‘‘अब आएगा मजा. पता चलेगा बच्चू को जब सारे नखरे ढीले हो जाएंगे. मां को नचाना आसान है न. मां हूं न. मैं ने तो ठेका लिया है सारे नखरे उठाने का,’’ सुनंदा अपने बेटे राहुल को सुनाती हुई किचन में काम कर रही थी. मां के सारे ताने सुनता राहुल मंदमंद मुसकराता हुआ फोन पर सिया से चैट करने में व्यस्त था.

कपिल ने मांबेटे की अकसर होने वाली तानेबाजी का आनंद उठाते हुए, धीरेधीरे हंसते हुए बेटे से कहा, ‘‘वैसे तुम परेशान तो बहुत करते हो अपनी मां को, चुपचाप नाश्ते में पोहा खा लेते तो इतने ताने क्यों सुनते. तन्वी को देखो, जो मां देती है, आराम से खा लेती है बिना कोई नखरा किए.’’

‘‘हां पापा, पर मैं क्या करूं. मुझे शौक है अच्छेअच्छे, नएनए खाना खाने का. मुझे नहीं खाना है संडे को सुबहसुबह पोहा. अरे संडे है, कुछ तो स्पैशल होना चाहिए न, पापा.’’

किचन से ही सुनंदा की आवाज आई, ‘‘हांहां, बना रही हूं, कितना स्पैशल खाओगे संडे को.’’

राहुल हंस दिया. यह रोज का तमाशा था, खानेपीने का शौकीन राहुल सुनंदा की नाक में दम कर के रखता था. घर का सादा खाना उस के गले से नहीं उतरता था. उसे रोज कोई न कोई स्पैशल आइटम चाहिए होता था. सुनंदा उस के नखरे पूरे करतेकरते थक जाती थी. पर अब उसे इंतजार था राहुल के विवाह का. एक महीने बाद ही राहुल का सिया से विवाह होने वाला था. राहुल और सिया की

3 साल की दोस्ती प्रेम में बदली तो दोनों ने विवाह का निर्णय ले लिया था. दोनों के परिवारों ने इस विवाह पर अपनी सहमति सहर्ष प्रकट की थी.

सुनंदा को इस बात की खुशी थी कि राहुल के नखरों से छुट्टी मिलेगी. राहुल स्वभाव से मृदुभाषी, सभ्य लड़का था पर खाने के मामले में वह कभी समझौता नहीं करता था. जो मन होता था, वही चाहिए होता था. आजकल सुनंदा का रातदिन यही कहना था, ‘‘कर लो थोड़े दिन और नखरे, बीवी आएगी न, तो सुधार देगी. अब आएगा मजा, पता चलेगा, ये सारे नखरे मां ही उठा सकती है.’’ सिया से जब सुनंदा मिली तो मधुर स्वभाव, शांत, हंसमुख, सुंदर, मौडर्न सिया उसे देखते ही पसंद आ गई. कपिल एक कंपनी में जनरल मैनेजर थे, तन्वी राहुल से 3 साल छोटी थी. वह अभी पढ़ रही थी. कपिल और तन्वी को भी सिया पसंद आई थी. सिया अच्छे पद पर कार्यरत थी. विवाह की तिथि नजदीक आती जा रही थी और सुनंदा का ‘अब आएगा मजा’ कहना बढ़ता ही जा रहा था. हंसीमजाक और उत्साह के साथ तैयारियां जोरों पर थीं.

राहुल ने एक दिन कहा, ‘‘मां, आजकल आप बहुत खुश दिखती हैं. अच्छा लग रहा है.’’ कपिल और तन्वी भी वहीं बैठे थे. कपिल ने कहा, ‘‘हां, सास जो बनने जा रही है.’’ सुनंदा ने कहा, ‘‘नहीं, मुझे बस उस दिन का इंतजार है जब राहुल खाने के साथ समझौता करेगा, तो मैं कहूंगी, ‘बेटा, सुधर गए न’.’’

सब इस बात पर हंस पड़े. सुनंदा ने अत्यंत उत्साहपूर्वक कहा, ‘‘बस, अब आएगा मजा. सिया औफिस जाएगी या इस के नखरे उठाएगी. बस, अब मेरा काम खत्म. यह जाने या सिया जाने. मैं तो बहुत दिन नाच ली इस के इशारों पर.’’

तन्वी ने कहा, ‘‘मां, पर भाभी तो कुकिंग जानती हैं.’’

‘‘सब कहने की बात है, औफिस जाएगी या बैठ कर इस के लिए खाना बनाएगी. मैं तो बहुत उत्साहित हूं. बहुत मजा आएगा.’’ राहुल मंदमंद मुसकराता रहा, सुनंदा उसे जी भर कर छेड़ती रही.

