दुनिया भर में प्रसिद्ध डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 29 अप्रैल, 1948 को संत मस्ताना बलोचिस्तानी ने रूहानी संस्था के रूप में की थी. वह ‘हिज होलिनैस बेपरवाह मस्तानाजी महाराज’ के रूप में प्रसिद्ध हुए. इस डेरे का मुख्य मकसद था लोगों को धार्मिक शिक्षा देना. 18 अप्रैल, 1960 को मस्तानाजी के प्राण त्यागने के बाद 41 साल के शाह सतनाम सिंहजी को इस डेरे का मुखिया बनाया गया.

23 सितंबर, 1990 को महज 23 साल की उम्र में गुरमीत सिंह नाम के नौजवान ने डेरा की गद्दी संभाली. उस समय शाह सतनाम सिंहजी ने उन्हें नया नाम दिया था बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह. बाद में उन्होंने इस नाम के साथ ‘इंसां’ शब्द जोड़ लिया.

इस डेरे की पहले से ही काफी मान्यता थी. हरियाणा के शहर सिरसा में इस का मुख्यालय था, जहां प्रवचन सुनने के लिए हजारों अनुयायी आते थे. लेकिन गुरमीत राम रहीम सिंह के प्रमुख बनने के बाद डेरे की लोकप्रियता में जबरदस्त इजाफा हुआ. हिंदुस्तान में 46 जगहों पर इस के आश्रम स्थापित होने के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूएई, आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में भी इस डेरे की शाखाएं खुल गईं.

डेरा प्रबंधकों का दावा था कि सच्चा सौदा के अनुयायियों की संख्या 6 करोड़ तक पहुंच गई थी. जो भी था, बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को उन के अनुयायी भगवान का अवतार मानने लगे थे. सन 2015 में जारी सर्वाधिक शक्तिशाली भारतीयों की सूची में बाबा का नाम 96वें नंबर पर था.

लेकिन इस लोकप्रिय कथित ‘भगवान’ के खिलाफ डेरे की 2 साध्वियों की शिकायत पर दुष्कर्म के 2 मुकदमे दर्ज हो गए. इन मुकदमों की सुनवाई पंचकूला की सीबीआई अदालत में हो रही थी. 25 अगस्त, 2017 को अदालत में फैसला होना था कि दुष्कर्म के इन मामलों में बाबा गुरमीत राम रहीम इंसां दोषी हैं या नहीं?

अभी तक इन मुकदमों की सुनवाई वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए हो रही थी, लेकिन 25 अगस्त को बाबा को अदालत में हाजिर होना जरूरी था. बाबा को पंचकूला आना था तो उन के अनुयायी भी पंचकूला आ सकते थे. बाबा के बरी होने पर उन के अनुयायियों से कोई खतरा नहीं था, लेकिन अगर कहीं अदालत ने बाबा को दोषी ठहरा दिया तो स्थिति तनावपूर्ण हो सकती थी. इस के लिए पुलिस का चौकस रहना जरूरी था.

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असमंजस में पुलिस

इस तरह की स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने इलाके के असलहाधारकों को अपने हथियार थाने में जमा कराने के आदेश दे दिए. इस के बाद भी अगर किसी तरह का हंगामा होता है तो पुलिस ने उस से भी निपटने की व्यवस्था कर ली थी. हरियाणा के डीजीपी बलजीत सिंह संधू ने 20 अगस्त को ही कह दिया था कि रामपाल के मामले में बिगड़े हालात से पुलिस सबक ले चुकी है.

इसलिए इस बार स्थिति बिगड़ने नहीं दी जाएगी. अगर जरूरत पड़ी तो स्थिति से निपटने के लिए सेना भी बुलाई जा सकती है. इस बीच सिरसा स्थित डेरा के मुख्यालय पर डेरा प्रेमी इकट्ठे होने लगे थे, जिन की संख्या अब तक 20 हजार को पार कर चुकी थी. लेकिन यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी.

