सरिता विशेष

शाम के 5 बज रहे थे, 170 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही हवाएं तथा समंदर की कई फुट ऊंची लहरों का शोर किसी भी इंसान को भयभीत करने के लिए काफी था. ऐसे में एक लड़की का बचाओबचाओ का स्वर आकाश के कानों में पड़ा. बगैर परवाह किए वह चक्रवाती तूफान ‘हुदहुद’ के चक्रव्यूह को भेदता हुआ पानी में कूद पड़ा और उसे बचा कर किनारे की तरफ ले आया. वह उस लड़की को पहचानता नहीं था, मगर बचाने का हर संभव प्रयास कर रहा था. समुद्रतट पर उसे लिटा कर वह उस के शरीर में भरा पानी निकालने लगा. थोड़ी देर में लड़की ने आंखें खोल दीं. उसे होश आ गया था मगर वह ठंड से कांप रही थी. आकाश कुछ देर उसे देखता रहा. फिर उसे गोद में उठा कर सुरक्षित स्थान पर ले आया.

वह लड़की अभी भी भयभीत थी और आकाश को लगातार देख रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे वह उस के साथ स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रही हो. आकाश उसे ले कर दूर एक टूटेफूटे घर की तरफ बढ़ गया. घर के दरवाजे पर एक बूढ़ी खड़ी थी. आगंतुक की गोद में एक लड़की को देख बूढ़ी ने उन्हें अंदर आने दिया और पूछा, ‘‘क्या यह तुम्हारी बीवी है?’’

‘‘नहीं, दरअसल यह लड़की तूफान में फंस गई थी और डूब रही थी, इसलिए मैं इसे बचा कर यहां ले आया,’’ आकाश ने कहा.

‘‘अच्छा किया तुम ने. इसे ठंड लग रही होगी. ऐसा करो, तुम इसे मेरे बिस्तर पर लिटा दो. मैं इस के कपड़े बदल देती हूं. इस तूफान ने तो हमारा जीना ही दूभर कर रखा है. खाने के ऐसे लाले पड़ रहे हैं कि लूट मची हुई है. कल एक ट्रक सामान भर कर आने वाला था. खानेपीने की चीजें थीं उस में. मगर यहां पहुंचने से पहले ही सबों ने उसे लूट लिया. हमारे पास तक कुछ पहुंचा ही नहीं. अभी मेरा मरद गया है. शायद कुछ ले कर लौटे,’’ बूढ़ी बोली.

करीब 50 साल की थी वह महिला मगर दुख और परेशानियां उस की उम्र बढ़ा कर दिखा रही थीं. बूढ़ी के पास जो भी कपड़े थे, वह उन्हें ही ले आई और लड़की को पहनाने लगी. आकाश दूसरे कोने में खड़ा हो गया और कमरे का मुआयना करने लगा. यह एक छोटा सा कमरा था, जिस में बैड और किचन के कुछ छोटेमोटे सामानों के अलावा कुछ नजर नहीं आ रहा था. एक कोने में खाली बरतन पड़े थे और बाईं तरफ एक रस्सी बंधी थी जिस पर 2-4 फटे कपड़े लटके हुए थे. 2 दिनों में हुदहुद की मार हर किसी के घर पर नजर आने लगी थी. बहुत से लोग मर चुके थे, तो बहुतों के घर बह गए थे. पूरे गांव में खौफ और बरबादी का मंजर था. ऐसे में आकाश को विशाखापटनम पहुंचना जरूरी था.

जब वह निकला था अपने गांव से, तो उसे हुदहुद के आने की खबर नहीं थी. मगर रास्ते में इस तूफान में वह पूरी तरह फंस गया था. उस की प्रेमिका दिशा उसी के कहने पर हमेशा के लिए अपना घर छोड़ कर उस से मिलने पहुंच चुकी थी और एक होटल में ठहरी हुई थी. आकाश उस के पास जाने की हड़बड़ी में था, मगर बीच में यह वाकेआ हो गया. वह क्या करता? लग रहा था जैसे रास्ता लंबा होता जा रहा है. बूढ़ी ने अब तक लड़की के कपड़े बदल दिए थे और उस पर कंबल डाल दिया था. इस के बाद वह गरमगरम चाय बना लाई और दोनों के हाथों में 1-1 प्याला दे दिया.

