कमाई की कुल रकम 80 लाख रुपए और नकदीगहने साढ़े  4 करोड़ रुपए से ज्यादा के. यह है आईपीएस और बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सीनियर सुपरिंटैंडैंट पुलिस विवेक कुमार की काली कमाई का आंकड़ा. इतने की तो नकदी, फिक्स्ड डिपौजिट और गहने मिले हैं.

आमदनी से ज्यादा धनदौलत होने के मामले में छापामारी के बाद एसएसपी विवेक कुमार को सस्पैंड कर दिया गया है. उन पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत विशेष निगरानी इकाई ने केस दर्ज किया है.

एसएसपी विवेक कुमार के ठिकानों पर छापामारी के बाद 4 करोड़, 35 लाख रुपए की चल संपत्ति का पता चला है. मुजफ्फरपुर के विजया बैंक के 2 लौकरों से 35 लाख, 97 हजार, 5 सौ रुपए नकद, 10 लाख, 75 हजार रुपए के फिक्स्ड डिपौजिट के कागजात और 9 लाख, 61 हजार रुपए के गहने बरामद किए गए.

मुजफ्फरपुर के यूको बैंक के 3 लौकरों से 18 लाख रुपए नकद, एक करोड़, 85 लाख रुपए के फिक्स्ड डिपौजिट के कागजात और 31 लाख, 75 हजार रुपए के गहने मिले. ओवरसीज बैंक के 2 लौकरों में 75 लाख, 49 हजार, 5 सौ रुपए नकद पाए गए.

केनरा बैंक के एक लौकर से 29 लाख, 38 हजार रुपए नकद बरामद किए गए. बैंक औफ बड़ौदा के एक लौकर से 480 ग्राम सोना, 570 ग्राम चांदी के गहने और विदेशी करंसी मिली.

एसएसपी विवेक कुमार के ठिकानों के बाद जब स्पैशल विजिलैंस यूनिट की टीम ने उन की ससुराल में छापा मारा वहां बैंक लौकर की 6 चाबियां मिलीं.

इस के साथ ही ससुर वेदप्रकाश कर्णवाल, सास उमा रानी और साले निखिल कर्णवाल के साथ विवेक कुमार द्वारा सौ से ज्यादा बार नकदी निकालने व जमा किए जाने का पता चला. विवेक कुमार इन लोगों के खातों में रकम जमा कर के निकाल लेते थे.

एसएसपी विवेक कुमार के खिलाफ आमदनी से ज्यादा संपत्ति होने के मामले में 22 पन्ने की एफआईआर दर्ज की गई. उन के ऊपर आमदनी से 30 गुना ज्यादा दौलत होने का खुलासा हुआ है.

एसएसपी विवेक कुमार और उन की पत्नी निधि कुमारी के पास तकरीबन एक करोड़, 6 लाख रुपए की दौलत होने और तकरीबन एक करोड़, 27 लाख रुपए के गैरकानूनी लेनदेन होने का पता चला है.

15 अप्रैल, 2018 को साल 2007 बैच के आईपीएस और मुजफ्फरपुर के एसएसपी विवेक कुमार के सरकारी आवास, दफ्तर, ससुराल और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के वरुण विहार महल्ले के घर समेत कुल 4 ठिकानों पर छापामारी की गई थी.

मुजफ्फरपुर के सरकारी आवास से 6 लाख, 25 हजार रुपए नकद, साढ़े 5 लाख रुपए के गहने, 45 हजार के पुराने नोट समेत जायदाद से जुड़े कई दस्तावेज मिले थे, जबकि ससुराल में तकरीबन 2 करोड़ रुपए के फिक्स्ड डिपौजिट के कागजात मिले. उन में से 22 लाख, 74 हजार रुपए के 23 फिक्स्ड डिपौजिट विवेक कुमार की पत्नी निधि कुमारी के नाम से हैं.

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विवेक कुमार की अब तक की आमदनी 80 लाख रुपए है, जिस में से 46 लाख, 48 हजार रुपए का खर्च दिखाया गया है.

