अभी तक आप ने थ्रीडी प्रिंटर्स, थ्रीडी मूवीज के बारे में सुना होगा, यहां तक कि अभी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘जंगल बुक’ को भी आप ने थ्रीडी में खूब ऐंजौय किया होगा और आगे भी इस तरह की मूवीज आती रहें, ताकि आप को खुद को अलग तरह से ऐंटरटेन करने का मौका मिल सके. ऐसी इच्छा आप मन ही मन रखते होंगे. लेकिन क्या कभी आप के दिमाग में थ्रीडी औफिस के बारे में खयाल आया है तो 100% आप का जवाब न में ही होगा, क्योंकि आप के दिमाग में वही पुराने प्लेटफार्म पर तैयार होने वाले औफिसों की इमेज जो बनी हुई है. जिस में बैठने के लिए वही फर्नीचर जो आमतौर पर आप को हर जगह देखने को मिल जाता है, दीवारों पर भी वही पुरानी डिजाइनिंग, जिसे देख कर कुछ भी नया नहीं लगता. औफिस में नया होता है तो सिर्फ हमारे आइडियाज से किसी प्रोजैक्ट को बेहतर दिशा मिल पाती है या फिर हमारे बेहतर कार्य से कंपनी प्रौफिट में चली जाती है लेकिन बाकी सब चीजें वही पुरानी.

लेकिन आप ही सोचिए अगर आप को थ्रीडी औफिस में काम करने का मौका मिले तो कैसा लगेगा. शायद आप यह बात सोच कर ही कल्पनाओं की दुनिया में चले जाओगे. आप सोचेंगे कि जब कल्पनाएं इतनी खूबसूरत हैं तो हकीकत में कितना अच्छा लगेगा ऐसे औफिस में काम करना. असल में अब यह कल्पना नहीं बल्कि हकीकत में बदल गया है. क्योंकि दुनिया का पहला थ्रीडी प्रिंटेड औफिस दुबई में खोला गया. जब इसे लोगों ने देखा तो उन की आंखें फटी की फटी रह गईं. क्योंकि औफिस दिखने में जितना खूबसूरत था उतनी ही इस की तकनीक भी काबीलेतारीफ थी.

आप को भले ही विश्वास न हो लेकिन यह भी सच है कि इसे महज 17 दिन में तैयार किया गया. अधिकतर औफिसों को बनाने में महीनों, सालों लग जाते हैं लेकिन इसे तो महज कुछ दिनों में, जो पलक झपकते ही बीत गए में बना कर अन्य देशों के सामने दुबई की मिसाल कायम की गई है. यूएई के पीएम शेख मोहम्मद बिन राशिद ने इस का शुभारंभ करते हुए कहा कि थ्रीडी तकनीक के क्षेत्र में दुबई एक कदम आगे निकल गया है और भविष्य में दुबई में इस तरह के और भी औफिस बनाने की कोशिश की जाएगी. इस औफिस को मुंबई फ्यूचर फाउंडेशन का औफिस बनाया गया है.

डिजाइन लाजवाब

थ्रीडी तकनीक से बने औफिस से दुबई की एक अलग ही इमेज दुनिया के सामने उभर कर आई है. क्योंकि इस में न सिर्फ बिल्डिंग बल्कि बिजली, वाटर सिस्टम भी थ्रीडी तकनीक पर आधारित है. यह औफिस 2,700 वर्ग फीट में बना है. इस का बाहरी डिजाइन फ्यूचर में काम करने का माहौल कैसा होगा इस को दर्शाता है. साथ ही इसे पुराने औफिसों से हट कर एक अलग प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है जो हमें बेहतर सोचने के साथसाथ अच्छा कार्य करने के लिए भी पे्ररित करता है, जिस से हमारे आगे बढ़ने की संभावनाएं बढ़ेंगी.

इस को इस तरह डिजाइन कर के स्पेस छोड़ा गया है ताकि वहां ऐग्जिबिशन, वर्कशौप्स और इवैंट्स आदि भी आयोजित किए जा सकें. सब से बड़ी बात हैलदी और हैप्पी ऐंवायरमैंट में काम करने का मौका मिलेगा. इसे मामूली सीमेंट से नहीं बल्कि स्पैशल मिक्सर सीमेंट से बनाया गया है और इस में यूएस में बने सैटों का इस्तेमाल किया गया है. इन सैटों की विश्वसनीयता जांचने के लिए इन का टैस्ट चीन और युनाइटेड किंगडम दोनों जगह हुआ है. सुरक्षा कारणों और बिल्डिंग लंबे समय तक टिकी रहे, के लिए इस को आर्क शेप दी गई है.

ऊर्जा की खपत कम करने के लिए नए फीचर्स यूज किए गए हैं जैसे विंडो शैड्स ऐसे लगाए हैं जो सूर्य की किरणों को अंदर आने से रोकने के साथसाथ बिल्डिंग को भी ठंडा रखते हैं. इसी के साथ मैनेजमैंट का इंफौमेशन सिस्टम भी लेटैस्ट टैक्नोलौजी से लैस है. प्रिंटर के फीचर्स फुली औटोमैटिकली हैं. इस 3डी प्रिंटर की ऊंचाई 20 फीट, लंबाई 120 फीट और चौड़ाई 40 फीट है.

क्यों लागत में सस्ता

इस पूरे प्रिंटेड प्रोसैस में प्रिंटर को औपरेट करने के लिए एक थ्रीडी प्रिंटेड विशेषज्ञ, बिल्डिंग में सैटों को फिट करने के लिए 7 व्यक्ति और 10 व्यक्तियों की एक टीम ने विद्युत और यांत्रिक इंजीनियरिंग का कार्यभार संभाला यानी 17-18 लोगों की टीम ने इस औफिस को तैयार किया. जो परंपरागत औफिसों की तुलना में काफी सस्ता था. हम कह सकते हैं कि इसे बनाने में 50% कम लेबर कौस्ट आया.

क्या है 3डी टैक्नोलौजी

3डी टैक्नोलौजी असल में 3 डायमैंशियल टैक्नोलौजी है. यह हमारी आंखों के सामने भ्रम पैदा करती है जिस के कारण चीजें हमें हर तरफ से एक जैसी दिखाई देने के साथ साथ हम उसे गहराई व करीब से महसूस भी कर पाते हैं.