दिल्ली में छतरपुर स्थित शनिधाम मंदिर के संस्थापक मदनलाल मेघवाल उर्फ दाती महाराज उर्फ मदनलाल राजस्थानी एक युवती के यौनशोषण के आरोपों से घिरे

हुए हैं. टीवी चैनलों पर ‘शनि शत्रु नहीं मित्र’ का स्लोगन दे कर पिछले करीब 15 साल से ज्यादा समय से दिल्ली ही नहीं पूरे देश में अपने आभामंडल का प्रभाव फैला कर ख्याति पाने वाले दाती महाराज के खिलाफ एक युवती ने जून के पहले सप्ताह में दिल्ली के फतेहपुर बेरी पुलिस थाने में शिकायत दी. इस शिकायत का मजमून इस प्रकार था—

मदनलाल राजस्थानी ने अपने सहयोगियों श्रद्धा उर्फ नीतू, अशोक, अर्जुन आदि के साथ मिल कर 9 जनवरी, 2016 को दिल्ली स्थित आश्रम श्री शनि तीर्थ असोला फतेहपुर बेरी में मेरे साथ दुष्कर्म किया. यह तब हुआ, जब मुझे श्रद्धा उर्फ नीतू ‘चरण सेवा’ के लिए दाती मदनलाल राजस्थानी के पास ले गई. मैं चीखती रही, लेकिन किसी ने मेरी आवाज नहीं सुनी.

इस के बाद 26 से 28 मार्च, 2016 तक राजस्थान के पाली जिले में सोजत शहर स्थित आश्रम में दाती महाराज ने फिर मुझ से वही सब किया, जो दिल्ली के आश्रम में किया था. इस में अनिल और श्रद्धा ने दाती महाराज का साथ दिया. इन 3 दिनों में अनिल ने भी वही सब किया. चरण सेवा के नाम पर इन लोगों ने मेरे शरीर को जानवरों की तरह रौंदा.

इस घृणित कार्य के दौरान श्रद्धा ने कहा कि इस से तुम्हें मोक्ष प्राप्त होगा, यह भी सेवा ही है. तुम बाबा की हो और बाबा तुम्हारे. तुम कोई नया काम नहीं कर रही हो, सब करते आए हैं. कल हमारी बारी थी, आज तुम्हारी बारी है. कल न जाने किस की बारी होगी, बाबा समंदर है और हम सब उस की मछलियां हैं. इसे कर्ज समझ कर चुका दो.

ये 3 रातें मेरी जिंदगी की सब से भयानक रातें थीं. इन 3 रातों में मेरे साथ न जाने कितनी बार दुष्कर्म किया गया. यह सब करते हुए दाती महाराज ने एक बात कही, ‘‘तुम्हारी सेवा पूरी हुई.’’

इस घटना के बाद मेरी सोचनेसमझने की शक्ति जैसे खत्म हो गई थी. घुटघुट कर जीने से अच्छा है कि एक बार लड़ कर मरूं ताकि इस राक्षस की सच्चाई सब के सामने ला सकूं. न जाने कितनी ही लड़कियां यहां मेरी तरह बेबस और लाचार हैं.

मुझे नहीं पता कि इस शिकायत के बाद मेरा क्या होगा. शायद मैं आप लोगों के बीच न रहूं, पर मेरी पुकार आप सभी के बीच रहेगी. सिर्फ इसी उम्मीद के सहारे ये पत्र लिख रही हूं. शायद मुझे न्याय मिले और दूसरी लड़कियों की जिंदगियां बरबाद होने से बच सके. दाती महाराज को जीने का अधिकार नहीं है.

मेरी एक ही इच्छा है कि इस के कर्मों की सजा फांसी होनी चाहिए. आप से प्रार्थना है कि मेरा नाम, मेरी पहचान और मेरा पता गुप्त रखा जाए. वरना उस के द्वारा दी गई धमकियां ‘न तू रहेगी न तेरा अस्तित्व’ सच हो जाएगी. इन्हीं धमकियों की वजह से आज तक मैं चुप रही.

