भारत का प्रथम रेल मंत्री कौन था और 400 का 36 प्रतिशत कितना होगा? अगर ऐसे आसान से सवालों के जवाब आप को नहीं मालूम हैं और आप रेलवे की गु्रप डी परीक्षा का फौर्म भरने यानी लगभग 2 करोड़ उम्मीदवारों में से एक हैं तो तय है आप के चुने जाने की उम्मीद न के बराबर है. लेकिन अभी भी अगस्तसितंबर तक का वक्त है कि आप इस कठिन परीक्षा को पास कर रेलवे में नौकरी करने का अपना ख्वाब पूरा कर सकते हैं.

इस साल रेलवे ने ग्रुप सी और डी की बंपर करीब 1 लाख रिक्तियां निकाली हैं जिन के लिए 2 करोड़ से भी ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया है यानी अगर आप को रेलवे की नौकरी चाहिए तो औसतन 200 उम्मीदवारों को पछाड़ना पड़ेगा. इस के लिए जरूरी है कि इस परीक्षा की सारी जानकारी आप को हो और लिखित परीक्षा, जिसे सीबीटी यानी कंप्यूटर बेस्ड टैस्ट कहा जाता है, की तैयारी और विषयों की भी जानकारी हो.

समझें परीक्षा का तरीका

सीबीटी परीक्षा की पहली सीढ़ी है जिस में डेढ़ घंटे के पेपर में उम्मीदवारों को 100 सवालों के जवाब देने हैं. हरेक सवाल के 4 उत्तर दिए जाएंगे, जिन में से उम्मीदवार को सही जवाब पर निशान लगाना है.

इस औनलाइन परीक्षा में गणित के 25 सवाल, तर्कशक्ति यानी जनरल इंटैलीजैंस के 25, जनरल साइंस के 30, सामान्य जागरूकता यानी जनरल अवेयरनैस के 20 सवाल होंगे. हर सवाल 1 नंबर का होगा. गलत उत्तर देने पर नकारात्मक मूल्यांकन होगा यानी नंबर कम हो जाएंगे. 1 गलत जवाब पर उम्मीदवार के 1/3 नंबर कटेंगे.

परीक्षा की दूसरी सीढ़ी शारीरिक क्षमता यानी फिजिकल टैस्ट होगी. इस में उम्मीदवारों को बुलाया जाएगा जो सीबीटी की मैरिट में जगह हासिल कर पाएंगे. सीबीटी में पास होने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 40 प्रतिशत नंबर लाने जरूरी हैं, जबकि ओबीसी, एससी और एसटी कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 30 नंबर लाना जरूरी होगा.

इतने नंबर लाने का मतलब यह नहीं है कि उम्मीदवार ने पहली सीढ़ी पार कर ली है. ये न्यूनतम नंबर हैं जिन से आप पास हुए कहलाएंगे लेकिन अगली सीढ़ी चढ़नी जरूरी है कि आप मैरिट में हों, इस के लिए अहम है कि सीबीटी में ज्यादा से ज्यादा नंबर हासिल किए जाएं. अगर 1 लाख पदों के लिए परीक्षा हो रही है तो मैरिटलिस्ट में उन 2 लाख लोगों को जगह मिलेगी जिन के नंबर सब से ज्यादा होंगे.

बेरोजगार युवाओं में इस परीक्षा को ले कर खासा जोश है और सभी तैयारियों में जुटे हुए हैं. उम्मीदवारों की भारी तादाद के चलते परीक्षा आसान नहीं होगी. साफ है, पास वही होगा जो बेहतर पढ़ाई करेगा.

सीबीटी पर ध्यान दें

सीबीटी को पास करने और अच्छे नंबर ला कर मैरिट लिस्ट में जगह बनाने के लिए जरूरी है कि उम्मीदवार अभी से खुद को तैयारी में झोंक दें.

सब से पहले गणित पर ध्यान दें जिस में लाभहानि, प्रतिशत, गुणाभाग और दूसरे सवाल पूछे जाते हैं. ये सवाल आमतौर पर आसान होते हैं, लेकिन गणित में कमजोर उम्मीदवारों को काफी कठिन लगते हैं. गणित में ज्यादा से ज्यादा नंबर लाने जरूरी हैं. उम्मीदवार पहली से ले कर 8वीं क्लास तक की गणित की किताबें खंगालें और ज्यादातर तैयारी उन से ही करें. अंकगणित, बीजगणित, रेखागणित, ज्यामिति और त्रिकोणमिति के सवालों की प्रैक्टिस ही नैया पार लगा सकती है.

