हरियाणा से निकला नारा ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ भले ही राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान  बनाने में कामयाब रहा हो, लेकिन कुछ सिरफिरे इस नारे के मूलतत्त्व की ऐसी धज्जियां उड़ा रहे हैं कि इंसानियत ही नहीं हैवानियत भी शर्म से सिर झुका ले. बेटी के लिए सब कुछ करने वाले मांबाप तक नहीं समझ पाते कि उन्होंने बेटी को बचा कर,उसे पढ़ा कर गुनाह किया या बेटी होना ही उस का गुनाह था. बेटी के मांबाप को जिंदगी भर दर्द और गुस्से का घूंट पीने को मजबूर करने वाले ऐसे दरिंदों को जितनी सजा दी जाए, कम है.

यौवन सब को आता है, लड़कों को भी लड़कियों को भी. यौवन आता है तो निखार भी आता है और सुंदरता भी बढ़ती है. लड़कों को तो इस सब से कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन कई बार लड़कियों के लिए यह सब बहुत भारी पड़ता है. उन्हें इस सब की ऐसी कीमत चुकानी पड़ती है, जिस के बारे में स्वयं लड़की ने तो क्या, किसी ने भी सोचा तक नहीं होता. बांसवाड़ा, राजस्थान की 18 वर्षीया वैशाली के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ. न तो वैशाली को खुद पता था और न उस के मातापिता को कि उस की खूबसूरती पर एक रक्तपिपासु की नजर जमी है.

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बांसवाड़ा की अगरपुरा कालोनी में रहने वाली वैशाली फर्स्ट ईयर की छात्रा थी और अपने परिवार के साथ रहती थी. उस के पिता पिंकेश शर्मा विकलांग हैं. वैशाली के घर के सामने ही जगदीश बंजारा का घर था. कुछ समय तक जगदीश वैशाली का सहपाठी भी रहा था. जब से वैशाली यौवन द्वार पर आ कर खड़ी हुई थी, तभी से जगदीश की नजरें उस पर जम गई थीं. जगदीश और उस का भाई रमेश उसे आतेजाते छेड़ते थे. वैशाली ने इस बात की शिकायत अपने मातापिता से भी की थी. इतना ही नहीं, कालोनी वालों ने भी जगदीश की आए दिन उधमबाजी करने की पुलिस से शिकायत की थी.

जगदीश संभवत: किसी गलतफहमी का शिकार था, यही वजह थी कि वह वैशाली से एकतरफा प्यार करने लगा था. जबकि वैशाली उस से बात तक करने को तैयार नहीं थी.

बुधवार 2 अगस्त, 2017 की दोपहर 12 बजे वैशाली फर्स्ट फ्लोर की बालकनी में बाई के साथ कपड़े सुखा रही थी. उस के पिता पिंकेश शर्मा ऊपर की मंजिल पर थे. तभी सामने के घर में रहने वाला जगदीश दीवार फांद कर आया और उस ने अनायास वैशाली को दबोच लिया. उस ने साथ लाए चाकू से वैशाली की गर्दन पर इतने वार किए कि वह लहूलुहान हो कर गिर पड़ी. जगदीश जैसे आया था, वैसे ही भाग गया. बाई ने शोर मचाया तो पासपड़ोस के लोग भी आ गए और वैशाली के परिवार वाले भी. वैशाली को आननफानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुकी थी.

इस बीच किसी ने फोन कर के इस मामले की सूचना थाना कोतवाली को दे दी थी. कोतवाली पुलिस भी मौकाएवारदात पर पहुंच गई और महिला थाने की पुलिस भी. पूरी जानकारी ले कर पुलिस ने वैशाली के पिता पिंकेश शर्मा की तहरीर पर जगदीश बंजारा के खिलाफ भादंवि की धारा 450 (हथियार ले कर जबरन घर में घुसने), 376, 511 (बलात्कार की कोशिश), हत्या के लिए 302 और 34 के अंतर्गत केस दर्ज कर लिया. इस के साथ ही पुलिस ने जगदीश बंजारा की खोज शुरू कर दी, लेकिन तब तक पूरा बंजारा परिवार फरार हो चुका था.

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वैशाली की हत्या को ले कर पूरी अगरपुरा कालोनी में रोष था. इतना रोष कि लोग बंजारा परिवार के घर को आग लगा देना चाहते थे. गंभीर स्थिति को देखसमझ कर एसपी के आदेश पर बंजारा परिवार के घर पर 7 सशस्त्र सिपाहियों का पहरा बैठा दिया गया था. इस के बावजूद कुछ युवक उस घर को क्षति पहुंचाने के लिए आए तो पुलिस ने उन्हें समझा कर वापस लौटा दिया.

काफी भागदौड़ के बाद सिपाही इंद्रजीत सिंह और लोकेंद्र सिंह ने जैसेतैसे 3 अगस्त को जगदीश बंजारा को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर उस से काफी पूछताछ की गई, लेकिन उस ने मुंह नहीं खोला. आखिर इतना बड़ा अपराध कर के वह कब तक चुप रह सकता था. 4 अगस्त को उसे मुंह खोलना ही पड़ा. पुलिस से उस ने केवल इतना ही कहा, ‘‘मैं वैशाली से प्यार करता था. वह मेरी बनने को तैयार नहीं थी, फिर मैं उसे किसी और की कैसे होने दे सकता था? इसलिए मैं ने उसे मार डाला.’’

मृतका वैशाली के पिता पिंकेश शर्मा चाहते थे कि इस ममले की जांच महिला थाने के सीआई देवीलाल करें. इस के लिए वह एसपी से मिले.

एसपी ने केस की जांच सीआई देवीलाल को सौंप दी. पुलिस जगदीश बंजारा को जेल भेज चुकी है. केस की जांच सीआई देवीलाल कर रहे हैं, जगदीश बंजारा को पकड़ने वाले सिपाही इंद्रजीत सिंह और लोकेंद्र सिंह को पुलिस विभाग ने सम्मानित किया है.

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