उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के भोलानगर की रहने वाली सकीना का बेटा जब सरकारी राशन की दुकान पर गया तो कोटेदार ने उस से कहा कि जब तक कार्डधारक सकीना नहीं आएगी और यहां पर बायोमीट्रिक मशीन में उस की उंगली का निशान नहीं लगेगा तब तब राशन नहीं मिलेगा.

सकीना की तबीयत ठीक नहीं थी. भूख से तड़पती मां को बेटा राशन की दुकान तक नहीं ला सका तो उसे राशन नहीं मिला.

बेटे को कई महीने से राशन नहीं दिया जा रहा था क्योंकि उस की मां का राशनकार्ड उंगली के निशान के साथ आधार कार्ड से लिंक नहीं हो पाया था. ऐसे में बीमार सकीना को किसी न किसी तरह से राशन की दुकान पर जाना होता है.

यह बात केवल सकीना की नहीं है, बल्कि गांवदेहात में तमाम ऐसी औरतें और मर्द हैं जो राशन लेने खुद राशन की दुकान तक नहीं जा पाते हैं. ऐसे में उन को राशन नहीं मिल पाता.

राशनकार्ड घर के मुखिया के नाम पर ही बनता है. ज्यादातर घरों के मुखिया बूढ़े होते हैं. वे ज्यादातर बीमार भी रहते हैं, चलनेफिरने में लाचार होते हैं. कई बार तो उन की उंगलियों की चमड़ी इतनी खराब हो जाती है कि बायोमीट्रिक मशीन तक में फिंगर प्रिंट मैच नहीं करते हैं. ऐसे में आधार कार्ड और बायोमीट्रिक मशीन उन के लिए मुसीबत बन गई है.

उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और कुछ पहाड़ी इलाकों में यह परेशानी ज्यादा है. यहां राशन की दुकानें दूर हैं. रास्ता अच्छा नहीं होता. ऐसे में बीमार बूढ़े आदमी को ले कर राशन लेने जाना आसान नहीं होता है. अगर किसी और वजह से भी बायोमीट्रिक मशीन में फिंगर प्रिंट मैच नहीं होता तब भी राशन नहीं मिलता है.

सरकार ने यह आदेश जारी कर दिया है कि बिना आधार कार्ड से लिंक वाले राशनकार्ड के धारक को राशन नहीं मिलेगा.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शहरी इलाके में राशन की 682 दुकानें हैं और गांवदेहात के इलाकों में राशन की 525 दुकानें हैं. इन दुकानों में तकरीबन 7 लाख, 50 हजार लोगों को राशन दिया जाता है. 2 रुपए प्रति किलोग्राम गेहूं व 3 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बाकी चीजें दी जाती हैं.

एक सरकारी आदेश के मुताबिक, राशनकार्ड में दर्ज हर सदस्य के नाम के साथ आधार कार्ड लिंक होना जरूरी है. अगर किसी सदस्य का नाम आधार कार्ड से लिंक नहीं है तो उस कार्ड पर राशन नहीं मिलेगा. सरकार ने अप्रैल महीने से पहले इस काम को पूरा करने का टारगेट रखा है.

इस टारगेट को तय समय में पूरा कर लिया जाएगा, ऐसा मुश्किल लगता है. गरीब और गांव में रहने वाली जनता को इस की ज्यादा जानकारी नहीं है. आधार कार्ड को लिंक कराने और बाद में बायोमीट्रिक मशीन को चलाने के लिए साधन नहीं हैं. इंटरनैट की स्पीड का बुरा हाल है. बहुत सी जगहों पर बिजली की समस्या है.

सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन को पारदर्शी बनाने के लिए यह फैसला लिया जा रहा है जिस के तहत 1 अप्रैल, 2018 से बिना आधार कार्ड से लिंक वाले राशनकार्ड के धारक को राशन नहीं मिलेगा.