गणित के बाद जनरल साइंस पर ध्यान दें जिस में विज्ञान के आसान सवाल पूछे जाते हैं, मसलन शरीर में कितनी हड्डियां होती हैं, मनुष्य एक मिनट में कितनी बार सांस लेता है और विटामिन ‘ए’ का रासायनिक नाम क्या है. ऐसे हजारों सवालों में से कोई भी 30 पूछे जा सकते हैं.

गणित की तरह विज्ञान भी बहुत बड़ा विषय है, जिस में 30 नंबरों के लिए हजारोंलाखों सवालों के जवाब आने चाहिए. अगर पढ़ा जाए तो जनरल साइंस बेहद दिलचस्प विषय है जिस के बारे में यह सोच कर हथियार नहीं डालने चाहिए कि इतने सवालों के जवाब कैसे याद रखें.

यही हाल जनरल नौलेज का है, जिस के समंदर में कितने ही गोते लगाओ, मोती नहीं मिलते. धर्म, खेल, राजनीति, कृषि, साहित्य, मनोरंजन जगत, भूगोल, इतिहास जैसे दर्जनों विषयों की पढ़ाई जनरल नौलेज के लिए करनी पड़ती है. तब कहीं जा कर उम्मीदवार को लगता है कि वह कुछ जानने लगा है.

तर्कशक्ति से उम्मीदवार की सामान्य बुद्धि परखी जाती है, मसलन आम, केला, गोभी और अमरूद में से कौन सा आइटम अलग है. जाहिर है इस सवाल का जवाब गोभी होगा क्योंकि बाकी आइटम फलों में आते हैं.

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ये आसान उदाहरण महज समझाने की गरज से दिए गए हैं ताकि आप को समझ आए कि तैयारी कैसे करनी है.

पहली सीढ़ी

गणित छोड़ कर सभी विषयों के पेपर्स में अधिकांश सवाल करंट विषयों पर पूछे जाते हैं. इसलिए पिछले एक साल की जनरल नौलेज यानी घटनाओं की जानकारी होनी बहुत जरूरी है. इस के लिए बेहतर होगा कि उम्मीदवार समाचारपत्र और पत्रिकाएं पढ़ें तथा पिछले दिनों की घटनाओं को इकट्ठा करें. रामनाथ कोविंद से पहले भारत का राष्ट्रपति कौन था, जैसे सवालों के जवाब आने जरूरी हैं. मौजूदा मंत्रिमंडल की जानकारी के अलावा सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और राज्यपालों के नाम मालूम होने भी जरूरी हैं.

केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि खेलों में क्याक्या हो रहा है, इस की जानकारी भी जरूरी है, मसलन, साल 2007 में विंबलडन का खिताब किस ने जीता था या फिर हालिया कौमनवैल्थ गेम्स में भारत ने कितने पदक जीते थे.

ये सब पढ़ना अगर आसान नहीं है तो कठिन भी नहीं है. वजह, अधिकतर उम्मीदवारों की हालत और जानकारी लगभग एकजैसी होती है. इसलिए अभी से जो पढ़ाई में जुट जाएगा वही फायदे में रहेगा. इसलिए इन बातों पर गौर करते हुए पढ़ाई करें :

  • अगर वाकई आप नौकरी हासिल करना चाहते हैं तो रोजाना कम से कम 8 घंटे पढ़ाई करें.
  • बाजार में तरहतरह की किताबें मौजूद हैं, उन सभी को बारबार पढ़ें.
  • समाचारपत्र पढ़ना तो बेहद जरूरी है जिस से नईर्पुरानी सभी जानकारियां मिलती हैं. समाचारपत्रों में छपे लेख व रिपोर्ट भी गौर से पढ़ें.
  • पत्रिकाएं पढ़ने से भी तरहतरह की उपयोगी जानकारियां मिलती है, इसलिए अच्छी पत्रिकाएं इकट्ठा करें. पुरानी मिल जाएं तो उन्हें भी पढ़ें.
  • लगातार पढ़ाई करने के बजाय टुकड़ों में पढ़ें, इस के लिए टाइमटेबल बना कर पढ़ना बेहतर होता है कि कितने घंटे कौन सा विषय पढ़ना है.
  • जिस विषय में कमजोर हैं उस पर ज्यादा ध्यान व समय दें.
  • पढ़ाई को तनाव के बजाय चुनौतीभरा मनोरंजन समझें.
  • मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टैलीविजन, गपशप, मौजमस्ती एकदम छोड़ दें.
  • पिछले 5 वर्षों के पेपर हल करें या फिर हल किए हुए पेपर पढ़ें.
  • प्रतियोगी परीक्षा में रटने से कोई खास फायदा नहीं होता, बल्कि एक नजर जितने ज्यादा सवालों और उन के जवाबों पर डालेंगे उतना ज्यादा फायदा होता है.
  • अपनेआप को कमजोर न समझें और आत्मविश्वास बनाए रखें.
  • परीक्षा में शांत दिमाग से सवालों के जवाब दें.
  • तुक्का मारने की कोशिश न करें क्योंकि गलत जवाब पर नंबर कटेंगे.
  • वक्त का खास खयाल रखें क्योंकि आप के पास एक सवाल का जवाब देने के लिए एक मिनट से भी कम समय होता है. जिस सवाल का जवाब बिलकुल समझ नहीं आ रहा हो उसे छोड़ दें, उस पर अड़ें नहीं.
  • प्रश्नपत्र को बीच में से हल करने की गलती न करें, बल्कि पहले सवाल से शुरू करें और आखिर तक एक के बाद एक जवाब दें.

पढ़ाई के अलावा आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत ही आप को कामयाबी दिला सकती है. यह न सोचें कि मैं कुछ नहीं जानता. अधिकतर उम्मीदवार प्रतियोगी परीक्षाओं की लड़ाई निराशा के चलते लड़ने से पहले ही हार जाते हैं. दिलचस्प बात यह है कि एक फीसदी उम्मीदवारों को छोड़ कर बाकी 97 फीसदी की हालत एकसी होती है.

रेलवे से संबंध रखते हुए कुछ सवाल जरूर पूछे जाते हैं, मसलन देश में पहली रेल कब और कहां चली थी, मैट्रो की शुरुआत कब हुई थी और सब से छोटी व बड़ी रेललाइन कहां हैं. आमतौर पर एक बार ध्यान से पढ़ने पर इन सवालों के जवाब याद हो जाते है. इसलिए उन्हें सिरदर्द या कठिन नहीं समझना चाहिए. हां, बारबार पढ़ने से जरूर फायदा होता है.

दूसरी सीढ़ी

सीबीटी के बाद रेलवे बोर्ड चुने हुए उम्मीदवारों का फिजिकल टैस्ट लेता है. इसलिए पढ़ाई के साथसाथ इस की भी तैयारी जरूरी है. आमतौर पर 1 हजार मीटर की दौड़ रेलवे करवाता है जिस से यह पता चले कि उम्मीदवार में कितना दमखम है. इस बार की परीक्षा में उम्मीदवारों को वजन दे कर दौड़ाया जाएगा. लड़कों को 35 किलो वजन उठा कर 2 मिनट में 100 मीटर की दूरी तय करनी होगी और 1 हजार मीटर की दूरी 4 मिनट 15 सैकंड में तय करनी पड़ेगी.

लड़कियों को 20 किलो वजन उठा कर 100 मीटर की दूरी 2 मिनट में पूरी करनी होगी और 1 हजार मीटर की दूरी 5 मिनट 40 सैकंड में पूरी करनी होगी.

इस फिजिकल टैस्ट की अभी से प्रैक्टिस शुरू करें तो परीक्षा के दौरान आसानी रहेगी. कोशिश यह होनी चाहिए कि तयशुदा से कम वक्त में दौड़ पूरी कर ली जाए, जिस से चुनाव करने वालों पर अच्छा असर पड़े.

इस के अलावा यह भी ध्यान रखें कि आप की नजर ठीक हो, रंगों की पहचान भी रेलवे में जरूरी होती है. इस की भी प्रैक्टिस करें. अगर कोई दिक्कत पेश आए तो तुरंत आंखों के डाक्टर से मिल कर सलाह व इलाज कराएं.

तीसरी सीढ़ी

जो उम्मीदवार पहली दोनों सीढि़यां पार कर लेंगे, उन की नौकरी एक तरह से पक्की है लेकिन तीसरे दौर में आप के द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की जांच होती है. गलत या झूठे दस्तावेज आप की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. इसलिए ऐसे दस्तावेज न लगाएं और हरेक दस्तावेज की मूल प्रति एक फाइल में जमा कर के ले जाएं जिस से जांच में आसानी हो.

ग्रुप सी और डी की नौकरी की पगार 18 हजार रुपए से शुरू होती है जिस में भत्ते जुड़ कर यह तकरीबन 25 हजार रुपए मासिक तक हो जाती है और जिंदगीभर की बेफिक्री भी हो जाती है.

यह बेफिक्री सिर्फ मेहनत और लगन से ही मिलनी मुमकिन है, इसलिए वक्त न गंवाते हुए अभी से जुट जाएंगे तो कामयाबी मिलनी कोई मुश्किल नहीं.

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