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12 अप्रैल की बात है. एक अधेड़ आदमी जयपुर के गांधीनगर पुलिस थाने पहुंचा. उस ने थाने के गेट पर खड़े संतरी से कहा, ‘‘भैया, मुझे रिपोर्ट दर्ज करानी है.’’

संतरी ने अधेड़ को अंदर ड्यूटी अफसर से मिलने को कहा. अंदर एक सबइंसपेक्टर ड्यूटी अफसर की कुरसी पर बैठा था. आसपास पुलिस के 2 जवान बैठे कुछ लिखापढ़ी कर रहे थे. ड्यूटी अफसर के सामने रखी कुर्सियों पर 2 लोग पहले से बैठे थे, जिन से ड्यूटी अफसर बात कर रहा था.

ड्यूटी अफसर को बातों में व्यस्त देख कर अधेड़ कुछ देर खड़ा रहा. फिर बेचैनी से इधरउधर देखने लगा. अधेड़ की बेचैनी देख कर सबइंसपेक्टर ने पूछा, ‘‘बताएं साहब, क्या बात है?’’

‘‘थानेदार साहब, मेरे बेटे की बहू नहीं मिल रही है. आप उसे ढूंढ देंगे तो भला होगा.’’ अधेड़ ने अपने आने का मकसद बता दिया.

‘‘आप की बहू कब से गायब है?’’ ड्यूटी औफिसर ने पूछा.

‘‘साहब, वह एक दिन पहले से गायब है.’’ अधेड़ ने अपने कंधे पर पड़े अंगौछे से माथे पर आया पसीना पोंछते हुए कहा.

‘‘आप की बहू आप के बेटे के पास ही रहती होगी, फिर वह गायब कैसे हो गई?’’ ड्यूटी अफसर ने अधेड़ के चेहरे पर नजरें गड़ा कर पूछा, ‘‘कहीं ऐसा तो नहीं कि वह अपनी मरजी से किसी के साथ चली गई हो?’’

‘‘नहीं थानेदार साहब, ऐसी कोई बात नहीं है.’’ अधेड़ ने ड्यूटी अफसर को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘मेरा बेटा आयकर विभाग में इंसपेक्टर है. उस की पोस्टिंग गुजरात के वड़ोदरा में है. मेरी बहू यहीं जयपुर के बापूनगर में एक पीजी हौस्टल में रह कर टीचर भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रही थी.’’

ड्यूटी अफसर ने अधेड़ को एक कागज देते हुए कहा, ‘‘आप अपनी लिखित रिपोर्ट दे दो, हम रिपोर्ट दर्ज कर के आप की बहू को जरूर तलाश करेंगे.’’

अधेड़ ने कागज ले कर थानाप्रभारी के नाम एक प्रार्थनापत्र लिखा. अधेड़ ने वह प्रार्थनापत्र ड्यूटी अफसर को देते हुए कहा, ‘‘साहब, मेरी यह रिपोर्ट दर्ज कर लो.’’

ड्यूटी अफसर ने उस प्रार्थनापत्र पर सरसरी नजर डाली.

प्रार्थनापत्र का लब्बोलुआब यह था कि रिपोर्ट दर्ज कराने आया वह अधेड़ अलवर जिले के कठूमर का रहने वाला बृजेंद्र सिंह था. उस का बेटा लोकेश चौधरी आयकर विभाग में निरीक्षक था.

लोकेश चौधरी गुजरात के वड़ोदरा शहर में तैनात होने के कारण वहीं रहता था. लोकेश की शादी कोई सवा साल पहले भरतपुर जिले के सिनसिनी गांव में रहने वाले रामकुमार सिनसिनवार की बेटी मुनेश से हुई थी.

मुनेश शिक्षक भरती परीक्षा की तैयारी कर रही थी. इस के लिए वह जयपुर के बापूनगर में डी-126 कृष्णा मार्ग पर स्थित एक पीजी हौस्टल में रहती थी. मुनेश इसी हौस्टल से 11 अप्रैल को लापता हो गई थी.

गांधीनगर पुलिस थाने में 12 अप्रैल को बृजेंद्र सिंह की लिखित रिपोर्ट पर मुनेश की गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया. रिपोर्ट में बृजेंद्र सिंह ने अपनी पुत्रवधू के गुम होने में किसी पर शक जाहिर नहीं किया था, इसलिए पुलिस ने सामान्य तरीके से जांचपड़ताल शुरू कर दी.

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इस के दूसरे ही दिन लोकेश चौधरी जयपुर आ कर पुलिस अफसरों से मिला और अपनी पत्नी को तलाश करने की गुहार लगाई. पुलिस अधिकारियों ने लोकेश की परेशानी समझते हुए उस की पत्नी की हरसंभव तरीके से तलाश करने का आश्वासन दिया.

1-2 दिन बाद लोकेश जयपुर कमिश्नरेट के आला पुलिस अफसरों से मिला और उन से गांधीनगर थाना पुलिस की शिकायत करते हुए कहा कि पुलिस सही तरीके से उस की पत्नी की तलाश नहीं कर रही है.

लोकेश का कहना था कि मुनेश का अपहरण हुआ है. लोकेश बारबार पुलिस अफसरों से मिल कर अपनी पत्नी को तलाश करने का दबाव बनाने लगा.

इस पर पुलिस उपायुक्त (पूर्व) कुंवर राष्ट्रदीप ने मुनेश की तलाश के लिए अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (पूर्व) हनुमान प्रसाद मीणा और गांधीनगर के सहायक पुलिस आयुक्त राजपाल गोदारा के सुपरविजन में इंसपेक्टर सुरेंद्र सिंह, सबइंसपेक्टर कृष्ण कुमार, कांस्टेबल ओमप्रकाश और नरेंद्र कुमार की एक टीम गठित कर दी.

इस पुलिस टीम ने जांच के दौरान हौस्टल के आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखीं. इस के अलावा मुनेश और उस के पति लोकेश चौधरी सहित अन्य संदिग्ध लोगों के मोबाइल नंबरों की कालडिटेल्स भी निकलवाई. पुलिस ने मुनेश व लोकेश के दोस्तों का भी पता लगाया. साथ ही दोनों की पुरानी हिस्ट्री भी पता कराई. व्यापक जांचपड़ताल में पुलिस अफसरों को मुनेश के गुम होने का मामला संदिग्ध नजर आया.

पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए जांचपड़ताल में जुटी हुई थी कि इसी बीच 21 अप्रैल को मुनेश के पिता रामकुमार सिनसिनवार ने गांधीनगर थाने में एक लिखित रिपोर्ट दी. रिपोर्ट में लिखा था कि मेरी बेटी मुनेश 11 अप्रैल से गायब है. इस के बाद मेरा दामाद लोकेश जयपुर आया तो हम ने उस का मोबाइल चैक कराने के लिए कहा था. इस पर लोकेश ने अपना मोबाइल फोरमैट कर डेटा डिलीट कर दिया.

मुनेश के पिता ने रिपोर्ट में लिखा कि लोकेश व उस के घर वाले मेरी बेटी को दहेज के लिए प्रताडि़त करते रहते थे. उन्होंने इसी साल फरवरी में मुनेश की 10 लाख रुपए की एफडी तुड़वा कर पैसे निकलवा लिए थे.  रिपोर्ट में आगे लिखा था कि लोकेश और उस के घर वालों ने मिल कर मेरी बेटी मुनेश का षडयंत्रपूर्वक अपहरण कर के उस की हत्या कर दी है. इस पर गांधीनगर थाने में उसी दिन भादंसं की धारा 364, 498ए, 302, 304बी और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया.

इस मामले की जांच मालवीयनगर के सहायक पुलिस आयुक्त (प्रशिक्षु) आईपीएस औफिसर कावेंद्र सिंह सागर को सौंपी गई. कावेंद्र सिंह सागर ने रिपोर्ट दर्ज होते ही लोकेश चौधरी की तलाश कराई. पता चला कि वह जयपुर में ही है. इस के बाद उसी दिन यानी 21 अप्रैल को लोकेश चौधरी को पुलिस ने थाने ला कर पूछताछ की. उस की पूर्व हिस्ट्री और मोबाइल काल विश्लेषण के आधार पर उस से कई सवाल किए गए.

पुलिस के सवालों के आगे लोकेश ज्यादा देर तक नहीं टिक सका, वह टूट गया. उस ने बताया कि अपने एक साथी के सहयोग से उस ने अपनी पत्नी मुनेश को जयपुर से गुजरात के वड़ोदरा बुलाया था. वड़ोदरा में मुनेश की हत्या कर के उस की लाश जमीन में गाड़ दी गई थी. लोकेश ने बताया कि उस ने मुनेश की हत्या की साजिश अपनी प्रेमिका से शादी करने के लिए रची थी. पुलिस ने उसी दिन लोकेश को गिरफ्तार कर लिया.

लोकेश की स्वीकारोक्ति से पुलिस अधिकारी दंग रह गए. पत्नी के गुम होने का नाटक रच कर जो आयकर निरीक्षक पुलिस पर ढिलाई बरतने का आरोप लगा रहा था, उस ने 10 दिन पहले ही पत्नी की हत्या कर दी थी.

यह खुलासा होने पर उसी दिन जयपुर से प्रशिक्षु आईपीसी औफिसर कावेंद्र सिंह सागर के नेतृत्व में पुलिस की एक टीम आरोपी आयकर निरीक्षक लोकेश चौधरी को साथ ले कर गुजरात के वड़ोदरा शहर के लिए रवाना हो गई. 22 अप्रैल को लोकेश की निशानदेही पर जयपुर पुलिस ने वड़ोदरा में हरणी एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित तृषा डुप्लेक्स में बगीचे की जमीन खोद कर गाड़ा गया मुनेश का शव बरामद कर लिया. मुनेश का शव बगीचे में एक कोने में करीब 7 फीट गहरा गड्ढा खोद कर दफनाया गया था.

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मुनेश का शव निकालने के लिए गड्ढा खुदवाना पड़ा, इस काम में पुलिस को मजदूरों के अलावा जेसीबी की मदद भी लेनी पड़ी. गड्ढा खोदने में ही 3 घंटे लग गए. मुनेश के शरीर पर बहुत कम कपड़े मिले.

लोकेश ने मुनेश का शव जमीन में गाड़ कर उस पर करीब 15 किलो नमक भी डाल दिया था ताकि शव जल्दी से गल जाए और बदबू भी न फैले. बाद में गड्ढे में मिट्टी भर दी गई. फिर उसे समतल कर पानी का छिड़काव कर दिया गया था ताकि मिट्टी जम जाए.

वड़ोदरा से मुनेश का शव बरामद कर पुलिस दल उसी रात जयपुर के लिए वापस चल दिया. 23 अप्रैल को जयपुर पहुंच कर पुलिस ने मुनेश के शव का सवाई मानसिंह अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया. दोपहर बाद मुनेश का शव उस के पिता को सौंप दिया गया. मुनेश के घर वाले उस का शव भरतपुर जिले के अपने पैतृक गांव सिनसिनी ले गए.

सिनसिनी में जब मुनेश का शव पहुंचा तो पूरे गांव में शोक छा गया. सवा साल पहले जिस बेटी को गांव वालों ने दुलहन बना कर विदा किया था, अब कफन में लिपटी उस की लाश गांव पहुंची थी. हजारों लोगों की मौजूदगी में मुनेश का गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया. पुलिस ने मुनेश की हत्या के मामले में लोकेश चौधरी के दोस्त प्रवेंद्र शर्मा को 23 अप्रैल की रात गिरफ्तार कर लिया.

लोकेश ने प्रवेंद्र शर्मा को जयपुर भेज कर मुनेश को वड़ोदरा बुलवाया था और उसी की मदद से मुनेश की हत्या कर उस का शव जमीन में गाड़ दिया था. प्रवेंद्र आयकर निरीक्षक लोकेश का दोस्त और उसी के गांव का रहने वाला था.

पुलिस की ओर से लोकेश और प्रवेंद्र से की गई पूछताछ में मुनेश की हत्या की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह सन 2015 में प्रदर्शित अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम’ से मिलतीजुलती है. हालांकि लोकेश ने पुलिस को बताया कि उस ने फिल्म ‘दृश्यम’ देखी जरूर है, लेकिन मुनेश की हत्या इस फिल्म से प्रेरित हो कर नहीं की.

अलवर जिले के कठूमर के रहने वाले लोकेश की शादी 5 फरवरी, 2017 को भरतपुर जिले के सिनसिनी गांव के रहने वाले रामकुमार सिनसिनवार की बेटी मुनेश से हुई थी. शादी के बाद मुनेश अपने आयकर निरीक्षक पति लोकेश चौधरी से खूब खुश थी. उसे अपनी किस्मत पर रश्क होता था कि उसे प्यार करने वाला अफसर पति मिला है. शादी के बाद कुछ समय वह पति के साथ वड़ोदरा में रही, फिर ससुराल आ गई. बीच में जब भी मौका मिलता, लोकेश अपने गांव आ जाता या मुनेश वड़ोदरा चली जाती. इस तरह दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से बीत रही थी.

मुनेश पढ़ीलिखी थी. उस की इच्छा थी कि वह भी सरकारी नौकरी करे. वह अध्यापिका बनना चाहती थी. एक दिन उस ने पति लोकेश से कहा कि राजस्थान में हजारों शिक्षकों की भरती होने वाली है. वह शिक्षक भरती परीक्षा देना चाहती है, जिस के लिए उसे जयपुर में रह कर तैयारी करनी पड़ेगी. जयपुर में रहने से उस पर घर के कामकाज का बोझ भी नहीं रहेगा और वह आराम से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकेगी.

मुनेश की इस इच्छा पर न तो लोकेश को कोई ऐतराज था और न ही उस के घर वालों को. लोकेश ने उस की बात पर सहमति जताते हुए कहा कि यह तो अच्छी बात है. आजकल वैसे भी महंगाई इतनी हो गई है कि पतिपत्नी मिल कर कमाएं, तभी अच्छे तरीके से जिंदगी गुजर सकती है.

लोकेश ने जयपुर के बापूनगर में डी-126 कृष्णा मार्ग पर स्थित एक पीजी हौस्टल में मुनेश के रहने की व्यवस्था कर दी. मुनेश इसी हौस्टल में रह कर अपनी पढ़ाई कर रही थी. दूसरी ओर लोकेश का पहले से एक युवती से प्रेमप्रसंग चल रहा था. हालांकि मुनेश में कोई बुराई नहीं थी. लोकेश को भी उस से कोई शिकायत नहीं थी.

मुनेश पढ़ीलिखी थी, शक्लसूरत से भी खूबसूरत थी. आधुनिक और फैशनेबल भी थी, लेकिन पता नहीं लोकेश को अपनी प्रेमिका में ऐसा क्या नजर आता था कि वह उसी के खयालों में खोया रहता था.

लोकेश अपनी प्रेमिका से शादी करना चाहता था, लेकिन न तो कानूनी दृष्टि से यह संभव था और न ही सामाजिक रूप से. सरकारी नौकरी करते हुए दूसरी शादी करने पर उस की नौकरी भी जा सकती थी. इसलिए वह मुनेश को ठिकाने लगाने की साजिश रचने लगा. साजिश रचने के साथ वह ‘दृश्यम’ फिल्म की तरह पुलिस के हर संभावित सवालों के जवाब भी तय करने लगा.

लोकेश को पता था कि मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर पुलिस उस तक पहुंच जाएगी, इसलिए उस ने हर कदम बहुत सोचसमझ कर उठाया.

पति पर संदेह का सब से पहला कारण प्रेमप्रसंग और अवैध संबंध होते हैं, इसलिए उस ने अपनी प्रेम कहानी को छिपाने के लिए अपने मोबाइल से प्रेमिका से बात करना बंद कर दिया था.

उस ने अपने एक साथी कर्मचारी की आईडी हथिया कर उस के नाम से सिम खरीदी. इस सिम से वह केवल अपनी प्रेमिका से ही बात करता था. अन्य किसी से बात करने के लिए वह अपने दूसरे मोबाइल नंबरों का उपयोग करता था.

लोकेश ने खुद को संदेह से दूर रखने के लिए मुनेश को एक महीने पहले ही जयपुर में स्कूटी दिलवाई. वह जानबूझ कर दिन में कई बार वड़ोदरा से जयपुर में पत्नी मुनेश को फोन करता था ताकि दोनों के बीच अच्छे संबंधों की बात साबित हो सके.

साजिश के तहत लोकेश के कहने पर उस के दोस्त प्रवेंद्र शर्मा ने वड़ोदरा में हरणी एयरपोर्ट क्षेत्र स्थित तृषा डुप्लेक्स में ग्राउंड फ्लोर पर किराए का मकान लिया. लोकेश व प्रवेंद्र ने 10 अप्रैल को इस मकान के बगीचे के एक कोने में मजदूरों से करीब 7 फुट गहरा गड्ढा खुदवाया.

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इन्होंने मजदूरों से कहा कि वे यह गड्ढा खाद बनाने के लिए खुदवा रहे हैं. बगीचे में गड्ढा खुदाई का काम आसपड़ोस के लोगों को न दिखाई दे, इस के लिए उन्होंने ग्रीन नेट से बगीचे को कवर कर दिया था.

लोकेश इतना शातिर दिमाग था कि खुद की फोन लोकेशन वड़ोदरा में ही बनाए रखना चाहता था. गड्ढा खुद जाने के बाद उस ने अपने दोस्त प्रवेंद्र को उसी रात वड़ोदरा से जयपुर के लिए रवाना कर दिया. लोकेश ने प्रवेंद्र का मोबाइल खुद के पास रख लिया और उसे दूसरा नया मोबाइल दे कर जयपुर भेजा.

प्रवेंद्र दूसरे दिन यानी 11 अप्रैल को जैसे ही जयपुर पहुंचा, लोकेश ने अपनी पत्नी को फोन कर कहा कि मैं एक केस में फंस गया हूं, बड़ी परेशानी में हूं. मेरा दोस्त जयपुर आया हुआ है. तुम उस के साथ वड़ोदरा आ जाओ. मैं अपने दोस्त से कह देता हूं कि वह तुम्हें हौस्टल से ले लेगा.

मुनेश कुछ सोचतीविचारती, इस से पहले ही प्रवेंद्र बापूनगर स्थित पीजी हौस्टल पहुंच गया. प्रवेंद्र ने मुनेश से कहा, ‘‘भाभीजी, भैया ने वड़ोदरा बुलाया है और चलना भी अभी है.’’

मुनेश को किसी बात का कोई शकशुबहा तो था नहीं, इसलिए वह प्रवेंद्र के साथ चल दी. प्रवेंद्र ने हौस्टल से रवाना होते ही बहाने से मुनेश का मोबाइल ले लिया और उस की सिम निकाल ली.

मुनेश के मोबाइल की सिम निकालने से उस की आखिरी लोकेशन जयपुर में गांधीनगर, बापूनगर व लालकोठी इलाके में आती रही. इस के पीछे लोकेश की मंशा थी कि पुलिस का संदेह गुजरात और वड़ोदरा तक न पहुंचे.

12 अप्रैल की दोपहर मुनेश और प्रवेंद्र वड़ोदरा पहुंच गए. प्रवेंद्र मुनेश को सीधे अपने किराए के मकान पर ले गया. वहां लोकेश पहले से मौजूद था.

मुनेश जैसे ही उस मकान में पहुंच कर अपने पति लोकेश से मिलने के लिए आगे बढ़ी तो लोकेश ने उस का गला घोंट दिया. प्रवेंद्र ने उस का मुंह दबा लिया, इस से मुनेश की चीख भी किसी ने नहीं सुनी.

मुनेश की हत्या के बाद लोकेश और प्रवेंद्र ने मिल कर उस का शव मकान के बगीचे में पहले से खुदवाए हुए गड्ढे में डाल दिया. फिर शव पर नमक व मिट्टी डाल कर दोनों ने उस गड्ढे को भर दिया. बाद में पानी का छिड़काव भी कर दिया.

मुनेश की हत्या के बाद लोकेश ने अपने पिता बृजेंद्र सिंह को फोन कर के कहा कि मुनेश नहीं मिल रही है. पुलिस में इस की रिपोर्ट दर्ज करा दो. बेटे के कहने पर बृजेंद्र सिंह ने उसी दिन गांधीनगर थाने में मुनेश के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

इस के अगले दिन लोकेश वड़ोदरा से जयपुर आ गया. उस ने पुलिस को मुनेश के अपहरण की आशंका जताई और कहा कि उस की मुनेश से मोबाइल पर आखिरी बार 11 अप्रैल को बात हुई थी. उस समय उस ने कहा था कि वह किसी दोस्त के पास जा रही है.

बाद में पुलिस ने जब मुनेश की तलाश में लोकेश और मुनेश के मोबाइल की काल डिटेल्स निकाली तो लोकेश की वड़ोदरा से जयपुर में मुनेश से 11 अप्रैल को बात होने की तो पुष्टि हुई. इस के बाद मुनेश के मोबाइल की टावर लोकेशन जयपुर में गांधीनगर, बापूनगर और लालकोठी के आसपास ही घूमती रही.

इसीलिए पुलिस लोकेश पर संदेह नहीं कर पा रही थी और लोकेश इस का फायदा उठा कर पुलिस पर दबाव बना रहा था ताकि पुलिस मुनेश के अपहरण की कहानी में उलझ कर रह जाए.

प्रवेंद्र शर्मा गुजरात के भावनगर में नौकरी करता था. लोकेश ने उसे आयकर विभाग में नौकरी दिलवाने का झांसा दे कर मुनेश की हत्या की साजिश में शामिल किया था.

लोकेश ने पुलिस से बचने के लिए करीब एक दर्जन प्लान बनाए थे. इसीलिए जयपुर पुलिस शुरू में मुनेश के अपहरण की कहानी में ही उलझ कर रह गई. पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए लोकेश और मुनेश के मोबाइल फोंस की साल भर की करीब 15 हजार कालडिटेल्स की जांच की.

लोकेश ने मुनेश की हत्या की साजिश रचने के साथ ही करीब 3 महीने पहले अपनी प्रेमिका से बातचीत के लिए दूसरे के नाम से सिम ले ली थी. उस ने प्रेमिका को भी सख्त हिदायत दे दी थी कि वह उस के पुराने नंबरों पर काल न करे. इस के पीछे लोकेश का मानना था कि पुलिस ज्यादा से ज्यादा 2-3 महीने की काल डिटेल्स देखेगी, इस में उस की प्रेमिका का नंबर नहीं आएगा.

प्लान के तहत लोकेश ने मुनेश को जयपुर में स्कूटी दिलवाई और शिक्षक भरती परीक्षा के लिए उस का पीजी हौस्टल में एडमिशन कराया ताकि ससुराल वालों की नजर में वह एक अच्छा दामाद बना रहे. इस के अलावा वह रोजाना मुनेश को कई बार फोन करता और मैसेज भेजता ताकि लोगों को लगे कि दोनों एकदूसरे को खूब प्यार करते हैं.

लोकेश खुद वड़ोदरा में रहा. दोस्त प्रवेंद्र के नाम पर उस ने वड़ोदरा में किराए का मकान लिया. फिर प्रवेंद्र को नया मोबाइल दे कर जयपुर भेजा. योजनानुसार प्रवेंद्र ने मुनेश के साथ जयपुर से वड़ोदरा के लिए रवाना होते ही उस के मोबाइल की सिम निकाल कर फेंक दी ताकि उस की लोकेशन जयपुर में आती रहे.

इतना ही नहीं, उस ने पिता से पुलिस में बहू के लापता होने की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई. फिर दूसरे दिन ही जयपुर आ कर लोकेश ने मुनेश के अपहरण की कहानी गढ़ कर गांधीनगर थाना पुलिस की शिकायत की ताकि पुलिस अफसर शिकायत और अपहरण की कहानी में उलझे रहें.

लोकेश ने अपना मोबाइल हैंग होने का बहाना बना कर उसे फोरमैट करा दिया. इस से उस का संदिग्ध डाटा, मैसेज आदि डिलीट हो गए.

11 अप्रैल की रात हौस्टल में मुनेश की रूममेट आशा ने लोकेश को फोन कर के कहा कि मुनेश का टिफिन आया हुआ है लेकिन न तो मुनेश मिल रही है और न ही उस का नंबर लग रहा है. इस पर लोकेश ने रूममेट को सख्ती से कहा कि पीजी हौस्टल संचालक से मुनेश के बारे में पूछो, क्योंकि यह उस की जिम्मेदारी है.

मामले का खुलासा होने से पहले तक लोकेश अपने ससुराल वालों के साथ मिल कर मुनेश की तलाश में जुटा रहा ताकि उस पर किसी को कोई संदेह न हो.

लोकेश ने भले ही फिल्म दृश्यम से प्रेरित हो कर मुनेश की हत्या की साजिश नहीं रची हो, लेकिन उस ने 10 दिन तक पुलिस को गुमराह करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

यह विडंबना ही है कि केंद्र सरकार के अधिकारी लोकेश चौधरी ने प्रेमिका से शादी रचाने के लिए अपने हाथ पत्नी के खून से रंग लिए. भोलीभाली मुनेश शादी के सवा साल बाद भी अपने पति की शातिर चालों को नहीं समझ सकी. वह पति के विश्वास के भरोसे मारी गई. उस ने तो लोकेश के साथ सात जनम तक जीनेमरने की कसमें खाई थीं.

लोकेश और उस के दोस्त प्रवेंद्र ने जो कुछ किया, उस की सजा उन्हें कानून देगा. सवाल यह भी है कि लोकेश की प्रेमिका क्या कातिल प्रेमी का इंतजार करती रहेगी.

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