भारतीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाज राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को हुआ. इस बल्लेबाज की प्रशंसा दुनिया भर में उनके खेलने के अंदाज को लेकर हुई. खासतौर पर टेस्ट क्रिकेट में उन्हें ‘द वौल’ के नाम से जाना गया. उनकी अनेक टेस्ट पारियों ने भारत को जीत दिलवाई. 12 साल की उम्र में क्रिकेट शुरू करने वाले राहुल की बल्लेबाजी में अंत तक स्थायित्व दिखाई पड़ता रहा. उनके 45वें जन्मदिन पर आइए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें.

– कम लोग जानते हैं कि राहुल द्रविड़ ने टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक गेंदों का सामना किया है. टेस्ट की 286 पारियों में उन्होंने 31, 258 गेंदों का सामना किया और 13288 रन बनाए. टेस्ट में सबसे अधिक (210) कैच पकड़ने का रिकौर्ड भी राहुल के नाम है. किसी भी गैर विकेटकीपर द्वारा लिए गए यह सबसे अधिक कैच हैं.

विदेशी पिचों पर राहुल सबसे अधिक सफल बल्लेबाज रहे हैं. 20 जून 1996 को इंग्लैंड के लौर्ड्स में टेस्ट डेब्यू करने वाले राहुल ने 95 रन बनाए थे.

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आधुनिक क्रिकेट में राहुल इकलौते ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने लगातार चार टेस्ट में चार शतक लगाए. उन्होंने 115,148 और 201 रनों की पारी में इंग्लैंड दौरे पर लगाए. इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ मुंबई में राहुल ने शतक लगाया.

राहुल की रक्षात्मक तकनीक के कारण उन्हें ब्रांडेड टेस्ट क्रिकेटर कहा गया. हालांकि, वह वनडे के भी शानदार बल्लेबाज थे. 1999 के वर्ल्ड कप में उन्होंने सबसे ज्यादा 461 रन बनाए. वर्ल्ड कप मैचों में वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज रहे. उनका औसत 61.42 का था, जो सिर्फ विवियन रिचर्ड्स (63.31) से पीछे था.

सबसे लंबी पार्टनरशिप का रिकौर्ड भी भारत में द्रविड़ के नाम है. जनवरी 2006 में राहुल ने वीरेंद्र सहवाग के साथ पाकिस्तान के खिलाफ 410 रनों की पार्टनरशिप की. इसके अलावा राहुल ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ कोलकाता में मार्च 2001 में औस्ट्रेलिया के खिलाफ 376 रनों की पार्टनरशिप की थी. ये साझेदारियां भारत के द्वारा टेस्ट क्रिकेट दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी साझेदारियां थीं.

जब टीम इंडिया किसी विकेटकीपर का खेलना अफोर्ड नहीं कर पा रही थी तो द्रविड़ ने यह भूमिका बखूबी निभाई. वह श्रेष्ठ विकेटकीपर साबित हुए. विकेट कीपर के रूप में द्रविड़ ने 73 एक दिवसीय मैचों में 2300 रन बनाए, जो धोनी के बाद सबसे ज्यादा हैं.

द्रविड़ के ऊपर टेस्ट प्लेयर का तमगा लग चुका था लेकिन उन्होंने एक दिवसीय में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. वह वनडे क्रिकेट में नवें नंबर पर सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी बने. वह तीसरे ऐसे भारतीय बल्लेबाज बने, जिन्होंने वनडे में दस हजार से अधिक रन (10889) रन बनाए.

नवंबर 2003 में द्रविड़ ने न्यूजीलैंड के खिलाफ हैदराबाद में 22 गेंदों पर 50 रन बनाए. यह उस समय अजित अगरकर के बाद दूसरा सबसे तेज अर्धशतक था.

राहुल द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट में भारत के सबसे सफल कप्तान रहे. उनकी कप्तानी में भारत ने लगातार 14 टेस्ट जीते. वनडे में भी उनकी जीत का प्रतिशत 62.16 रहा.

टेस्ट क्रिकेट में तकनीकी रूप से मजबूत और डिफेंस के कारण राहुल को ‘द वौल’ के नाम से जाना गया.

टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद राहुल द्रविड़ इंडिया अंडर 19 और इंडिया ए टीम के कोच बने.

राहुल बचपन में हौकी खेलना चाहते थे. वह कर्नाटक स्टेट जूनियर हौकी टीम के लिए चुने भी गए थे.

राहुल द्रविड़ को अर्जुन अवौर्ड और पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.

2004-05 में एक औनलाइन सर्वे में राहुल द्रविड़ को भारत के सबसे सेक्सी पुरुष का खिताब मिला था.

राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में 1654 चौके लगाए हैं. उनसे अधिक चौके केवल सचिन तेंदुलकर के हैं.