आज कल इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फेक या एडिटेड फोटोज वायरल होना तो जैसे आम बात हो गई है. पहले लोग फोटो को ऑरिजनल समझ कर खूब शेयर किया करते हैं, लेकिन कई बार बाद में पता चलता है कि ये फोटो फेक हैं या नकली हैं.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं फेक और ऑरिजनल फोटो में फर्क पता लगाने के कुछ तरीके. यहां हम आपको कुछ ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध हैं जिनसे आप आसानी से पता लगा सकते हैं की ये इंटरनेट पर दिखने वाली ये फोटो फेक है या रियल.

1. Error Level Analysis

वेबसाइट fotoforensics.com पर जिस फोटो के बारे में पता लगाना है उसका URL अपलोड करें. ये वेबसाइट Error Level Analysis कर, कम्प्रेशन हीट मैप बनाता है. इसके बाद फोटो का जो हिस्सा कम मैच करता है वो आपको थोड़ा ज्यादा व्हाइट डॉटेड वाला दिखेगा और आपको पता चल जाएगा कि तस्वीर नकली है या नहीं.

इन कई वेबसाइट्स पर और भी टूल्स अवेलेबल हैं, जो बताते हैं कि फोटो असली है या फेक –

fotoforensics.com

tineye.com

pipl.com

webmii.com

findexif.com

2. मेटा डाटा

जब भी कोई फोटो खींची जाती है तो उससे जुड़ी इन्फॉर्मेशन जैसे डेट, टाइम, कैमरा मॉडल और कई बार एडिटिंग सॉफ्टवेयर भी सेव हो जाते हैं. अगर आपने कोई फोटो ऑनलाइन देखी है तो हो सकता है कि उससे जुड़ी इन्फॉर्मेशन का भी आप पता लगा सकते हो.

ऑनलाइन ऐसे कई टूल्स हैं जो फोटो की एक्जैक्ट डिटेल्स बता सकते हैं. हालांकि, ये तरीका फुलप्रूफ नहीं है. मेटाडाटा में आसानी से बदलाव भी किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए – ऑनलाइन टूल- Izitru (http://www.izitru.com/)

3. ध्यान से देखें परछाई और लाइट –

कई बार सिर्फ ध्यान से देखने पर ही फोटो में फर्क समझ में आ जाता है. अगर किसी नेचुरल जगह की फोटो है या ऐसी फोटो है जहां बहुत लाइट है तो फोटो में मौजूद चीजों की शैडो (परछाई) को चेक कीजिए. भले ही इंसान फोटोशॉप एक्सपर्ट क्यों ना हो, लेकिन परछाई बनाने में बहुत मेहनत लगती है ऐसे में फोटो में कोई ना कोई गलती हो जाती है.

शिफ्टिंग लाइट : ये अक्सर मैगजीन कवर में देखा जा सकता है फोटोशॉप का इस्तेमाल सिर्फ मॉडल्स पर ही नहीं बल्कि साथ रखे फर्नीचर आदि पर भी किया जाता है. ऊपर दी गई फोटो का बैकग्राउंड तो बदल दिया गया है, लेकिन लाइट का रिफ्लेक्शन सही नहीं दिया गया है. साथ ही, दीवार के पास थड़े कपल्स का शौडो सही नहीं है.

4. इमेज साइज पर दें ध्यान

फोटोशॉप के द्वारा बनाई गई फोटोज अक्सर साइज में नॉर्मल फोटोज से बड़ी होती हैं. ऐसा इसलिए होता है कि फोटोशॉप पर काम करते समय लेयर्स बन जाती हैं. ऐसे में हेवी फोटोशॉप का इस्तेमाल जिस भी फोटो में किया गया होगा वो नॉर्मल फोटो से बड़ी होगी. इसके अलावा, अगर किसी फोटो को कम्प्रेशन सॉफ्टवेयर से छोटा किया गया है तो उसकी क्वालिटी में फर्क पड़ेगा. ऐसे में यूजर्स पता लगा सकते हैं कि फोटो असली है या नकली.

5. रिवर्स गूगल सर्च

इस तरीके को पूरी तरह से सही नहीं कहा जा सकता, क्योंकि ऑरिजिनल फोटोज गूगल इमेज सर्च में नहीं मिलेगी, लेकिन अगर किसी फोटो को फोटोशॉप किया गया है तो उसके जैसी कोई फोटो गूगल पर मिल सकती है जैसे इस पोस्ट की पहली फोटो के लिए हमने गूगल से ली गई एक फोटो का इस्तेमाल किया है. ये तरीका सोशल मीडिया में वायरल हो रही फोटोज के बारे में पता लगाने के काम आ सकता है.