मुझे और मेरे परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए. अगर मुझे सुरक्षा नहीं दी गई तो यह तय है कि न मैं रहूंगी और न मेरा परिवार. सब खत्म हो जाएगा. दाती महाराज बहुत खतरनाक आदमी है. अब तक इसलिए चुप रही कि मुझे नहीं लगता था कि मेरा कोई साथ देगा लेकिन अब बरदाश्त के बाहर हो गया तो इस बारे में अपने मम्मीपापा को बताया. उन्होंने वचन दिया कि आखिरी सांस तक तुम्हारा साथ देंगे.

दाती महाराज के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

युवती की इस शिकायत पर दिल्ली के फतेहपुर बेरी पुलिस थाने में 10 जून, 2018 को दाती महाराज उर्फ मदनलाल राजस्थानी और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया. इस में दुष्कर्म की धारा 376, अप्राकृतिक संबंध की धारा 377, छेड़छाड़ की धारा 354 और धमकी देने की धारा 506 लगाई गई.

पुलिस ने इस मामले में दाती महाराज के अलावा 2 महिलाओं और 2 पुरुषों को नामजद किया. इन में एक महिला श्रद्धा उर्फ नीतू और दूसरी नीमा जोशी शामिल थीं. 2 पुरुष दाती महाराज के भाई हैं.

आमतौर पर टीवी चैनलों पर छाए रहने वाले और दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित शनिधाम मंदिर के संस्थापक दाती महाराज कौन हैं, यह जानने के लिए हमें राजस्थान से शुरुआत करनी होगी.

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दाती महाराज का असली नाम मदनलाल मेघवाल है. मदनलाल का जन्म 10 जुलाई 1950 को राजस्थान के पाली जिले के आलावास गांव में हुआ था. उस के पिता देवाराम मेघवाल ढोलक बजाने का काम करते थे. मदनलाल के जन्म के कुछ महीने बाद ही उस की मां का निधन हो गया था. पिता ने दूसरी शादी कर ली. इस के बाद गांव के एक आदमी के साथ मदनलाल दिल्ली आ गया था.

दिल्ली में उस ने कई दिनों तक दिहाड़ी मजदूरी की. फिर चाय की दुकानों पर छोटामोटा काम किया. इस के बाद वह टेंट की दुकान पर काम करने लगा. अपना खुद का काम करने के लिए उस ने कैटरिंग का काम सीखा और बर्थडे एवं छोटीमोटी अन्य पार्टियों में कैटरिंग करने लगा.

1996 में मदन की मुलाकात राजस्थान के एक ज्योतिषी से हुई. उस ज्योतिषी से उस ने जन्मपत्री और कुंडली वगैरह देखना सीख ली. इस के बाद मदनलाल ने कैटरिंग का काम छोड़ कर दिल्ली की कैलाश कालोनी में ज्योतिष केंद्र खोल लिया. साथ ही उस ने अपना नाम मदनलाल से बदल कर दाती महाराज कर लिया. उस ने अपना हुलिया और चोला भी बदल लिया था.

मदनलाल ने लोगों की कमजोर नस पकड़ी और अपना ज्योतिष ज्ञान शनि ग्रह के आसपास कें्रदित रखा. ऐसा इसलिए कि धर्मभीरु लोग सब से ज्यादा शनि से ही घबराते हैं. दाती महाराज लोगों की जन्मपत्री देख कर शनि की चाल का खौफ दिखाने लगा. साथ ही शनि के खौफ से बचने के ऐसे उपाय भी बताने लगा, जिस से उसे लाभ हो.

सन 1998 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने थे. इस दौरान एक नेता की जन्मपत्री देख कर दाती ने कह दिया कि वह चुनाव जीत जाएगा. परिस्थितियां ऐसी बनीं कि वह नेता चुनाव जीत गया. इस खुशी में उस नेता ने फतेहपुर बेरी के अपने पुश्तैनी मंदिर का काम दाती मदनलाल को सौंप दिया.

बस फिर क्या था दाती महाराज के सितारे चमक उठे. वह राजनीतिक और कई तरह की भविष्यवाणी करने लगा. संयोग ऐसा रहा कि उन में से कुछ भविष्यवाणियां सच हो गईं. इस से दाती महाराज चर्चा में रहने लगा और उस की पूछ बढ़ गई.