लड़की अभी भी काफी परेशान और घबराई हुई लग रही थी. आकाश ने लड़की को समझाने का प्रयास किया कि वह घबराए न. वैसे आज वह खुद भी कम परेशान न था. एक तरफ तूफान का जोर और दूसरी तरफ प्रेमिका के पास पहुंचने की जल्दी. उस पर इस तूफान में मिली लड़की की जिम्मेदारी. उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. करीब 2-3 घंटे उस घर में गुजारने के बाद आकाश ने आगे जाना तय किया. मगर इस लड़की का क्या किया जाए, जो अभी भी बहुत ही घबराई हुई थी और ठीक से चल भी नहीं पा रही थी?

आकाश ने लड़की से पूछा, ‘‘अब बताओ, कहां छोड़ूं तुम्हें? तुम्हारा घर कहां है?’’

लड़की फफकफफक कर रोने लगी फिर रोतेरोते ही बोली, ‘‘मेरा घर तो डूब गया. मेरे तो केवल बाबा थे, उन्हें भी लहरें अपने साथ ले गईं. अब कोई नहीं है मेरा.’’ वह बोल कर फिर रोने लगी. आकाश उस के माथे पर हाथ फिराने लगा और बोला, ‘‘प्लीज, रोओ मत. मैं हूं न. कोई इंतजाम कर दूंगा. अभी चलो मेरे साथ, मैं ले चलता हूं तुम्हें.’’

थोड़ी देर में जब लड़की थोड़ी सामान्य हो गई तो आकाश ने आगे जाने की सोची. उस ने सहारा दे कर लड़की को उठाया तो वह दर्द से कराह उठी. शायद उस के पैर में गहरी चोट लगी थी. आकाश ने फिर से उसे गोद में उठा लिया और बाहर निकल आया. वह अब और रुक नहीं सकता था. काफी आगे जाने पर उसे एक बस मिल गई, जो विशाखापटनम ही जा रही थी. उस ने लड़की को बस में बैठाया और खुद भी बैठ गया. लड़की अब उसे कृतज्ञता और अपनेपन से देख रही थी. आकाश ने मुसकरा कर उस का सिर सहलाया और पहली बार गौर से लड़की को देखा. लंबे काले बालों वाली लड़की देखने में काफी खूबसूरत थी. रंग बिलकुल गोरा, चमकता हुआ. वह एकटक आकाश की तरफ ही देख रही थी. आकाश भी थोड़ी देर उसे देखता रहा फिर सहसा ही नजरें हटा लीं. उसे जल्द से जल्द अपनी प्रेमिका के पास पहुंचना था. वह दिशा को याद करने लगा. दिशा बहुत खूबसूरत नहीं पर अलग सा आकर्षण था उस के पूरे वजूद में. आकाश पूरी तरह दिशा की यादों में खो गया. लेकिन बस अचानक झटके से रुक गई तो उस का ध्यान बंट गया.

दोबारा बस चलने पर आकाश एक बार फिर से दिशा के बारे में सोचने की कोशिश करने लगा मगर अब बारबार उस के जेहन में बगल में बैठी लड़की का खयाल आने लगा था. इतनी सुंदर है, अकेली कहां जाएगी? सहानुभूति के अलावा शायद एक अजीब तरह का रिश्ता भी जुड़ने लगा था उन के बीच. इसे प्यास लग रही होगी, उस ने सोचा. एक जगह बस रुकते ही आकाश की नजर सामने दुकान पर गई. पानी की 1 लिटर की बोतल उठाते हुए उस ने पूछा, ‘‘कितने की है?’’

‘‘100 रुपए की.’’

‘‘क्या? पानी की बोतल इतनी महंगी?’’

‘‘क्या करें भैया, इस तूफान की वजह से चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं.’’

आकाश ने पानी की बोतल खरीद ली और लड़की को पीने को दी. बाद में थोड़ा पानी उस ने भी पी लिया.