तेजी में सरकार

एक तरफ आधार योजना की वैधता को ले कर सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता में 5 जजों की संविधान पीठ सुनवाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार आधार कार्ड को ले कर तेजी में है. वह स्कूल में बच्चों के दाखिले से ले कर खाने के लिए राशन तक में आधार कार्ड को जरूरी बनाती जा रही है. सरकार को अदालत के फैसले तक का इंतजार नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील श्याम दीवान ने कहा कि सरकार आधार कार्ड से चाबी अपने हाथ में ले रही है. इस से सिविल डैथ के हालात बनेंगे. बुनियादी सुविधाओं को आधार कार्ड से लिंक  किया गया है. बिना इस के कोई समाज में नहीं रह सकता है. यह लोगों की निजता को खत्म कर रहा है. क्या भारत का संविधान इस बात की इजाजत देता है कि लोगों की हर गतिविधि रिकौर्ड पर हो?

इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए आधार कार्ड को जरूरी बनाया गया है. मोबाइल फोन को आधार कार्ड से लिंक करना जरूरी है. इसी तरह से बैंक खाता खोलने, बीमा पौलिसी लेने, म्यूचुअल फंड जैसी बचत योजनाओं के लिए आधार कार्ड को जरूरी बना दिया गया है.

देश में अभी भी बहुत सारे लोग, जिन में मजदूर, कामगार खास हैं, के आधार कार्ड नहीं बने हैं. आधार कार्ड में फिंगर प्रिंट को ले कर भी कई परेशानियां सामने आ रही हैं.

आधार कार्ड बनाने वाली संस्था यूआईडीएआई द्वारा आधार कार्ड के लिए सभी लोगों की दसों उंगलियों के फिंगर प्रिंट समेत तमाम डेटा लिया जाता है. कई बार फिंगर प्रिंट से 100 फ ीसदी मिलान नहीं होता है. ऐसे में लोग अपने जायज हकों से महरूम रह जाते हैं.

परेशानी की बात यह है कि आधार होने के बाद भी सरकार इस को महफूज नहीं रख पा रही है. आधार कार्ड से लिंक होने के बाद भी लोगों को दूसरे सर्टिफिकेट लेने पड़ रहे हैं.

उदाहरण के लिए अगर आप बैंक खाता खुलवाने जा रहे हैं तो आधार कार्ड होने के बाद भी आप को अपने घर के पते का सर्टिफिकेट देना होता है. आधार कार्ड के फिंगर प्रिंट मिलान को ले कर परेशानी वाली बात यह है कि 15 साल तक की उम्र और 60 साल से ज्यादा की उम्र के लोगों के फिंगर प्रिंट मैच नहीं करते हैं. सरकार चाहती है कि 31 मार्च तक हर योजना में आधार लिंक हो जाए जो पूरी तरह से मुमकिन नहीं लग रहा. अदालत में सुनवाई के पूरा होने का सरकार इंतजार नहीं करना चाहती.

झमेला बना आधार कार्ड

वैसे तो आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला एक पहचानपत्र है पर सरकार ने जिस तरह से आधार कार्ड का इस्तेमाल हर जगह करना शुरू किया है उस से यह आम नागरिकों के अधिकारों का हनन करता नजर आ रहा है. आधार कार्ड को ले कर सरकार की जबरदस्ती है कि वह बैंक खाते से ले कर राशनकार्ड तक आधार कार्ड को जोड़ रही है.

सरकार का काम जनता को सहूलियत देना है, जबकि आधार कार्ड के जरीए वह जनता के सामने तमाम तरह की मुश्किलें खड़ी करती जा रही है. जनता को यह बताया जा रहा है कि इस से भ्रष्टाचार रुकेगा जिस से महंगाई कम होगी.

आधार कार्ड का सब से अधिक इस्तेमाल रसोई गैस में किया गया. रसोई गैस के आधार कार्ड से लिंक होने का जनता को क्या फायदा मिला?

आधार कार्ड से रसोई गैस के लिंक होने की योजना के बाद अगर रसोई गैस की कालाबाजारी रुक गई होती तो रसोई गैस के दाम कम होने चाहिए थे. रसोई गैस के दामों में किसी भी तरह की कमी नहीं आई है. आज भी गैस सिलैंडरों की कालाबाजारी हो रही है. आधार कार्ड के रसोई गैस कनैक्शन से लिंक होने का क्या फायदा मिला?

कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने आधार को ले कर राजग सरकार पर हमला करते हुए कहा है, ‘‘आधार योजना को ले कर सरकार नागरिकों को कमजोर बनाने में लगी हुई है. आधार सरकार का हथियार बन गया है.’’

पहचानपत्र की मारामारी

आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचानपत्र है. इस में 12 नंबर की संख्या छपी होती है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण जारी करता है. यह संख्या भारत में कहीं भी उस शख्स की पहचान और पते का सुबूत होती है.

भारत का रहने वाला हर नागरिक इस कार्ड को बनवा सकता है. इस में हर शख्स केवल एक बार ही अपना नामांकन करा सकता है. यह कार्ड सरकार द्वारा बिना पैसे लिए बनाया जाता है.

कानूनी रूप से आधार कार्ड एक पहचान मात्र है. यह भारत की नागरिकता का प्रमाणपत्र भी नहीं है. इस के बाद भी यह जिस तरह से आधार कार्ड को ले कर सरकार जनता पर दबाव बना रही है, वह जबरदस्ती जैसा है.

मतदाता पहचानपत्र की जगह आधार कार्ड को मान्यता देने का काम खतरनाक है. जनता के पास कई तरह के पहचानपत्र हैं. इन में राशनकार्ड, ड्राइविंग लाइसैंस, केंद्र सरकार के कर्मचारी का परिचयपत्र प्रमुख हैं. अब सरकार आधार कार्ड को पहचानपत्र से भी ऊपर रख रही है.

आधार कार्ड को खास बनाने के लिए सरकार ने उस को रसोई गैस, पैन नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता नंबर से जोड़ने का काम किया है. बिना आधार कार्ड के इनकम टैक्स की रिटर्न दाखिल नहीं हो रही है. इस के साथ ही जमीनजायदाद की खरीदफरोख्त में रजिस्ट्री के समय भी आधार कार्ड जरूरी किया जा रहा है.

जायदाद और बैंक से आधार कार्ड के जुड़ने से जनता की डोर सरकार के हाथों में चली जा रही है. इस से एक जंजीर बन रही है. यह जंजीर जनता के लिए ऐसी हथकड़ी बनती जा रही है जिसे वह खुद अपने गले में डालने को मजबूर है.

दरअसल, वोट देने के सिस्टम में सरकार कोई सुधार नहीं करना चाहती. सरकार को पता है कि वोटर कार्ड में सुधार से फर्जी वोटिंग रुक सकती है जो नेताओं के फायदे की बात नहीं है. सरकार सुधार के सारे काम जनता के लिए करना चाहती है. जनता से पाईपाई का हिसाब मांगने वाली सरकार खुद को ऐसी जवाबदेही से मुक्त रखना चाहती है.

निजी जानकारी को खतरा

पहले बैंक खाता, पैन कार्ड को आधार कार्ड से लिंक करने के बाद अब मोबाइल नंबर को आधार नंबर से लिंक किया जाएगा. सरकार ने फरवरी, 2018 तक इस काम को पूरा करने का टारगेट रखा है.

असल में सरकार जनता को यह बता रही है कि मोबाइल फोन के आधार से लिंक होने से फर्जी मोबाइल नंबर बंद हो जाएंगे, जिस से तमाम तरह के अपराध खत्म हो जाएंगे. आधार कार्ड बैंक और पैन नंबर से लिंक है. साथ में खाताधारक की निजी जानकारी उस में है. ऐसे में अपराधियों के लिए बैंक के खाते से पैसा निकालने के लिए मोबाइल फोन पर ओटीपी कोड हासिल करना आसान हो जाएगा, जिस से बैंक से पैसा बहुत आराम से निकल जाएगा और खाताधारक को पता ही नहीं चलेगा.

यही नहीं, किसी साइबर अपराधी को किसी आदमी का केवल आधार नंबर मिल जाए तो वह उस की पूरी निजी जानकारी हासिल कर सकता है.

जनता को आधार कार्ड के फायदा बताने के लिए सरकार कहती है कि आधार कार्ड जिंदगीभर की पहचान है. आधार कार्ड को हर सब्सिडी के लिए जरूरी बना दिया गया है.