अब समस्या यह भी थी कि बाबा को सिरसा से पंचकूला किस रास्ते से ले जाया जाए. दरअसल, बाबा पर चल रहे मुकदमों में केवल दुष्कर्म वाले मुकदमों का फैसला आने वाला था. जबकि बाबा पर अन्य कई मुकदमे चल रहे हैं, जिन में 2 हत्या के भी हैं.

ये दोनों मुकदमे पत्रकार रामचंदर छत्रपति और डेरा प्रबंधन समिति के सदस्य रणजीत सिंह की हत्या के हैं. फिलहाल तय हुआ कि बाबा को सड़क मार्ग से न ला कर हवाई मार्ग से लाया जाए. इस के लिए हेलीकौप्टर की व्यवस्था तो कर ही ली गई, पंचकूला में सेक्टर-5 के परेड ग्राउंड को हेलीपैड के रूप में उपयोग करने की व्यवस्था की जाने लगी.

उधर पंचकूला में भी बाबा समर्थकों की भीड़ जुटने लगी थी. पहले यह संख्या सैकड़ों में थी. इस के बाद हजारों में हुई और फिर देखतेदेखते लाखों में पहुंच गई. इस भीड़ ने पंचकूला के ज्यादातर हिस्सों पर अपना कब्जा कर लिया था. पुलिस इन पर पैनी नजर रखे हुए थी.

पंचकूला और चंडीगढ़ में अस्थाई जेलों की व्यवस्था कर के इन लोगों की तलाशी भी ली जा रही थी. लेकिन इन लोगों से संदिग्ध जैसी कोई चीज बरामद नहीं हुई थी. इन लोगों का कहना था कि ये डेराप्रेमी हैं और अपने गुरु की एक झलक पाने के लिए यहां आए हैं. हालांकि स्थिति को देखते हुए ट्राइसिटी (मोहाली-चंडीगढ़-पंचकूला) के सभी शिक्षण संस्थान 3 दिनों के लिए बंद कर दिए गए थे.

शहर में बाबा समर्थक

पंचकूला पुलिस को लगता था कि जो भी डेरा समर्थक यहां इकट्ठा हो रहे हैं, अगर ये कोई हंगामा करते हैं तो इन्हें काबू कर लिया जाएगा. लेकिन लाखों की भीड़ देख कर पुलिस को यह असंभव सा लगने लगा. तब सेना की मदद मांगते हुए 3 दिनों के लिए वहां मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. आखिर 25 अगस्त, 2017 का वह दिन आ गया, जब बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह ‘इंसां’ को आ कर पंचकूला की सीबीआई अदालत के विशेष जज जगदीप सिंह लोहान के सम्मुख पेश होना था.

पहले चर्चा थी कि बाबा हेलीकौप्टर से आएंगे, लेकिन बाद में कहा गया कि 100 से ज्यादा गाडि़यों के काफिले के साथ वह सड़क मार्ग से पंचकूला पहुंचेंगे.

सुबह 8 बजे बाबा का यह काफिला सिरसा से पंचकूला के लिए चल पड़ा. रास्ते में जगहजगह सड़क के दोनों ओर उन की एक झलक पाने के लिए उन के अनुयायी हाथ जोड़े खड़े थे.

जबकि किसी को पता नहीं था कि बाबा किस गाड़ी में हैं. काफिले में काले रंग की 4 ऐसी गाडि़यां थीं, जिन के शीशे गहरे काले रंग के थे. बिना नंबर की ये चारों गाडि़यां हूबहू एक जैसी थीं. लोगों का अनुमान था कि इन्हीं लग्जरी गाडि़यों में से किसी एक में बाबा हैं.

उम्मीद थी कि यह काफिला दोपहर एक बजे तक पंचकूला पहुंच जाएगा. लेकिन कैथल में मौजूद बाबा के अनुयायियों ने गाड़ी के आगे लेट कर काफिले को आगे बढ़ने से रोक लिया. करीब घंटे भर की जद्दोजहद के बाद किसी तरह यह काफिला वहां से आगे बढ़ पाया.

2 बजे के बाद यह काफिला पंचकूला की सीमा में घुसा तो अन्य तमाम वाहनों को रोक कर केवल उन काले रंग की चारों कारों को ही आगे जाने दिया गया. क्योंकि उन्हीं चारों कारों में से एक में बाबा थे. अदालत के गेट पर पहुंच कर उन में से भी 2 कारों को रोक लिया गया. अब केवल उन 2 कारों को ही कोर्ट परिसर में दाखिल होने दिया गया, जिन में से एक में बाबा थे और दूसरी में उन की जैड प्लस सिक्योरिटी.

ठीक ढाई बजे अदालत की काररवाई शुरू हुई. वकील और जज साहब पहले से ही अदालत में मौजूद थे. बाबा के नाम की पुकार हुई तो सिरसा से उन के साथ आई उन की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत इंसां भी उन के साथ अदालत के अंदर आ गईं. इस के लिए उन्होंने पहले से ही विशेष अनुमति ले रखी थी.

बाबा को दोषी ठहराया

इस के बाद सक्षम जज जगदीप सिंह ने अपने फैसले के बारे में बताना शुरू किया, ‘अभियुक्त बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह पर उन की 2 साध्वियों ने दुष्कर्म के जो आरोप लगाए हैं, उस के बारे में सारी काररवाई पूरी करते हुए बहस भी हो चुकी है. इस सारी काररवाई के बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि सीबीआई की ओर से अभियोजन पक्ष का हर पहलू, हर दलील और हर प्रमाण मजबूत है.

‘दूसरी ओर बचाव पक्ष की ओर से प्रस्तुत किसी भी दलील में ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आया, जो किसी भी तरह से इस केस को कमजोर कर रहा हो. लिहाजा अभियुक्त बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को इस केस में दोषी पाया जाता है, इसलिए उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाए. इस मामले में सजा 28 अगस्त, 2017 को सुनाई जाएगी. अभियुक्त को उस दिन अदालत में पेश किया जाए.’

पुलिस ने बाबा को हिरासत में लेने की व्यवस्था करते हुए उन की जैड प्लस सिक्योरिटी सुविधा को निरस्त कर दिया. अपने वकीलों और पुलिस से घिरे बाबा कोर्टरूम से बाहर आ गए. जैसे ही बाबा को दोषी ठहराए जाने की खबर समर्थकों तक पहुंची, वे बेकाबू हो गए. जाने कहां से उन के हाथों में लोहे के सरिए और तलवारें आ गईं.

उन्हीं से न केवल पेड़ों की डालें काट कर डंडे बना लिए गए, बल्कि गोलाकार चौराहों को तोड़ कर पत्थरों की व्यवस्था कर ली गई. इस के बाद शुरू हो गए दहशतभरे वहशियाना हमले. थोड़ी ही देर में आगजनी का ऐसा खौफनाक मंजर दिखाई देने लगा, जिसे पंचकूला की धरती ने इस के पहले नहीं देखा था.

मीडियावालों को भी नहीं बख्शा गया. उन पर हमला कर के उन की ओबी वैनों को उलट कर उन में आग लगा दी गई. पुलिस और सेना इस स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही तैयार खड़ी थी. कुछ ही देर में वहां ऐसी स्थिति बन गई कि 2 दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए तो 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

इन में कुछ की हालत काफी गंभीर थी. 5 टीवी चैनलों की ओबी वैनें जलाने के अलावा 100 से अधिक अन्य वाहन जला दिए गए. इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हुए तमाम डेरा समर्थक आसपास की कालोनियों के मकानों की दीवारें फांद कर घरों में घुस गए. एक हजार डेराप्रेमियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

इस के तुरंत बाद पंचकूला और आसपास के इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया. आखिर क्या था साध्वियों के साथ दुष्कर्म का वह मामला, जिस में बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह को दोषी ठहराया गया था. इस के लिए हमें 15 साल पीछे जाना होगा, जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे.