इस हिसाब से विवेक कुमार की बचत 33 लाख, 31 हजार रुपए होती है, जबकि उन्होेंने बचत की रकम में एक करोड़, 6 लाख रुपए दिखाए हैं.

विवेक कुमार की सास उमा रानी और निधि कुमारी के नाम से 3 लाख रुपए के जौइंट फिक्स्ड डिपौजिट मिले हैं. विवेक कुमार के ससुर और सास के नाम से 46 लाख, 70 हजार रुपए के 29 फिक्स्ड डिपौजिट के कागजात मिले हैं. ससुर वेदप्रकाश के नाम से 14 लाख रुपए के 5 फिक्स्ड डिपौजिट हैं.

वेदप्रकाश और साले निखिल कर्णवाल के नाम से 35 लाख, 18 हजार रुपए के 27 फिक्स्ड डिपौजिट मिले हैं. निखिल कर्णवाल के नाम से डेढ़ लाख रुपए के फिक्स्ड डिपौजिट हैं.

विवेक कुमार ने अपने साले की पत्नी के नाम से भी 45 लाख रुपए के 2 फिक्स्ड डिपौजिट करवा रखे थे.

विवेक कुमार के ससुर रिटायर्ड सरकारी अफसर हैं और उन्हें महज 23 हजार रुपए बतौर पैंशन मिलती है और उन की सास हाउसवाइफ हैं. इस के बाद भी उन के नाम पर एक करोड़, 6 लाख रुपए निधि के फिक्स्ड डिपौजिट के कागजात मिले.

एसएसपी विवेक कुमार ने अपनी बीवी के नाम पर किए गए 5 फिक्स्ड डिपौजिट को ससुर से मिले गिफ्ट के तौर पर दिखाया गया. उसी दिन उतनी ही रकम सासससुर के अकाउंट में भी डाल दी.

एसएसपी विवेक कुमार ने पिछले दिनों अपनी संपत्ति का ऐलान करते हुए सरकार को यह जानकारी दी थी कि उन के और उन की पत्नी के पास 7 लाख रुपए के गहने हैं, लेकिन छापामारी में 60 लाख रुपए के गहने मिले.

सरकार को दी गई जानकारी में उन्होंने अपने पास 5 हजार रुपए और पत्नी के पास 36 हजार रुपए नकद होने की बात कही थी, पर छापा पड़ा तो पौने 2 करोड़ रुपए नकद मिले.

इस के अलावा 1685 कनाडाई डौलर, 498 अमेरिकी डौलर और 1468 मलेशियाई करंसी भी छापामारी में विवेक कुमार के घर से मिली.

विवेक कुमार की शराब माफिया से भी सांठगांठ के सुराग मिले हैं. निगरानी सूत्रों के मुताबिक, मुजफ्फरपुर के मारीपुर इलाके के एक होटल में एसएसपी विवेक कुमार के साथ शराब माफिया की मीटिंग भी हुई थी.

उस मीटिंग में बिहार के 4 शराब माफिया के अलावा हरियाणा के भी एक शराब कारोबारी ने हिस्सा लिया था.

उस मीटिंग के बाद जिले के 6 ऐसे थानेदारों को हटा दिया गया था जो शराबबंदी के लिए मुस्तैदी से काम कर रहे थे. उन थानों में एसएसपी विवेक कुमार ने अपने वफादारों को तैनात कर दिया था.

पुलिस हैडर्क्वाटर के सूत्रों के मुताबिक एसएसपी विवेक कुमार की पोस्टिंग जहां भी रही वहां वे विवादों में रहे. भागलपुर जिले में वे 28 जून, 2014 से ले कर 8 अप्रैल, 2016 तक एसएसपी रहे. वहां के थानेदारों की पोस्टिंग के मामले में वे कई बार विवादों में घिरे थे. जगदीशपुर थाने के थानेदार ने आईजी से विवेक कुमार की शिकायत की थी.