न्यूज चैनलों के माध्यम से टीवी तक पहुंचे दाती महाराज

इस बीच दाती महाराज ने फतेहपुर बेरी में नेताजी द्वारा दिए गए मंदिर में शनिधाम मंदिर की स्थापना कर दी थी. मंदिर में आश्रम भी बना लिया था. साथ ही पाली के आलावास गांव से अपने 3 सौतेले भाइयों अशोक, अर्जुन और अनिल को भी दिल्ली बुला लिया था. आरोप है कि दाती ने अपने भाइयों व अन्य सहयोगियों के साथ मिल कर शनिधाम मंदिर के आसपास की जमीनों पर कब्जा कर लिया. दाती के सारे कामकाज, दिल्ली व पाली स्थित आश्रम, कालेज व अस्पताल का प्रबंधन तीनों सौतेले भाई देखते थे. वे ही रुपएपैसे का भी हिसाबकिताब रखते थे.

दाती महाराज के सितारे बुलंदी पर पहुंच गए तो उस ने टीवी चैनलों पर ‘शनि शत्रु नहीं मित्र है’ के नाम से कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू करवा दिया. साथ ही दाती ने खुद का यूट्यूब चैनल भी शुरू किया. टीवी कार्यक्रमों के जरिए दाती देश भर में मशहूर हो गया. वह शनि महाराज के नाम से ही पहचाना जाने लगा.

सांवला रंग, माथे पर तिलक, सिर पर लंबे बाल, चेहरे पर संवरी हुई काली दाढ़ी के बीच ठोढ़ी पर सफेद रंग और गले में रुद्राक्ष की माला, यही पहचान बनी दाती महाराज की. दाती महाराज केवल शनि ग्रह को शांत रखने के उपाय बताता था. दरअसल, ग्रहनक्षत्रों में केवल शनि ही ऐसा ग्रह है, जो सब से ज्यादा समय तक मानव जीवन को प्रभावित करता है.

मिली महामंडलेश्वर की उपाधि

कहा जाता है कि शनि के प्रभाव से इंसान रंक से राजा और राजा से रंक बन सकता है. दाती ने शनि ग्रह को भुनाने की कोशिश की और इसी के मद्देनजर अपने संस्थान का नाम शनिधाम रखा, जहां वह केवल शनि ग्रह पर ही चर्चा करता था.

सन 2010 में हरिद्वार में आयोजित महाकुंभ में श्री पंचायती महानिर्वाण अखाड़े की ओर से दाती महाराज को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई. इस के बाद उस ने अपना नाम श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती महाराज रख लिया. इस से पहले दाती महाराज दिल्ली के छतरपुर इलाके के फतेहपुर बेरी में शनिधाम मंदिर का निर्माण करा चुके थे.

इस मंदिर को उस ने श्री सिद्ध शक्तिपीठ शनिधाम पीठाधीश्वर नाम दिया. मंदिर में 2003 में शनिदेव की प्रतिमा स्थापित की गई. इस मंदिर में बने आश्रम में अस्पताल, गौशाला व अनाथालय भी हैं. बाद में दाती ने पाली के आलावास गांव में भी आश्रम बनवाया. इस के अलावा उन्होंने उज्जैन में भी अपने आश्रम की स्थापना की.

दुष्कर्म के मामले में जिस महिला श्रद्धा को भी आरोपी बनाया गया है, वह दिल्ली और पाली के आश्रम का कामकाज संभालती थी. ट्रस्ट में दाती महाराज के बाद दूसरे नंबर का स्थान श्रद्धा का ही था.

दाती महाराज के तमाम प्रमुख राजनेताओं और नौकरशाहों से संबंध हैं. उन्होंने कई प्रमुख नेताओं के साथ अपनी फोटो के फ्लैक्स आश्रम सहित पूरी दिल्ली में लगवा रखे थे. इन के जरिए वह अपना राजनीतिक रसूख दिखाते थे. फतेहपुर बेरी स्थित आश्रम पर शनि अमावस्या पर होने वाले कार्यक्रम में देश भर से कई प्रमुख नेता और दिग्गज हस्तियां आती थीं. बेटियों का जन्मदिन मनाने, अनाथ बेटियों की शादी करवाने और कंबल बांटने जैसे कामों से दाती महाराज ने सुर्खियां बटोरीं.