विवाह खूब अच्छी तरह से संपन्न हुआ. सिया घर में बहू बन कर आ गई. दोनों ने 15 दिनों की छुट्टी ली थी. विवाह के बाद सब घर समेटने में व्यस्त थे. यह मुंबई शहर के मुलुंड की एक सोसायटी में थ्री बैडरूम फ्लैट था. सिया का मायका भी थोड़ा दूर ही था. औफिस जाने का भी समय आ गया. सिया का औफिस पवई में था. राहुल का अंधेरी में. औफिस जाने वाले दिन सिया भी जल्दी उठ गई. राहुल ने आदतन पूछा, ‘‘मां, नाश्ते में क्या है?’’

‘‘आलू के परांठे.’’

‘‘नहीं मां, इतना हैवी खाने का मन नहीं है.’’

सुनंदा ने राहुल को घूरा, फिर कहा, ‘‘सब का टिफिन तैयार कर दिया है. टिफिन में आलू की सब्जी बनाई थी, तो यही नाश्ता भी बना लिया.’’ सिया ने कहा, ‘‘अरे मां, आप ने क्यों सब बना लिया. मैं तैयार हो कर आ ही रही थी.’’

‘‘कोई बात नहीं सिया, आराम से हो जाता है सब. तुम्हें औफिस भी जाना है न.’’

राहुल ने कहा, ‘‘मां, मेरे लिए एक सैंडविच बना दो न.’’

सिया ने कहा, ‘‘हां, मैं बना देती हूं. आलू के परांठे तो हैं ही, कितना टाइम लगेगा, झट से बन जाएंगे.’’

अचानक एक ही पल में राहुल और सुनंदा ने एकदूसरे को देखा. आंखों में कई सवालजवाब हुए. तन्वी भी वहीं खड़ी थी. उस ने राहुल को देखा और फिर दोनों हंस दिए. ‘‘मैं 2 मिनट में बना कर लाई,’ कह कर सिया किचन में चली गई. मां की मुसकराहट झेंपभरी थी जबकि बेटी की मुसकराहट में शरारत थी. उम्मीद से जल्दी ही सिया सैंडविच बना लाई. सब नाश्ता कर के अपनेअपने काम पर चले गए. तन्वी अपने कालेज चली गई.

शाम को ही सब आगेपीछे लौटे. सुनंदा डिनर की काफी तैयारी कर के रखती थी. डिनर पूरी तरह से राहुल की पसंद का था तो सब ने खुशनुमा माहौल में खाना खाया. 3-4 दिन और बीते. सिया सुनंदा के काम में भरसक हाथ बंटाने लगी थी. एक दिन डिनर के समय राहुल ने कहा, ‘‘मैं नहीं खाऊंगा यह दालसब्जी.’’ सुनंदा ने राहुल को घूरा, ‘‘चुपचाप खा लो, साढ़े 8 बज रहे हैं. अब क्या कुछ और बनेगा.’’

‘‘नहीं मां, यह दालसब्जी मैं नहीं खाऊंगा.’’ खाना पूरी तरह से लग चुका था. सिया के सामने यह दूसरा ही मौका था. मांबेटे एकदूसरे को घूर रहे थे. कपिल और तन्वी मुसकराते हुए सब को देख रहे थे. सिया ने कहा, ‘‘अच्छा बताओ, राहुल, क्या खाना है?’’

‘‘कुछ भी चलेगा, पर यह नहीं.’’

‘‘औमलेट बना दूं?’’

‘‘हां, अच्छा रहेगा, साथ में एक कौफी भी मिलेगी?’’

‘‘हां, क्यों नहीं, आप लोग बैठो, मैं अभी बना कर लाई.’’

राहुल सुनंदा को देख कर मुसकराने लगा तो वह भी हंस ही दी. सिया बहुत जल्दी सब बना लाई. बातोंबातों में सिया ने कहा, ‘‘मां, राहुल आप को बहुत परेशान करते हैं न, मैं ही इन की पसंद का कुछ न कुछ बनाती रहूंगी. आप का काम भी हलका रहेगा.’’ सुनंदा ने हां में गरदन हिला दी.एकांत में कपिल ने कहा, ‘‘सुनंदा, तुम्हें तो बहुत अच्छी बहू मिल गई है.’’

‘‘हां, पर यह थोड़े दिन के शौक हैं. उस के नखरे उठाना आसान बात नहीं है.’’ शनिवार, रविवार सब की छुट्टी ही रहती थी. दोनों दिन कुछ स्पैशल ही बनता था. सिया ने सुबह ही सुनंदा से कहा, ‘‘ये 2 दिन कुछ स्पैशल बनता है न, मां? आज और कल मैं ही बनाऊंगी. आप ये 2 दिन आराम करना.’’

‘‘नहीं, बेटा, मिल कर बना लेंगे, पूरा हफ्ता तुम्हारी भी तो भागदौड़ रहती है.’’

राहुल वहीं आ कर बैठता हुआ बोला, ‘‘हां मां, आप वीकैंड पर थोड़ा आराम कर लो, आप को भी तो आराम मिलना चाहिए.’’ सुनंदा को बेटेबहू की यह बात सुन कर अच्छा लगा. सिया ने पूछा, ‘‘मां, नाश्ते में क्या बनेगा?’’

