सरिता विशेष

देश में फैलाए जा रहे धार्मिक नफरत के माहौल में एक अच्छा खासा आदमी किस तरह दूसरे मजहब के लोगों से घृणा करने लगता है और एक दिन बेरहम तरीके से वह अपने दोस्त का कत्ल करने से नहीं हिचकिचाता. राजस्थान के राजसमंद में 48 साल के मोहम्मद अफराजुल की हत्या करने वाला शंभू लाल रैगर इस की जीतीजागती मिसाल है. दलित समुदाय का शंभूलाल इसी विषैली हवा की चपेट का शिकार बन गया.

6 दिसंबर को उदयपुर जिले के राजसमंद के राजनगर में शंभूलाल ने अजराजुल की लव जिहाद के नाम पर फावड़े और गैंती से निर्ममतापूर्वक हत्या की और फिर पेट्रोल डाल कर जला दिया. इस बेरहम कत्ल का वीडिया बनाया गया और उसे सोशल मीडिया पर जारी कर के नफरत की आग को और हवा देने की कोशिश की गई.

यह भयावह वीडियो ज्योंही वायरल हुआ, इसे देख कर लोग स्तब्ध रह गए. अनेक लोगों ने इस हत्या की निंदा की पर सोशल मीडिया पर कई हिंदू कट्टरपंथियों ने हत्या को जायज ठहराते हुए शंभूलाल का समर्थन किया और उसे हीरो का दर्जा देने का प्रयास किया गया.

शंभू ने अपने नाबालिग भतीजे से तीन वीडियो बनाए थे. एक हत्या के समय का लाइव वीडियो हैं. दो वीडियो कत्ल करने से पहले के हैं. इन में से एक वीडियो में वह स्त्री सम्मान, लव जिहाद और देशभक्ति जैसे मुद्दों पर भाषण दे रहा है. कत्ल के वीडियो में वह दावा कर रहा है कि अपनी बहन की बेइज्जती का बदला लेने के लिए और लव जिहाद को खत्म करने के लिए इस हत्या को अंजाम दे रहा है. वह चेतावनी भी दे रहा है कि हिंदू लड़कियों को पथभ्रष्ट करने वालों का अंजाम यही होगा.

इस हत्या को उस ने लव जिहाद, मेवाड़ प्रेम, इस्लाम विरोध और महाराणा प्रताप की वीरता की बात की है. इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं.

शंभू को पुलिस ने जल्दी ही पकड़ लिया. उस ने पूछताछ में बताया कि वह कुछ सालों से अपने महल्ले में रहने वाली एक औरत के साथ रहता था. वह साथ में काम करती थी. बाद में वह औरत उसे छोड़ कर अफराजुल के पास रहने लगी. शंभू और अफराजुल दोस्त बताए जाते हैं और एक ही महल्ले में रहते थे. शंभू ठेकेदारी का काम करता था और अफराजुल पश्चिम बंगाल से उस के लिए मजदूरों को लाता था.

पुलिस के मुताबिक शंभू ने बताया कि उस के महल्ले की दो लड़कियां गायब हो गई थीं. इन में से वह सुनीता [बदला हुआ नाम] को वह मालदा जिले के सैयदपुर गांव जा कर वापस लाया था. वह सुनीता की मां की गुहार पर खुद ही सैयदपुर गया था. लड़की की मां से उसे लाने के एवज में शंभू ने 10 हजार रुपए इनाम के तौर पर लिए थे. अफराजुल इसी गांव का था. चर्र्चा थी कि उसे अफराजुल ने भगाया था.

यह भी बताया गया कि सुनीता को सैयदपुर गांव से लाने से नाराज बंगाली मजदूरों ने शंभू को मारापीटा भी था. इस से वह सनकी हो गया था. पिछले कई दिनों से इंटरनेट पर लव जिहाद से जुड़े भाषण सुन रहा था. पुलिस का मानना है कि वह इन बातों से परेशान रहने लगा. और साथ के मुस्लिम मजदूरों से नफरत करने लगा. इस के बाद वह हत्या की योजना बना रहा था.

आपसी रंजिश के मामले को वह पूरे हिंदू समाज से जोड़ने में सफल हो गया. इस घटना से लगता है कि अब हिंदू कट्टरता को अपना कर एक आतंकवादी मानसिकता का रूप लेता जा रहा है. हत्या और दंगाफसाद करने वाले लोग माथे पर भगवा पट्टी और जुबान पर भगवान का नारा लगा कर हत्या और आगजनी को अंजाम देने लगे हैं.

देश भर में घातक किस्म का हिंदुत्व पांव पसार रहा है जो लोगों के मनमस्तिष्क में जहर की तरह घुसपैठ कर रहा है. यह काम भारत में राष्ट्रवाद, देशभक्ति के नाम पर बड़े शातिराना तरीके से कराया जा रहा है.

पिछले कुछ समय से देश में जिस तरह की विचारधारा को प्रचारित किया जा रहा है, नफरत का वातावरण बनाया जा रहा है यह घटना उस विचारधारा की सफलता को दर्शा रही है. देश में धर्मयुद्घ जैसा माहौल बन चुका है. एक बेकसूर मजदूर की हत्या को धर्म का जामा पहना देना उस विचारधारा और समूह का षड्यंत्र है जो दूसरे धर्म के लोगों की हत्या को उकसाती है. वीडियो में शंभू की भावभंगिमा, भाषा उसी हिंदुत्व से प्रेरित लगती है.

यह दशकों से फैलाई जा रही जहरीली विचारधारा का नतीजा है. यह जो माहौल फैलाया जा रहा है उस से शंभू रैगर ही पैदा हो सकते हैं. लाखों की संख्या में इस नफरत के माहौल का असर युवाओं पर पड़ रहा है. युवा बेराजगारों को रोजगार नहीं तो पाकिस्तान, तालिबान, आईएसआईएस की तरह आतंकी समूह बना कर धर्मयोद्घा बनाया जा रहा है. देश में धार्मिक कट्टरता से प्रभावित कर के युवाओं को आतंक की ओर झोंका जा सकता है. लाखों युवा धर्म के नाम पर जान देने और जान लेने को तैयार हैं. इन लोगों का बे्रैनवाश कराया जा रहा है ताकि उन के जरिए दंगे, हत्याएं करवाई जा सकें. देश में एक विषैली पौध तैयार हो रही है. ऐसे में भारत और मजहबी कट्टरपंथी पाकिस्तान में फर्क क्या रह जाता है.

हिंदू आतंकवाद की इस लेबोरेटरी में दलित, पिछड़ा, आदिवासी समुदाय के युवाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है. जयपुर से गाय ले जा रहे हरियाणा के नूह के पशुपालक पहलू खान की जान लेने वाले पिछड़ समुदाय के युवा ही थे. इन वर्गों के युवा महज औजार हैं और हिंदुत्व के लिए इस्तेमाल होने के लिए तैयार हैं. बाबरी मस्जिद को ढहाने में यही लोग आगे थे. राममंदिर निर्माण के लिए झंडा उठाने वालों में पिछड़े सब से अधिक पैरोकार बने दिखाई दे रहे हैं. यह समुदाय बल में सब से ऊपर हैं. बुद्धि में नहीं. बुद्धि चलाने वाले तो बहुत थोड़े से हैं, हिंदुत्व की मलाई वही चाट रहे हैं.

मेवाड़ का कर्ज चुकाने, देशभक्ति दिखाने और हिंदुत्व की इज्जत के लिए क्या शंभू रैगर जैसों की जरूरत है? दलितों, पिछड़ों को इस साजिश पर सोचनासमझनो होगा कि उन के दिमाग में धर्म, जाति की नफरत का जहर कौन घोल रहा है और क्यों?