डरी हुई थी पीडि़ता

अब बात करते हैं पीडि़ता की. मूलरूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली यह लड़की आजकल दिल्ली में अपने परिवार के साथ रहती है. उस के परिवार में मातापिता, 2 बहनें और एक भाई है. दोनों बहनों की शादी हो चुकी है.

करीब 25 साल की पीडि़ता दाती महाराज के उपदेश सुनने नियमित तौर पर उन के आश्रम जाती थी. दाती के एक सहयोगी ने उस की मुलाकात दाती से कराई. इस के बाद 2007 से 2016 तक वह सेवादार के तौर पर दाती के आश्रम में रही. उस ने दाती के आश्रम के सहयोग से अजमेर से एमसीए किया था.

बाद में वह अपने परिवार के साथ रहने लगी थी. लेकिन इस बीच उस का आश्रम में आनाजाना लगा रहा. इसी दौरान फरवरी 2016 में पहली बार दिल्ली के शनि मंदिर में उस से दुष्कर्म किया गया. फिर मार्च 2016 में उसे राजस्थान के पाली ले जा कर दुष्कर्म किया गया.

पीडि़ता का कहना है कि दाती महाराज ने उसे पुलिस में शिकायत नहीं करने के लिए धमकाया था. युवती ने पुलिस को बताया कि डर के मारे वह इतने समय तक चुप रही. परिवार की बदनामी का भी डर था.

पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने पर दाती महाराज ने कहा कि उन्हें बदनाम करने की साजिश के तहत उन के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया है. दाती ने दावा किया कि पीडि़ता अपनी 2 अन्य बहनों के साथ आश्रम में रहती थी. वह खुद 2 साल पहले अपनी मरजी से आश्रम छोड़ने से पहले खुद शपथपत्र दे कर गई थी.

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कुछ लोगों ने इस लड़की और उस के पिता को प्रलोभन दिया, जिस से ये लोग मुझ पर आरोप लगाने को तैयार हो गए. दाती का कहना था कि 2015 में अभिषेक नाम का आदमी शनिधाम में आता था.

उस ने सेवादारों से मेलमिलाप बढ़ाया. इस में कई लोग शामिल थे, इन्होंने पैसे का लेनदेन किया. विवाद होने पर अभिषेक ने उन्हें बताया कि उस ने सारा पैसा दाती महाराज को दिया है. दाती ने कहा कि अभिषेक ने उन्हें कोई पैसा नहीं दिया. इस के बाद उन लोगों ने यह साजिश रची.

पुलिस में रिपोर्ट दर्ज होने पर दाती महाराज गायब हो गए. वह बिना किसी को बताए दिल्ली छोड़ कर राजस्थान के पाली स्थित अपने आश्रम में चले गए.

आश्रम में पुलिस की काररवाई

इस के दूसरे दिन 11 जून को पीडि़ता ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई. पीडि़ता से मुलाकात के बाद स्वाति ने ट्वीट कर कहा कि पीडि़ता गहरे सदमे में है. साथ ही उस की जान को खतरा भी है. इसलिए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर तत्काल उसे सुरक्षा मुहैया कराने और दाती महाराज को गिरफ्तार करने को कहा गया है. पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल में पीडि़ता की मैडिकल जांच कराई.

पुलिस ने 12 जून को पीडि़ता के साकेत कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए. इस में पीडि़ता ने बताया कि 9 फरवरी, 2016 को दाती की सेवादार श्रद्धा उसे असोला स्थित शनिधाम आश्रम में चरण सेवा के लिए दाती के पास ले गई. मुझे गुफानुमा अंधेरे कमरे में सफेद रंग के कपड़े पहना कर भेजा गया. वहां दाती ने कहा, ‘मैं तुम्हारा प्रभु हूं. इधरउधर क्यों भटकना. मैं सब वासना खत्म कर दूंगा.’