जगदीशपुर थाना बालू की गैरकानूनी खान से होने वाली कमाई के लिए बदनाम है. थानेदार ने एसएसपी विवेक कुमार पर बालू माफिया से संबंध होने का आरोप लगाया था.

इश्क के मामले में एक लड़की पर ही बाप की हत्या का आरोप लगाने के मामले में विवेक कुमार की जम कर किरकिरी हुई थी.

कोर्ट ने जब एसएसपी विवेक कुमार से पूछा कि केस डायरी में क्या कोई सुबूत है, जिस के आधार पर लड़की को बाप का कातिल बताया गया है, तो विवेक कुमार सही से जवाब नहीं दे सके थे.

दारोगा की खुदकुशी में विवेक का हाथ?

मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र के पानपुर करियात ओपी में तैनात दारोगा संजय कुमार गौड़ की मौत के बाद उन की पत्नी ने 3 जुलाई, 2017 को दरौली थाने में एसएसपी विवेक कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए अर्जी दी थी. उस अर्जी में एसएसपी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे.

दारोगा की पत्नी कल्याणी देवी दरौली थाना के मुड़ा कर्मवी गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने कहा कि उन के पति खुदकुशी नहीं कर सकते हैं. उन की हत्या की गई है. पति इस बात से काफी परेशान थे कि एसएसपी ने उन से थानेदार बनाने के लिए 10 लाख रुपए मांगे थे, जिस के बाद साढ़े 6 लाख रुपए दिए गए. साढ़े 3 लाख रुपए बाद में देने के लिए कहा था.

साढ़े 6 लाख रुपए ले कर उन की पोस्टिंग थानेदार के तौर पर कर दी गई, पर तुरंत ही बकाया साढ़े 3 लाख रुपए देने का दबाव बनाने लगे. जब उन के पति ने बकाया रकम नहीं दी तो एक दिन बाद ही उन्हें थानेदार के पद से हटा दिया गया था. इस मामले में उस समय एसएसपी विवेक कुमार ने सफाई दी थी कि थानेदारी के लिए रुपए मांगने और सताने का आरोप झूठा है.

दारोगा संजय कुमार गौड़ की खुदकुशी के मामले की जांच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा गया था. संजय कुमार ने 2 जुलाई, 2017 को खुदकुशी कर ली थी. पानपुर करियात ओपी में तैनात दारोगा मोहम्मद हारून की सर्विस रिवाल्वर से उन के ही कमरे में संजय ने अपने सिर में गोली मार ली थी. इस घटना के पिछले 5 महीने से उन की तनख्वाह रोक कर रखी गई थी.

साल 2009 बैच के दारोगा संजय कुमार गौड़ मुजफ्फरपुर से पहले वैशाली जिले में तैनात थे. एक दिन के लिए उन्हें गायघाट थाने का प्रभारी बनाया गया था.

बिहार पुलिस एसोसिएशन ने एडीजी हैडर्क्वाटर एसके सिंघल से मिल कर मुजफ्फरपुर के एसएसपी विवेक कुमार को हटाने की मांग की थी. एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार सिंह और महामंत्री दीनबंधु राम कहते हैं कि एसपी और एसएसपी अकसर दारोगा, जमादार और सिपाहियों को सताते रहते हैं. छुट्टी तक नहीं देते हैं. ठीक से बरताव नहीं करते हैं. 5 महीने तक तनख्वाह नहीं मिलने पर परिवार की क्या हालत हो सकती है, इस का अंदाजा लगाया जा सकता है.

पुलिस अफसरों से तंग आ कर पिछले कुछ महीनों में जमुई, आरा, नवादा, बक्सर जिलों के दारोगा खुदकुशी कर चुके हैं.

संजय कुमार गौड़ सिवान जिले के दरौली थाने के मुड़ा कर्मवीर गांव के रहने वाले थे. उन के पिता का नाम काशीनाथ गौड़ है.