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साध्वियों का मामला

24 सितंबर, 2002 को हिंदी में लिखी एक लंबीचौड़ी चिट्ठी पीएमओ में पहुंची, जिसे पढ़ कर हर कोई चौंक उठा था. उस चिट्ठी को यहां हूबहू पेश करना ही ठीक रहेगा.

सेवा में,

प्रधानमंत्री महोदय

  श्री अटल बिहारी वाजपेयी

  विषय: सच्चे सौदे वाले महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों के साथ किए गए बलात्कार के मामले की जांच के संबंध में

  श्रीमान जी,

  1. मैं पंजाब की रहने वाली एक लड़की हूं. मैं डेरा सच्चा सौदा, सिरसा (हरियाणा) में साध्वी के तौर पर पिछले 5 सालों से सेवा कर रही हूं. मेरे अलावा इस डेरे में और भी सैकड़ों लड़कियां हैं, जो रोजाना 18 घंटे सेवा करती हैं, पर हमारा शारीरिक शोषण होता है. डेरे के महाराज गुरमीत सिंह हम से बलात्कार करते हैं.

मैं बीए पास हूं. मेरे मातापिता उन के अंधभक्त हैं. उन के कहने पर मैं साध्वी बनी. साध्वी बनने के 2 साल बाद महाराज गुरमीत सिंह की एक खास चेली गुरजोत रात 10 बजे मेरे पास आई और कहा कि महाराज ने मुझे अपनी गुफा में बुलाया है. मैं खुश हुई कि महाराज ने मुझे अपनी गुफा में बुलाया है और मैं पहली बार महाराज के पास जा रही हूं.

जब मैं सीढि़यां उतर कर महाराज की गुफा में दाखिल हुई तो देखा कि महाराज बैड पर बैठे हुए हैं. उन के हाथ में टीवी का रिमोट था और वह ब्लू फिल्म देख रहे थे. उन के सिरहाने बिस्तर पर एक रिवौल्वर रखी थी. यह सब देख कर मैं घबरा गई. मैं ने महाराज के इस रूप के बारे में कभी सोचा भी नहीं था.

महाराज ने टीवी बंद कर दिया और मुझे अपने पास बिठा लिया. उन्होंने मुझे पानी पिला कर कहा कि मुझे इसलिए अपने पास बुलाया है, क्योंकि वह मुझे अपने करीब समझते हैं. यह मेरा पहला अनुभव था. महाराज ने मुझे अपनी जकड़ में ले कर कहा कि वह मुझे दिल से प्यार करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वह मेरे साथ प्यार करना चाहते हैं. मैं उन की चेली बनने के लिए अपना तनमनधन उन्हें सौंप चुकी हूं और उन्होंने मेरी यह भेंट स्वीकार कर ली है.

जब मैं ने इस पर ऐतराज किया तो उन्होंने कहा कि इस में कोई शक नहीं कि वह रब हैं, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि श्रीकृष्ण भी भगवान थे और उन के पास तमाम गोपियां थीं, जिन के साथ वह रासलीला रचाते थे. फिर भी लोग उन्हें भगवान मानते हैं, उन्हें कोई गलत नहीं कहता. इस में कोई हैरान होने वाली बात नहीं है.

  1. मैं इस रिवौल्वर से तुम्हें मार सकता हूं और तुम्हारी लाश भी यहीं दफन कर सकता हूं. तुम्हारे परिवार वाले मेरे पक्के भक्त हैं और उन्हें मुझ पर अंधा विश्वास है. मुझे यह अच्छी तरह पता है कि तुम्हारे परिवार वाले कभी भी मेरे खिलाफ नहीं जा सकते.
  2. सरकारों पर भी मेरा अच्छा असर है. हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री व कई केंद्रीय मंत्री मेरे यहां माथा टेकने आते हैं. वे मेरे खिलाफ कोई काररवाई नहीं कर सकते. मैं तुम्हारे परिवार वालों को नौकरियों से निकलवा सकता हूं. अपने सेवादारों से उन्हें कहीं मरवाखपवा भी सकता हूं.