फिर दाती व उस के सहयोगियों ने मेरे साथ दुष्कर्म किया. मार्च में पाली में यही कहानी दोहराई गई.

दाती महाराज ने 12 जून को विभिन्न समाचार चैनलों को मोबाइल से वीडियो बना कर भेजा और खुद पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए पुलिस जांच में शामिल होने की बात कही. उन्होंने कहा कि वह फरार नहीं है.

इसी दिन पाली जिले के आलावास स्थित आश्रम की निदेशिका श्रद्धा ने दावा किया कि बाबा पाली स्थित आश्रम में हैं. फिलहाल पुलिस ने उन से कोई संपर्क नहीं किया है. जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा.

मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण दिल्ली के पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने इस मामले की जांच 12 जून को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी. इसी के साथ पुलिस ने पीडि़ता और उस के परिवार को जान का खतरा देखते हुए सुरक्षा मुहैया करा दी.

दाती ने दावा किया कि वह फरार नहीं है

13 जून को दाती महाराज पाली जिले के आलावास स्थित श्री आश्वासन बालग्राम में दिन भर रहे. इस दौरान वह साधकों और मीडियाकर्मियों से मिलते रहे. मीडिया के समक्ष उन्होंने फिर दोहराया कि वह निर्दोष है. उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है.

दाती महाराज पर यौनशोषण का आरोप लगने के बाद पाली जिले में सोजत रोड पर स्थित आलावास आश्रम में रहने वाली 500 से ज्यादा बच्चियों के घरवाले वहां पहुंचने लगे. ये लोग अपनी बच्चियों की खैरखबर लेने आए थे.

14 जून को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सर्चवारंट ले कर असोला स्थित शनिधाम मंदिर पर छापा मारा. इस दौरान पीडि़ता भी पुलिस दल के साथ मौजूद रही. पुलिस ने पीडि़ता के साथ उस जगह की पहचान की, जहां उस से दुष्कर्म किया गया था. सर्च अभियान के दौरान क्राइम ब्रांच टीम ने मंदिर में सेवादारों सहित अन्य लोगों से पूछताछ की और सबूत जुटाए. पुलिस ने कहा कि बाबा की गिरफ्तारी को ले कर कोई जल्दबाजी नहीं है. पहली कोशिश पर्याप्त सबूत जुटाने की है, ताकि बाद में अदालत में केस कमजोर न पड़े.

दुष्कर्म के आरोपों में फंसने पर दाती के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए 14 जून को दिल्ली पुलिस ने दाती का लुकआउट नोटिस जारी कर दिया. साथ ही सभी हवाईअड्डों को दाती के मामले की सूचना दे दी गई. एयरपोर्ट अथौरिटी से कहा गया कि दाती विदेश जाते हैं तो पहले दिल्ली पुलिस को सूचना दी जाए.

इस बीच दाती महाराज ने आलावास आश्रम से ही मीडिया से कहा कि वह 18 जून, 2018 को दिल्ली पुलिस के सामने पेश होंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें 18 जून तक का समय दिया जाए ताकि वह गुरुकुल में रहने वाली बच्चियों के लिए आवश्यक व्यवस्था कर सकें. दूसरी ओर, दिल्ली महिला आयोग ने दाती की गिरफ्तारी न होने पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस दे कर जवाब मांगा.

दिल्ली के असोला स्थित शनिधाम मंदिर में क्राइम ब्रांच का सर्च अभियान 15 जून को भी चला. इस दौरान पुलिस ने कई सबूत जुटाए. मौके से डीवीआर हार्डडिस्क, पैनड्राइव आदि जब्त किए. मंदिर की तलाशी के दौरान क्राइम ब्रांच की टीम के साथ पीडि़ता भी रही, उस ने मंदिर में बने आश्रम के वे 2 कमरे पुलिस को दिखाए, जिन में उस से दुष्कर्म किया गया था.