राहुल ने फौरन कहा, ‘‘बढि़या सैंडविच.’’

‘‘और लंच में?’’

सुनंदा ने कहा, ‘‘मैं ने छोले भिगोए थे रात में.’’

‘‘नहीं मां, आज नहीं, पिछले संडे भी खाए थे, कुछ और खाऊंगा.’’

‘‘राहुल, क्यों हमेशा काम बढ़ा देते हो?’’

‘‘मां, कुछ चायनीज बनाओ न.’’

‘‘उस की तो कुछ भी तैयारी नहीं है.’’

सिया ने फौरन कहा, ‘‘मां, आप परेशान न हों. छोले भी बन जाएंगे. एक चायनीज आइटम भी.’’ सिया किचन में चली गई. सुनंदा हैरान सी थी, यह कैसी लड़की है, कुछ मना नहीं करती. राहुल की पसंद के हर खाने को बनाने के लिए हमेशा तैयार. छुट्टी के दोनों दिन सिया उत्साहपूर्वक राहुल और सब की पसंद का खाना बनाने में व्यस्त रही. सोमवार से फिर औफिस का रूटीन शुरू हो गया. जैसे ही सिया को अंदाजा होता कि नाश्ताखाना राहुल की पसंद का नहीं है, वह झट से किचन में जाती और कुछ बना लाती. सुनंदा हैरान सी सिया की एकएक बात नोट कर रही थी. 2 महीने बीत रहे थे, इतने कम समय में ही सिया घर में पूरी तरह हिलमिल गई थी. सुनंदा को उस का राहुल का इतना ध्यान रखना बहुत भाता था.

पिछले कुछ सालों से किसी न किसी शारीरिक अस्वस्थता के चलते सुनंदा खाना इस तरह से बना रही थी कि उसे किचन में ज्यादा न खड़ा होना पड़े, इसलिए कई चीजें तो घर में बननी लगभग छूट ही चुकी थीं. अब सिया घर में आई तो किचन की रूपरेखा ही बदल गई. उसे हर तरह का खाना बनाना आता था. वह कुकिंग में इतनी ऐक्सपर्ट थी कि सुनंदा ने भी जो चीजें कभी नहीं बनाई थीं, वह उत्साहपूर्वक सब को बना कर खिलाने लगी. सुनंदा तो सिया की लाइफस्टाइल पर हैरान थी. सुबह 6 बजे उठ कर सिया किचन के खूब काम निबटा देती. छुट्टी वाले दिन तो सब इंतजार करने लगे थे कि आज क्या बनेगा. सुनंदा ने तो कभी सोचा ही नहीं था कि इतनी मौडर्न लड़की किचन इस तरह संभाल लेगी.

एक संडे को सब लंच करने बैठे. सिया ने छोलेभठूरे बनाए थे. सब ने वाहवाह करते हुए खाना शुरू ही किया था कि राहुल ने कहा, ‘‘मार्केट में छोलों पर गोलगोल कटे हुए प्याज अच्छे लगते हैं न.’’ सुनंदा ने राहुल को घूरा. सिया ने कहा, ‘‘गोल काट कर लाऊं?’’

सुनंदा ने कहा, ‘‘रहने दो सिया, इस के नखरे उठाना बहुत मुश्किल है, थक जाओगी.’’

सिया उठ खड़ी हुई, ‘‘एक मिनट लगेगा, लाती हूं.’’

सुनंदा सोच रही थी कि राहुल के नखरे कम तो क्या हुए, बढ़ते ही जा रहे हैं. उसे सोचता देख कपिल ने पूछा, ‘‘अरे, तुम क्या सोचने लगी?’’

‘‘कुछ नहीं.’’

राहुल ने शरारत से हंसते हुए कहा, ‘‘मुझे पता है, मां क्या सोच रही है.’’ सुनंदा ने घूरा, ‘‘अच्छा, बताना?’’

राहुल हंसा, ‘‘मां कहती थी न, विवाह होने दो, बच्चू को मजा आएगा, तो मां, मजा तो आ रहा है न?’’ सब हंस पड़े. सुनंदा झेंप गई. इतने में एक प्लेट में गोलगोल पतलेपतले प्याज सजा कर लाती हुई सिया ने पूछा, ‘‘क्या हुआ, किसे मजा आ रहा है?’’ सब मुसकरा रहे थे. राहुल ने मां को छेड़ा, ‘‘इस समय तो सब को आ रहा है. जानती हो, सिया, मां को हमारे विवाह से पहले ही पता था कि बहुत मजा आएगा. है न मां?’’ सब  हंस रहे थे तो झेंपती हुई सुनंदा भी सब के साथ हंसी में शामिल हो गई. सिया को पूरी बात समझ तो नहीं आई थी पर वह मांबेटे की आंखों में चलती छेड़छाड़ को समझने की कोशिश कर रही थी.