हम उन की हत्या का कोई सबूत भी नहीं छोडें़गे. तुम्हें तो पता ही है कि हम ने पहले भी डेरे के मैनेजर फकीरचंद को गुंडों से मरवाया है. आज तक उस के कत्ल का कोई सुराग नहीं मिला है. डेरे की रोज 1 करोड़ रुपए की आमदनी है. हम नेता, पुलिस और यहां तक कि जज को भी खरीद सकते हैं.

  1. इतना सब कहने के बाद महाराज ने मेरे साथ जबरदस्ती की. महाराज पिछले 3 सालों से यह सब करते आ रहे हैं. हर 25-30 दिन बाद मेरी बारी आती है. मुझे यह भी पता चला है कि मुझ से पहले भी महाराज ने अपने पास जिन लड़कियों को बुलवाया है, उन के साथ भी वह यही सब करते आए हैं.

उन में से बहुत सारी लड़कियों की उम्र 35-40 साल है और वे शादी की उम्र पार कर चुकी हैं. उन के पास इस हाल में रहने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा है. इन में से कई लड़कियां काफी पढ़ीलिखी हैं, जिन के पास बीए, एमए, बीएड की डिग्रिया हैं. पर वे डेरे में नर्क भोग रही हैं, क्योंकि उन के परिवार वालों को महाराज पर अंधी श्रद्धा है.

  1. हम सफेद कपड़े पहन कर और सिर पर सफेद पटका बांध कर रहती हैं. मर्दों की तरफ देख भी नहीं सकतीं और महाराज के आदेश के मुताबिक उन से 8-10 फुट की दूरी से ही बात कर सकती हैं. हम देखने वालों को देवियां लगती हैं, पर हम वेश्याओं की जिंदगी जी रही हैं.

मैं ने कई बार इस बारे में अपने घर वालों को बताने की कोशिश कि डेरे में सब कुछ अच्छा नहीं है. पर मेरे परिवार वालों ने मुझे डांटते हुए यही समझाया कि डेरे से अच्छी जगह कोई नहीं है, क्योंकि हम महाराज की संगत में हैं. उन्होंने कहा कि मैं ने डेरे के बारे में अपने मन में गलत सोच पैदा कर ली है. घर वालों ने मुझे सद्गुरु का नाम जपने को कहा.

  1. मैं यहां मजबूर हूं कि मुझे महाराज की हर बात माननी पड़ती है. महाराज के हर हुक्म का पालन करना पड़ता है. यहां किसी लड़की को दूसरी लड़की से बात करने की इजाजत नहीं है. महाराज के आदेश के मुताबिक कोई लड़की टेलीफोन पर भी अपने घर वालों से बात नहीं कर सकती. अगर कोई लड़की डेरे की असलियत के बारे में किसी से कुछ कहती है तो उसे महाराज के आदेश के मुताबिक सजा दी जाती है.

कुछ दिनों पहले बठिंडा की एक लड़की ने महाराज की करतूतों के बारे में कुछ कह दिया था. तब अन्य चेलियों ने उस की काफी पिटाई की थी, जिस से उस की रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी. हड्डी में फ्रैक्चर होने की वजह से वह बिस्तर पर पड़ गई. इस के बाद उस के पिता ने डेरे की सेवादारी छोड़ दी और बेटी को ले कर अपने घर चले गए. वह महाराज और बदनामी के डर से किसी को कुछ बता भी नहीं पा रहे हैं.

  1. इसी तरह कुरुक्षेत्र की भी एक लड़की डेरा छोड़ कर अपने घर चली गई. जब उस ने सारी कहानी अपने घर वालों को बताई तो उस के भाई ने भी डेरा छोड़ दिया. वह भी यहां सेवादार के रूप में काम करता था. संगरूर की एक लड़की डेरा छोड़ कर अपने घर गई तो डेरे के हथियारबंद सेवादार/गुंडे उस के घर गए. दरवाजा अंदर से बंद कर के उन्होंने लड़की को जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि कोई बात बाहर नहीं जानी चाहिए.