दिल्ली के आश्रम की तलाशी का काम पूरा होने के बाद 15 जून को ही क्राइम ब्रांच की एक टीम पीडि़ता को साथ ले कर पाली के लिए रवाना हो गई. इसी के साथ दिल्ली पुलिस ने दाती महाराज को नोटिस जारी कर के पूछताछ के लिए 16 जून को दिल्ली तलब किया. हालांकि पुलिस के नोटिस पर दाती ने जांच में शामिल होने के लिए 18 जून तक का समय मांगा.

16 जून को क्राइम ब्रांच की टीम जब पाली जिले के आलावास स्थित उन के आश्रम में पहुंची तो इस से पहले ही वह वहां से फरार हो गए. उन के साथ आश्रम की संचालिका श्रद्धा और अन्य सहयोगी भी भाग गए. दाती ने अपना मोबाइल भी स्विच्ड औफ कर लिया. दूसरी ओर दिल्ली स्थित आश्रम से बाबा के भाई भी भूमिगत हो गए.

एसीपी जसवीर मलिक के नेतृत्व में पहुंची क्राइम ब्रांच टीम ने आलावास आश्रम में 3 घंटे तक जांचपड़ताल की. इस दौरान पीडि़ता भी पुलिस टीम के साथ रही. पीडि़ता ने पूरे आत्मविश्वास के साथ उन 6 कमरों की तसदीक कराई, जहां उस के साथ यौनाचार हुआ था.

पुलिस टीम ने आश्रम से कई सबूत जुटाए. जांच काररवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई. पुलिस ने आश्रम के सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले और उन की डीवीआर व हार्डडिस्क जब्त कर ली. कई रजिस्टर व दस्तावेज भी जब्त किए गए.

इस दौरान आश्रम के उपमुख्य संचालक सहित करीब 20 सेवादारों से पूछताछ कर उन के बयान लिए गए. पीडि़ता के साथ रही बालिकाओं व युवतियों के भी बयान दर्ज किए गए. सर्च वारंट से ली गई आश्रम की तलाशी के दौरान वहां पुलिस बल तैनात रहा.

पुलिस टीम को आलावास आश्रम में उस समय हैरानी हुई, जब वहां लगभग 100 बालिकाएं ही मिलीं. अधिकांश कमरे खाली मिले, जबकि दाती कई दिनों से दावा कर रहे थे कि इस आश्रम में 700 से अधिक बालिकाएं हैं.

पुलिस को संदेह है कि आश्रम में रहने वाली बालिकाओं को दाती ने जबरन घर या अन्यत्र भेज दिया, क्योंकि दाती को डर था कि क्राइम ब्रांच की टीम बालिकाओं के बयान लेगी और उन से पूछताछ करेगी तो उस की पोल खुल सकती है. दिल्ली पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है क्योंकि आश्रम में दाती की बिना अनुमति कोई आजा नहीं सकता था.

16 जून को क्राइम ब्रांच टीम दिल्ली में दाती महाराज का इंतजार करती रही लेकिन वह नहीं पहुंचे. दाती ने पुलिस से 18 जून तक का समय पहले ही मांग लिया था. दाती के पाली आश्रम में भी नहीं मिलने पर पुलिस ने नोटिस जारी कर उन से 18 जून को पेश होने को कहा.

बाबा पर दुष्कर्म का आरोप लगने के बाद पहली बार 16 जून शनिवार को दिल्ली स्थित शनिधाम मंदिर में दाती महाराज की गैरमौजूदगी में पूजा की गई. सुबह साढ़े 5 बजे होने वाली पूजा आश्रम के सेवादारों ने की. इस से पहले प्रत्येक शनिवार को होने वाली इस पूजा को दाती महाराज ही करते थे. दाती पर आरोपों के कारण इस दौरान उन के सेवादार श्रद्धालुओं पर नजर रखे हुए थे.

16 जून को पाली स्थित आश्रम से फरार हुए दाती और आश्रम संचालिका श्रद्धा 17 जून को भी पुलिस या मीडिया के सामने नहीं आए. पुलिस 17 जून को दिल्ली एवं पाली स्थित आश्रमों पर नजर रखे रही, लेकिन दाती दोनों जगह ही नहीं पहुंचे. पुलिस को उम्मीद थी कि दाती 18 जून को दिल्ली में पुलिस के सामने पेश हो जाएंगे.