विशाखापटनम बस स्टौप आ चुका था. आकाश ने लड़की को सहारा दे कर नीचे उतारा और रिकशा ढूंढ़ने लगा. बड़ी मुश्किल से एक रिकशा वाला मिला. उस पर बैठ कर वह होटल की तरफ चल पड़ा. रास्ते में वह सोच रहा था कि इसे मां के पास छोड़ दूंगा. गांव में सहारा मिल जाएगा बेचारी को वरना इस अकेली लड़की को देख कोई इस के साथ क्या कर बैठे या कहां पहुंचा दे कुछ कहा नहीं जा सकता और फिर इस के बाबा भी नहीं रहे, घर भी बह गया. हुदहुद तूफान ने इस लड़की की जिंदगी सड़क पर ला कर खड़ी कर दी.

उधर दिशा होटल में बैठी लगातार टीवी समाचार पर नजरें टिकाए बैठी थी, जिस में आ रहा था: ‘चक्रवाती तूफान हुदहुद से प्रभावित आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों का सर्वेक्षण करने और स्थिति का जायजा लेने प्रधानमंत्री विशाखापटनम पहुंचे. गौरतलब है कि इस चक्रवाती तूफान में 24 लोगों की जान गई है और यह तटीय आंध्र प्रदेश में अपने पीछे भारी तबाही के निशान छोड़ गया है.

‘चक्रवात के कारण मची तबाही की दास्तां यह है कि सड़कों पर जड़ों के साथ उखड़े पेड़, बिजली के खंभे और तारें आदि पड़े हैं. चक्रवात के कारण जिले में 15 मौतें हो गईं. स्थिति सामान्य करने के लिए संघर्ष जारी है.’दिशा का मन वैसे ही घबरा रहा था, उस पर हुदहुद के समाचारों से परेशान हो वह कई दफा आकाश को फोन कर चुकी थी. मगर उस से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था. तभी दरवाजे की घंटी बजी.

वह दौड़ती हुई आई और दरवाजा खोला तो सामने खड़े आकाश को देख कर खुशी से उछल पड़ी. मगर यह क्या, बगल में एक सकुचाई, सुंदर सी लड़की. आकाश नेउस का हाथ पकड़ कर बैड पर बैठाया और फिर दिशा की तरफ मुखातिब हुआ. दिशा की आंखों में परेशानी साफ झलक रही थी. न चाहते हुए भी उस के चेहरे पर शिकन की लकीरें आ गई थीं. ‘यह कौन है?’ उस की निगाहों में यही प्रश्न था, जिसे भांपते हुए आकाश ने उसे किनारे लाते हुए कहा, ‘‘ऐक्चुअली, यह सुनीता है. दरअसल, यह तूफान में फंस गई थी. मैं ने इसे बचाया. इस का घर, बाबा, सब तूफान में बह गए. इसलिए मुझे साथ लाना पड़ा.’’

दिशा ने फिर लड़की की तरफ देखा तो उस के चेहरे पर शिकन और बढ़ गई. आकाश की ओर देखती हुई वह बोली, ‘‘तुम दोनों पूरे रास्ते साथ थे?’’

‘‘हां दिशा, मैं इसे अकेला नहीं छोड़ सकता था. यह घबराई हुई थी.’’

दिशा आकाश का हाथ पकड़ती हुई बोली, ‘‘इसे जाने दो. मुझे तो बस इस बात की खुशी है कि तुम सकुशल लौट आए. तुम्हें कुछ हुआ नहीं. सच बहुत डर गई थी मैं,’’ कहती हुई वह आकाश के सीने से लग गई.

आकाश ने प्यार से उसे बांहों में बांधा और बोला, ‘‘रास्ते भर बस तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा.’’

मगर यह क्या, बोलतेबोलते उस की आवाज अटक गई. कहीं वह झूठ तो नहीं बोल रहा, उस ने सोचा.

तभी वह लड़की वहीं बैठेबैठे बोल पड़ी, ‘‘मुझे भूख लग रही है. कल से कुछ नहीं खाया.’’