इसी तरह मानसा, फिरोजपुर, पटियाला और लुधियाना की भी कई लड़कियां हैं, जो डेरे के बारे में कुछ भी कहने से डर रही हैं. वे डेरा छोड़ चुकी हैं, पर महाराज के सेवादारों की धमकी के डर से वे कुछ कह नहीं पा रही हैं. इसी तरह सिरसा, हिसार, फतेहाबाद, हनुमानगढ़ और मेरठ जिलों की भी लड़कियां डेरे के गुंडों के डर से अपने साथ कई ज्यादतियों के बारे में कुछ कह नहीं पा रही हैं.

अगर मैं भी अपना नामपता बता दूं तो मेरी भी जान को खतरा है. मुझे और मेरे परिवार वालों को खत्म कर दिया जाएगा. लेकिन मैं आम लोगों को सच्चाई बताना चाहती हूं, क्योंकि अब मुझ से बरदाश्त नहीं हो रहा है. पर मुझे अपनी जान का खतरा है. अगर प्रैस या किसी और एजेंसी के जरिए जांच कराई जाए तो डेरे में रह रही 40-50 लड़कियां अपनी सच्चाई बताने को सामने आ जाएंगी.

हमारा मैडिकल भी करवाया जा सकता है कि हम कुंवारी चेलियां हैं या नहीं? इस की जांच की जाए कि हमारा कुंवारापन किस ने भंग किया है तो यह बात सामने आएगी कि महाराज राम रहीम सिंह डेरा सच्चा सौदा ने हमारी जिंदगियां बरबाद की हैं.

 एक दुखी अबला

मामले की सीबीआई जांच

यह चिट्ठी तत्कालीन प्रधानमंत्री ने पढ़ी. इस के बाद कुछ चैनलों से निकलते हुए इस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई. जांच कर के दिसंबर, 2002 में सीबीआई ने राम रहीम के खिलाफ भादंवि की धाराओं 376, 506 एवं 509 के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर के अपनी काररवाई शुरू कर दी.

इस के बाद डेरे की ओर से दिसंबर, 2003 में इस काररवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई. इस से अक्टूबर, 2004 तक मामले में स्टे लग गया. स्टे खत्म होते ही जांच में तेजी आ गई. सीबीआई ने 2 ऐसी साध्वियों को ढूंढ निकाला, जो बाबा के खिलाफ बयान देने को तैयार थीं. सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में उन के बयान दर्ज करवा दिए गए.

आखिर अभियोजन पक्ष के 15 गवाहों की सूची के साथ इस केस की चार्जशीट 27 अक्तूबर, 2007 को सीबीआई की विशेष अदालत में पेश कर दी गई. बचावपक्ष की ओर से 37 गवाहों की सूची अदालत को सौंपी गई. पहले यह केस अंबाला की सीबीआई कोर्ट में चला, बाद में इस की सुनवाई पंचकूला स्थित सीबीआई कोर्ट में होने लगी.

25 जुलाई, 2017 को कोर्ट ने रोजाना सुनवाई के आदेश कर दिए. 17 अगस्त को बहस होने के बाद फैसले की तारीख 25 अगस्त, 2017 तय कर दी गई. अभी तक ज्यादातर सुनवाई वीडियो कौन्फ्रैंसिंग के जरिए हो रही थी, लेकिन 25 अगस्त को बाबा का अदालत में हाजिर होना जरूरी था.

25 अगस्त को तामझाम के साथ बाबा अदालत पहुंचे. लेकिन जैसे ही उन्हें दोषी करार दिया गया, दंगे भड़क उठे. इस बीच बाबा को एक हेलीकौप्टर से रोहतक की सुनारिया जेल ले जाया गया. उन की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत इंसां भी उन के साथ जेल तक गईं. रात में वह सफेद रंग की कार एचआर26बी एस5426 से कुछ लोगों के साथ सिरसा लौट गईं.