यही नहीं, सरकार ने तमाम तरह के कंपीटिशन के लिए फार्म भरने से ले कर मार्कशीट तक में इस को जोड़ा जा रहा है. ट्रेन में टिकट में छूट पाने के लिए आधार का ही सहारा है. अब यह जन्म प्रमाणपत्र से ले कर मृत्यु प्रमाणपत्र तक में जरूरी हो गया है. रिटायर होने वाले मुलाजिमों के लिए पीएफ लेने में यह जरूरी हो गया है. सरकार ने जिस तरह से आधार कार्ड का महिमामंडन किया है उस से यह उपयोगी कम और सिरदर्द ज्यादा बन गया है.

अपराधियों के घेरे में आधार

उत्तर प्रदेश की स्पैशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफने कानपुर में ऐसे गिरोह को पकड़ा जो आधार कार्ड बनाने वाली संस्था यूआईडीएआई के सर्वर में सेंधमारी कर के आधार कार्ड बनाता था. इन लोगों ने एक ऐसा सौफ्टवेयर बना लिया था जो इस काम में मदद करता था.

यूआईडीएआई के डिप्टी डायरैक्टर ने इस बात की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी. पुलिस को जांच में पता चला कि यह काम कानपुर की विश्व बैंक कालोनी में रहने वाले सौरभ सिंह और उस के साथियों द्वारा अंजाम दिया जा रहा है.

विश्व बैंक कालोनी, कानपुर जिले के बर्रा थाना क्षेत्र में आती है. पुलिस ने 9 सितंबर, 2017 को सौरभ को पकड़ा तो उस ने अपने पूरे गिरोह का खुलासा किया, जिस के आधार पर पुलिस ने 10 और लोगों का पकड़ा.

इन में शुभम सिंह, सत्येंद्र, तुलसीराम, कुलदीप, चमन गुप्ता और गुड्डू गोंड शामिल थे. ये लोग कानपुर, फतेहपुर, मैनपुरी, प्रतापगढ़, हरदोई और आजमगढ़ के रहने वाले हैं.  ये लोग यूआईडीएआई के बायोमीट्रिक मानकों को बाईपास कर के फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम करते थे.

एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि आधार कार्ड बनाने वाले गिरोह के सदस्य बायोमीट्रिक डिवाइस से औथराइज्ड औपरेटर से फिंगर प्रिंट ले लेते थे. उस के बाद बटर पेपर पर लेजर से प्रिंट आउट निकालते थे और क्लोन फिंगर प्रिंट निकालते थे.

इस क्लोन फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल कर के आधार कार्ड की वैबसाइड पर लौगइन कर के इनरोलमैंट की प्रक्रिया की जाती थी. जब हैकरों द्वारा क्लोन फिंगर प्रिंट बनाए जाने लगे तो यूआईडीएआई ने फिंगर प्रिंट के साथ ही साथ आईआरआईएस यानी रैटिना स्कैनर को भी प्रोसैस का हिस्सा बना दिया. तब गिरोह ने इस के भी क्लाइंट एप्लीकेशन बना दिए जिस से फिंगर प्रिंट और आईआरआईएस दोनों को बाईपास करने में कामयाबी मिल गई. यह सौफ्टवेयर 5-5 हजार रुपए में बेचा जाने लगा. इस तरह एक औपरेटर की आईडी पर कई मशीनें काम करने लगीं.

इस गिरोह के पास से पुलिस को 11 लैपटौप, 12 मोबाइल फोन, 18 फर्जी आधार कार्ड, 46 फर्जी फिंगर प्रिंट, 2 फिंगर प्रिंट स्कैनर, 2 रैटिना स्कैनर और साथ में आधार कार्ड बनाने वाला दूसरा सामान भी मिला.

यूआईडीएआई से मिली जानकारी के मुताबिक, पूरे देश में तकरीबन 81 लाख आधार कार्ड खत्म किए गए हैं. सरकार जिस आधार कार्ड पर भरोसा कर के देश की हर बीमारी का हल तलाश रही है वही आधार कार्ड इतनी बड़ी तादाद में फर्जी निकल रहे हैं.

VIDEO : नेल आर्ट

ऐसे ही वीडियो देखने के लिए यहां क्लिक कर SUBSCRIBE करें गृहशोभा का YouTube चैनल.

Tags: