाते हुए इसरो के अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत 5 नवंबर को अपना यान मंगल ग्रह पर भेजा. 460 करोड़ रुपए की लागत से तैयार भारत का 1,350 किलोग्राम का रोबोटिक उपग्रह लाल ग्रह की 2 हजार लाख किलोमीटर की 10 महीने की यात्रा पर रवाना हुआ. इस में 5 खास उपकरण मौजूद हैं जो मंगल ग्रह के बारे में अहम जानकारियां जुटाने का काम करेंगे. इस मंगल अभियान का मुख्य उद्देश्य वहां जीवन की संभावनाओं की तलाश करना बताया जा रहा है.

भारत के इस अभियान को ले कर दुनिया भर से मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. एक वर्ग जहां मंगल ग्रह पर एक छोटा मानवरहित उपग्रह भेजे जाने को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में बड़ी उपलब्धि मान रहा है वहीं कुछ लोग इसे संभ्रांत तबके का भ्रामक अभियान मात्र बता रहे हैं.

बहरहाल, अगर सबकुछ ठीक रहा तो भारत इस मिशन की कामयाबी के साथ मंगल मिशन शुरू करने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों-रूस व अमेरिका के बाद विश्व का तीसरा राष्ट्र हो जाएगा. भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद ऐसी एजेंसी बन जाएगी जिसे मंगल ग्रह पर यान भेजने में कामयाबी हासिल हुई. फिलहाल, आशा और उम्मीदों के साथ देशवासियों की निगाहें इस अभियान के साथ जुड़ी हैं.