‘‘मैं अभी कुछ मंगवाता हूं,’’ कहते हुए आकाश ने दिशा का हाथ छोड़ दिया और आगे बढ़ा तो दिशा उसे रोक कर बोली, ‘‘तुम बैठो. मेरे पास खाने की कुछ चीजें पड़ी हैं. अभी ही मंगवाया था उन्हें वही खिला देती हूं. भूख तो तुम्हें भी लगी होगी न? चलो हम दोनों बाहर जा कर कुछ खा लेते हैं.’’

आकाश समझ रहा था कि दिशा उस लड़की के साथ कंफर्टेबल नहीं है. वह उस के साथ अकेले वक्त बिताना चाहती है. उसे खुद भी उस लड़की की उपस्थिति अजीब लग रही थी. इतनी दूर से उस की दिशा सिर्फ उस की खातिर आई है और वह उसे गले भी नहीं लगा पा रहा है.

‘‘चलो,’’ आकाश उठ कर खड़ा हो गया. दिशा ने खाने की चीजें लड़की के आगे रखीं और आकाश के साथ बाहर निकल आई.

‘‘मैं तुम्हारी खातिर अपना कल छोड़ आई हूं आकाश. सिर्फ तुम ही अब मेरा आज, मेरा सब कुछ हो और मैं चाहती हूं कि तुम भी मेरे बन कर रहो,’’ दिशा आकाश की नजरों में झांक रही थी. वह उन आंखों में सिर्फ खुद को देखना चाहती थी.

आकाश ने पलकें झुका लीं. वह दिशा के मन की बेचैनी समझ सकता था.

उस ने दिशा का हाथ थाम कर कहा, ‘‘ऐसा ही होगा.’’ दिशा मुसकराई. पर उस मुसकराहट में संशय साफ नजर आ रहा था. आकाश और दिशा खाते वक्त खामोश थे पर दोनों के मन में तूफान मचा हुआ था. कहां पता था कि हुदहुद का यह तूफान उन के जीवन में भी तूफान ले आएगा.

‘‘बहुत सुंदर है वह लड़की,’’ अचानक दिशा बोल पड़ी.

‘‘तो?’’ आकाश ने अजीब नजरों से उस की तरफ देखा. दिशा का यह रवैया उसे नागवार गुजरा था.

‘‘बस यों ही कह रही हूं,’’ वह मुसकराई, ‘‘मुझे तुम पर पूरा विश्वास है. पर आज क्या यह हमारे साथ ही रहेगी?’’

‘‘हूं. अब क्या करूं, बताओ? अकेला कैसे छोड़ दूं इसे? मैं खुद परेशान हूं. कहां हम अपनी जिंदगी के इतने कठिन मोड़ पर खड़े हैं और कहां यह लड़की इस वक्त हमारी जिंदगी में…’’

‘‘परेशानी बढ़ाने आ गई है.’’ आगे के शब्द दिशा ने पूरे किए तो आकाश मुसकरा कर रह गया.

‘‘चलो इस की बातें छोड़ो. मैं इसे मां के पास छोड़ आऊंगा. वहां घर के काम में मदद कर दिया करेगी या अंकल के यहां छोड़ दूंगा. तुम यह सोचो कि अब आगे क्या करना है. अपने मांबाप को मैं काफी हद तक सहमत कर चुका हूं, इस शादी के लिए. बस तुम्हें देख लेंगे तो बाकी का एतराज भी जाता रहेगा.’’

आकाश ने दिशा का मूड ठीक करने का प्रयास किया तो दिशा के चेहरे पर प्यार की लाली फैल गई. दोनों खापी कर पुन: होटल लौट आए. वह लड़की अब काफी हद तक सामान्य हो चुकी थी.

रात में दोनों लड़कियां बैड पर और आकाश सोफे पर सो गया. अचानक 3-4 बजे के करीब आकाश की आंखें खुलीं तो देखा कि वह लड़की उस के सोफे के कोने पर बैठी है और उठ कर वाशरूम की तरफ जाने की कोशिश कर रही है. मगर पैर में चोट की वजह से ठीक से उठ नहीं पा रही है.

आकाश को उठा देख वह लाचार नजरों से उस की तरफ देखती हुई बोली, ‘‘मैं उधर जा रही थी तो चला नहीं गया, सो…’’

आकाश ने चुपचाप उसे पकड़ कर उठाया और वाशरूम तक ले गया.