इस बीच क्राइम ब्रांच को दाती के खिलाफ ठगी की कई शिकायतें मिलीं. इन में धन दोगुना करने का झांसा दे कर रकम हड़पने की शिकायत भी शामिल रही. क्राइम ब्रांच ने इन शिकायतों को भी जांच के दायरे में ले लिया.

दाती महाराज समेत पांचों आरोपी 18 जून को भी दिल्ली में क्राइम ब्रांच के समक्ष पेश नहीं हुए. दाती की ओर से उन के वकील ने क्राइम ब्रांच में पेश हो कर दाती के स्वास्थ्य कारणों का हवाला दे कर पूछताछ को पेश होने के लिए एक सप्ताह की मोहलत मांगी.

इस के बाद पुलिस अधिकारियों ने कानूनविदों से सलाह कर दूसरा नोटिस जारी किया और दाती समेत सभी 5 आरोपियों को पेश होने के लिए 20 जून, 2018 तक का समय दे दिया. साथ ही यह भी कह दिया गया कि 20 जून तक हाजिर नहीं हुए तो उन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा.

इस के बाद पुलिस ने जांच काररवाई तेज कर सभी आरोपियों के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगा दिए. वहीं जयपुर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा बाल अधिकार विभाग की एक टीम उपनिदेशक के नेतृत्व में पाली स्थित आश्रम पहुंची और गायब बच्चियों के बारे में जानकारी जुटाई. इस के अलावा आश्रम के पंजीयन का नवीनीकरण कई साल से नहीं होने के मामले की भी जांच की.

इस बीच, योगगुरु स्वामी रामदेव ने 18 जून को कोटा में यह कह कर इस पूरे मामले में उबाल ला दिया कि जिन साधुओं का चरित्र ठीक नहीं है, उन्हें फांसी पर लटका देना चाहिए. केवल भगवा वस्त्र पहनने से साधु नहीं बनते, उन का आचरण व चरित्र भी ठीक होना चाहिए. धर्माचार्यों को भी चाहिए कि वे ऐसे संन्यासियों की गारंटी लें.

दबाव बढ़ने पर हाजिर होना पड़ा क्राइम ब्रांच के सामने

19 जून की दोपहर दाती महाराज दिल्ली में चाणकयपुरी स्थित क्राइम ब्रांच के औफिस में हाजिर हो गए. दरअसल, दाती के अचानक हाजिर होने के पीछे की कहानी यह रही कि दिल्ली की साकेत कोर्ट ने 21 जून तक दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी. इस पर पुलिस ने दाती के वकील के जरिए उन पर तुरंत हाजिर होने का दबाव बनाया.

इस बीच पुलिस को पता चला कि दाती महाराज दिल्ली में ही एक पांचसितारा होटल में ठहरे हुए हैं. पुलिस के भारी दबाव के चलते दाती 3 दिनों तक भूमिगत रहने के बाद 19 जून की दोपहर अपने वकील के साथ क्राइम ब्रांच के औफिस पहुंचे.

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने दाती से 7 घंटे तक पूछताछ कर करीब डेढ़ सौ सवाल किए. दाती के कुछ जवाबों से पुलिस अधिकारी संतुष्ट नहीं थे. बाद में उन्हें रात 10 बजे छोड़ दिया गया और 22 जून को फिर हाजिर होने के निर्देश दिए.

अब सवाल दाती की गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि इस बात का है कि दाती को अपनी बेगुनाही के सबूत खुद देने होंगे. अगर दाती ने गुनाह किया है तो पुलिस गिरफ्तार भी करेगी और अदालत में मुकदमा भी चलेगा. गुनहगारों को कानून सजा देगा. यह तय है कि इस मामले से लोगों का बाबाओं से भरोसा और कम हुआ है.

देखना यह है कि खुद को निर्दोष बताने वाले दाती महाराज पर शनि की कृपा होती है या उन के सिर पर शनि की ढैय्या गिरती है?