इस बीच पंचकूला में हुए दंगों ने जैसे पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया. बस सेवा एवं रेल सेवा चरमरा गई. अनेक जगहों पर कर्फ्यू लगा दिया गया. उपद्रव में मरने वालों की संख्या 38 तक पहुंच गई. पंचकूला के डीसीपी अशोक कुमार के अलावा कोर्ट में बाबा का बैग उठा कर चलने वाले डिप्टी एडवोकेट जनरल गुरदास सिंह सलवारा को निलंबित कर दिया गया.

डेरा सच्चा सौदा पूरी तरह संदेह के दायरे में आ गया था. अटकलों का बाजार पूरी तरह गरम था. सब से बड़ी अटकल यह थी कि पंचकूला पहुंचे अनुयायियों को 1 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वहां बुलाया गया था. भीड़ अधिक हो गई, जिस से उस में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग घुस गए. कहा जाता है कि उन्हें 2 लाख रुपए प्रति व्यक्ति के हिसाब से दिए गए. इन का काम बाबा को वहां से भगाना था.

बहरहाल, 28 अगस्त, 2017 भी आ गई, जिस दिन बाबा को सजा सुनाई जानी थी. सुरक्षा की दृष्टि से सुनारिया जेल के भीतर ही अस्थाई तौर पर अदालत बनाई गई. सजा सुनाए जाने के बारे में बाबा की ओर से कहा गया कि वह 50 वर्ष के हो चुके हैं और उन्हें हाइपरटेंशन, एक्यूट डायबिटीज व सघन कमर दर्द की शिकायत है. उन के साथ उन की वृद्ध मां भी रहती हैं, जो बुढ़ापे की कई बीमारियों से ग्रसित हैं. बाबा ने लोकसेवा में कई विश्व रिकौर्ड बनाए हैं. उन की कोशिश से तमाम स्कूल कालेज चल रहे हैं.

इन तथ्यों के आधार पर बाबा की ओर से दरख्वास्त की गई कि अदालत उन के मामले में नरमी बरतते हुए उन्हें कम से कम सजा दे. अभियोजन पक्ष की ओर से चंद शब्दों में पहले ही अदालत से अपील कर दी गई थी कि रेयर औफ रेयरेस्ट की श्रेणी में आने वाला यह एक ऐसा केस है, जिस में अभियुक्त ने शराफत, धर्म और महापुरुष का लबादा ओढ़ कर अपराध किया है. यही नहीं, उन्होंने उस अपराध को बारबार दोहराया है.

सजा के मुद्दे पर दोनों पक्षों को सुनने के बाद विद्वान सीबीआई जज जगदीप सिंह ने अपना जो फैसला सुनाया, वह इस प्रकार था—

अदालत का फैसला

अपने ही आश्रम में अपने आधीन रहने वाली 2 साध्वियों को डराधमका कर उन से दुष्कर्म करने के आरोप में दोषी गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां को अलगअलग 10-10 सालों की कैद बामशक्कत दी जाती है.

पीडि़त युवतियों को हरजाना दिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि फाइल के निरीक्षण से यह बात सामने आई है कि अभियुक्त अपनी फिल्मों के प्रमोशन के लिए बारबार विदेश जाने की अदालत से अनुमति लेता रहा है. तब उसी की याचिका में यह बात भी सामने आती रही है कि फिल्म के निर्माण पर उस का करोड़ों रुपया लगा है, इसलिए विदेश जा कर इस का प्रमोशन करना उस के लिए बहुत जरूरी है. लिहाजा इस से पता चलता है कि उस के पास पैसों की कोई कमी नहीं है. इसलिए यह अदालत दोनों पीडि़ताओं को 15-15 लाख रुपए हरजाना देने का आदेश देती है.

फिलहाल अटकलों के साथसाथ बाबा की ऐसी कारगुजारियां सामने आ रही हैं, जिन से यह बात साफ हो जाती है कि डेरे के भीतर उस ने एक ऐसी सल्तनत बना रखी थी, जिस का सर्वेसर्वा अकेला वही था. देश के कानून का जैसे उसे कोई भय नहीं था.

लेकिन उसी कानून ने उसे राजमहल से जेल की कोठरी तक पहुंचा दिया. अब उस के वकील अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं.

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