इस दौरान दिशा की आंखें भी खुल चुकी थीं. वह इन दोनों को इस तरह साथ देख कर चौंक पड़ी. दिशा को उठा देख आकाश भी सकपका गया. फिर भी उस ने चुपचाप लड़की को बैड पर लिटाया और फिर दिशा की तरफ मुखातिब हुआ. वह करवट बदल कर सोने का उपक्रम करने लगी. आकाश भी आ कर लेट गया.

उधर दिशा रात भर करवटें बदलती रही. उसे नींद नहीं आ रही थी. दिमाग में बस वही दृश्य घूम रहा था, जो उस ने देखा था. आकाश कितने प्यार से उसे थामे हुए था और वह लड़की किन नजरों से उस की तरफ देख रही थी. पहले भी उस ने देखा है कि वह लड़की आकाश को वैसी ही नजरों से देखती है. और फिर वह इतनी खूबसूरत है कि कोई भी पिघल जाए.

दिशा सुबहसुबह उठी और बाहर निकल आई. पार्क में बेचैनी से चहलकदमी करती रही. फिर जब वह थक गई तो वापस कमरे की ओर लौट पड़ी. मगर दरवाजे पर पहुंचते ही उस के पांव ठिठक गए. उस ने परदे के अंदर झांक कर देखा. वह लड़की अभी भी आकाश की तरफ देख रही थी. वह आगे बढ़ती या कुछ सोचती, इस से पहले ही उस लड़की ने आकाश का हाथ पकड़ लिया. आकाश ने मुड़ कर उस की तरफ देखा तो वह पास आ गई और धीरे से बोली, ‘‘आकाश, मैं तुम्हें बहुत प्यार करने लगी हूं. प्लीज मुझे कभी अकेला मत छोड़ना मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहती हूं…’’

दिशा के सीने में आग सी लग गई और मन में तूफान सा मच गया. आकाश भी दो पल के लिए निरुत्तर हो गया. दिशा को लगा अब अंदर जा कर उस लड़की के बाल पकड़ कर खींचती हुई बाहर ले आएगी. तभी लड़की का हाथ आहिस्ता से परे सरकाते हुए आकाश ने दृढ़ शब्दों में कहा, ‘‘मैं दिशा से प्यार करता हूं और सारी जिंदगी उसी का बन कर रहूंगा. जो तुम चाहती हो वह नहीं हो सकता. मगर हां, मैं तुम्हें तकलीफ में अकेला नहीं छोड़ूंगा. तुम मेरी जिम्मेदारी बन गई हो. इसी शहर में मेरे अंकल रहते हैं, जो डाक्टर हैं उन की कोई संतान नहीं. वे वृद्ध हैं और उन की वाइफ बीमार रहती हैं. तुम उन की सेवा कर देना और वे तुम्हें बेटी की तरह प्यार देंगे.’’

लड़की ने कुछ नहीं कहा. बस खामोश नजरों से आकाश की तरफ देखती रही. फिर धीरे से बोली, ‘‘मुझे नहीं पता था कि आप दिशा से प्यार करते हैं. मुझ से बहुत बड़ी गलती हो गई शायद. मगर मैं कभी भी आप को भूल नहीं पाऊंगी. आप मुझे जहां भेजना चाहते हैं, भेज दें. मुझे पूरा विश्वास है आप पर,’’ कह कर वह खामोश हो गई.

इधर दरवाजे पर खड़ी दिशा के लिए अपने आंसुओं को रोक पाना कठिन हो रहा था. वह रोती हुई पार्क की तरफ भाग गई ताकि अपने मन में उठ रहे तूफान पर काबू पा सके. मन के गलियारों में उमड़ताघुमड़ता यह तूफान अब थमता जा रहा था. उसे ऐसा लग रहा था जैसे उस के मन में उठी बेचैन लहरें धीरेधीरे शांत होती जा रही हैं. हुदहुद ने जो तूफान उस की जिंदगी में उठाया था, उसे आकाश की वफा ने एक झटके में प्यार के रंगों से सराबोर कर दिया था. वह पूरी तरह इस तूफान के साए से मुक्त हो चुकी थी. आकाश के प्रति उस का प्रेम और भी गहरा हो गया था.